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विधि महाविद्यालय में मूट कोर्ट, एक आरोपी बरी, एक को आजीवन कारावास

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24 न्यूज अपडेट. उदयपुर। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय विधि महाविद्यालय के एलएल.बी. तृतीय वर्ष के छात्रों ने आज मूट कोर्ट का आयोजन किया। उपरोक्त मूट कोर्ट में दो मूट कोर्ट का मंचन किया गया जिसमें एक मामले में मुलजिम हुए बरी । लेकिन दूसरे में आजीवन कारावास की सजा हुई। पहला मामला धर्मेंद्र बनाम राज्य पर आधारित था इस मामले में भारतीय दंड संहिता के तहत 201/34 के तहत प्रकरण की कार्यवाही की गई। कोर्ट में केस आया कि अनुसार, 5 अक्टूबर 2010 को फरियादी ने थाना बांसवाड़ा में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उनकी पुत्री डिम्पल की हत्या उसके पति धर्मेंद्र, ससुर मंगत राम, सास प्रमिला देवी एवं अन्य ससुराल पक्ष के लोगों ने दहेज में टी.वी. न देने के कारण षड्यंत्रपूर्वक की। हत्या के सबूत नष्ट करने के लिए डिम्पल की लाश को फंदे से लटकाया गया। इस दौरान, अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए, तथा बचाव पक्ष की जीत हुई और अभियुक्तगण को रिहा किया गया।
द्वितीय मामला राज्य बनाम मांगीलाल मामले के तथ्यों पर आधारित था। यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 341, धारा 302 और सपठित धारा 34 से संबंधित था। इस मामले के तीनों अभियुक्तों को धारा 302 के तहत सपठित धारा 34 के तहत आजीवन कारावास और प्रत्येक को 50,000 रुपये के जुर्माने की सज़ा सुनाई गई। साथ ही, धारा 341 के तहत प्रत्येक अभियुक्त को एक माह का साधारण कारावास और 500-500 रुपये के जुर्माने से दंडित किया गया। पहली मूट कोर्ट में न्यायाधीश की भूमिका में प्रियंका जैन, अभियुक्त के वकील के रूप में आदर्श गोपावत व प्रियंशिका यादव और अभियोजन पक्ष के वकील के रूप में अभय शेखावत, कनिष्का दवे व याशिका श्रीमाल ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए। अन्य अधिवक्ता के रूप में -लक्ष्मी अखावत, गौरव मेहरा, ओम प्रकाश गर्ग, कीर्ति जैन, शुभम देवपुरा थे। द्वितीय मूट कोर्ट में पीठासीन अधिकारी की भूमिका में दीक्षिता निमावत, अभियोजन पक्ष के वकील के रूप में दीपांशा जैन और निष्ठा मेनारिया ने तर्क प्रस्तुत किए। बचाव पक्ष के वकील के रूप में यशवर्धन सिंह चौहान और वरुल माहेश्वरी ने अपनी दलीलें पेश की। मूट कोर्ट की कार्यवाही का संचालन छात्रा नेहा सोनी और निकिता स्वर्णकार ने किया ।
इस अवसर पर विधि महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रोफेसर आनंद पालीवाल ने बताया कि मूट कोर्ट के आयोजन से छात्रों के लिए न केवल शैक्षणिक रूप से महत्वपूर्ण साबित होता हैं, बल्कि उन्हें न्यायिक प्रणाली और उसकी कार्यप्रणाली को गहराई से समझने का अवसर भी मिलता हैं। छात्रों को मार्गदर्शन विधि महाविद्यालय के अतिथि संकाय सदस्य ओम बार्बर ने दिया। इस अवसर पर विधि महाविद्यालय के सह आचार्य एसोसिएट डीन डॉ. शिल्पा सेठ, डॉ. भाविक पानेरी, डॉ. कल्पेश निकावत, सहायक आचार्य पंकज मीणा, डॉ. पंकज भट्ट, डॉ. सुनीता सोनी, डॉ.आभा शर्मा, ममता डांगी और विधि छात्र उपस्थित थे।

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