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विद्या भवन ने केवल विद्यार्थी नहीं, जिम्मेदार नागरिक तैयार किए ,महामहिम गुलाब चंद कटारिया के उद्बोधन के साथ कर्मचारी संघ का शपथ ग्रहण समारोह सम्पन्न

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24 News Update उदयपुर। विद्या और संस्कारों की समृद्ध परंपरा के लिए प्रसिद्ध विद्या भवन में आयोजित विद्या भवन सोसायटी कर्मचारी संघ के शपथ ग्रहण समारोह में पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि विद्या भवन केवल शिक्षा देने वाली संस्था नहीं है, बल्कि यह समाज को दिशा देने वाली एक आदर्श संस्था रही है। यहां से शिक्षित हुए अनेक विद्यार्थी आज देश के महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर रहे हैं, जो इस संस्थान की गौरवशाली परंपरा का प्रमाण है।

अपने उद्बोधन में उन्होंने भावुक होकर कहा कि वे स्वयं भी विद्या भवन के विद्यार्थी रहे हैं और यहां बिताए गए दिन आज भी उनकी स्मृतियों में ताजा हैं। उन्होंने बताया कि विद्या भवन के संस्थापक डॉ. मोहन सिंह मेहता की सोच अत्यंत दूरदर्शी थी। उनकी शिक्षा की अवधारणा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसमें संस्कार, समानता और सामाजिक जिम्मेदारी को भी समान महत्व दिया गया था।

उन्होंने अपने छात्र जीवन की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वे चौथी कक्षा में पढ़ते थे, तब राजस्थान के मुख्यमंत्री का पुत्र भी अन्य विद्यार्थियों के साथ सामान्य रूप से पढ़ता था। इससे स्पष्ट होता है कि विद्या भवन में अमीर और गरीब के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं था और सभी बच्चों को समान वातावरण में शिक्षा प्राप्त होती थी।

महामहिम ने कहा कि विद्या भवन का विशाल परिसर और यहां का शैक्षणिक वातावरण विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने संस्थापक मोहन सिंह मेहता की प्रतिमा के अनावरण को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे आने वाली पीढ़ियों को उनके आदर्शों और विचारों को स्मरण करने की प्रेरणा मिलेगी।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने हल्के हास्य के साथ कहा कि कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने के लिए उनकी गाड़ी खेल मैदान से होकर गुजरी, जिसके लिए मेहता ने विद्यार्थियों से क्षमा भी मांगी।

उन्होंने कहा कि विद्या भवन से जुड़े कालूलाल श्रीमाली ने देश के शिक्षा मंत्री के रूप में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। इससे यह स्पष्ट होता है कि इस संस्था ने देश को अनेक महान शिक्षाविद और नेतृत्वकर्ता दिए हैं।

महामहिम ने बताया कि वे स्वयं भी विद्या भवन के छात्रावास में रहे हैं और वहां का अनुशासन, आत्मनिर्भरता तथा सामूहिक जीवन का अनुभव उनके व्यक्तित्व निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।

उन्होंने कहा कि आज समाज को विद्या भवन जैसी संस्थाओं की अत्यंत आवश्यकता है, जहां शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार और जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण किया जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व का प्रभाव इतना गहरा था कि उनके एक आह्वान पर देशभर के लोगों ने सोमवार का व्रत रखना शुरू कर दिया था। यह उनके आचरण और विश्वास का प्रतीक था।

महामहिम ने कहा कि यदि सोच सकारात्मक हो और उद्देश्य समाजहित के हों तो इतिहास की तरह आज भी भामाशाह जैसे सहयोगी समाज में मिल जाते हैं। उन्होंने मेवाड़ की महान परंपरा का उल्लेख करते हुए पन्नाधाय के त्याग और बलिदान को स्मरण किया और कहा कि ऐसी माताओं के त्याग ने इस भूमि को गौरवशाली बनाया है।

इस अवसर पर विद्या भवन सोसायटी कर्मचारी संघ का शपथ ग्रहण समारोह भी गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने संगठन के प्रति निष्ठा और समर्पण के साथ अपने दायित्वों के निर्वहन की शपथ ली।

संघ के संजय धाकड़ ने बताया कि कार्यक्रम में सोसायटी के उपाध्यक्ष भगवत सिंह बाबेल ने कहा कि विद्या भवन शिक्षा के क्षेत्र में सदैव अग्रणी रहा है। यहां शिक्षा के साथ-साथ विभिन्न सहशैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विशेष बल दिया जाता है, जहां सभी वर्गों के विद्यार्थी समान रूप से शिक्षा ग्रहण करते हैं।

वहीं सोसायटी के मुख्य संचालक राजेन्द्र भट्ट ने बताया कि विद्या भवन निरंतर नवाचारों के माध्यम से आगे बढ़ रहा है। खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए शीघ्र ही एक आधुनिक स्पोर्ट्स अकादमी प्रारंभ की जाएगी, जिससे विद्यार्थी शिक्षा के साथ-साथ खेल के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित कर सकेंगे।

समारोह में कर्मचारी संघ के संरक्षक प्रो. हेमेन्द्र सिंह चण्डालिया तथा सलाहकार दीपक शर्मा सहित संस्थान के विभिन्न संस्था प्रधान, कर्मचारी, कार्यकर्ता एवं अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए संयोजक सुधीर कुमावत, महामंत्री नंदकिशोर छीपा और अध्यक्ष फिरोज खान ने सभी सदस्यों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।

समारोह के अंत में यह भावना स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आई कि विद्या भवन की गौरवशाली परंपरा केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्कार, समानता और समाज सेवा की उस विरासत का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को बेहतर नागरिक और जिम्मेदार इंसान बनने की प्रेरणा देती रहेगी।

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