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वृंदा करात के नेतृत्व में पीड़ित महिलाएं संभागीय आयुक्त से मिलीं, झाड़ोल में आदिवासियों पर अत्याचार का मामला गरमाया

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24 News Update उदयपुर। झाड़ोल तहसील के अंबासा गांव के कोदर फला में पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि 12 फरवरी को हुई कार्रवाई के दौरान दो पुलिसकर्मियों और उनके साथ मौजूद 15–20 वन कर्मियों ने कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग किया, जिसमें एक तीन माह का बच्चा अपनी मां की गोद से छूटकर नीचे गिर गया। परिजनों का कहना है कि बच्चा बाल-बाल बच गया, लेकिन उसके शरीर पर चोट के निशान अब भी मौजूद हैं।
घटना से आक्रोशित पीड़ित महिला और अन्य आदिवासी महिलाएं सोमवार को पूर्व सांसद वृंदा करात के नेतृत्व में प्रज्ञा केवलरवानी से मिलीं। प्रतिनिधिमंडल ने संभागीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए दोषी पुलिस एवं वन कर्मियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की, साथ ही प्रभावित परिवारों को बेदखल न करने की अपील भी की।
आदिवासी जन अधिकार मंच के बाबूलाल वडेरा ने बताया कि प्रभावित 25–30 आदिवासी परिवार मूल रूप से कोटड़ा क्षेत्र के जूड़ा के रहने वाले हैं। बांध परियोजना की सीमा में उनकी जमीन आने के कारण उन्हें वहां खेती से रोका गया, जिसके बाद वे अंबासा क्षेत्र की वन भूमि पर आकर बसे। वडेरा का आरोप है कि इस दौरान वन विभाग के एक अधिकारी द्वारा उनसे यह कहकर 12 लाख रुपये लिए गए कि उन्हें परेशान नहीं किया जाएगा और भविष्य में वन भूमि के पट्टे भी दिलाए जाएंगे। परिवारों ने इस भरोसे पर अपने पशु और आभूषण तक बेचकर राशि जुटाई, लेकिन बाद में कार्रवाई शुरू हो गई।
माकपा जिला सचिव एवं पूर्व पार्षद राजेश सिंघवी ने आरोप लगाया कि एक ओर आदिवासियों से पैसे लेकर पट्टे दिलाने का भरोसा दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर उदयपुर जिले में हजारों आदिवासी वर्षों से आवेदन करने के बावजूद आज तक पट्टों से वंचित हैं और बेदखली की कार्रवाई लगातार जारी है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
वडेरा ने बताया कि संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरवानी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रतिनिधिमंडल में आदिवासी जनाधिकार एका मंच के जिलाध्यक्ष हाकरचंद खराड़ी, सदस्य होलियाराम, माकपा शहर सचिव हीरालाल सालवी सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल थे।

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