24 News update मुंबई। भारतीय फिल्म और टेलीविजन जगत की प्रतिष्ठित हस्ती धीरज कुमार का 15 जुलाई को मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में निधन हो गया। सोमवार को सांस लेने में तकलीफ होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद मंगलवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। बुधवार सुबह उनका अंतिम संस्कार विले पार्ले स्थित पवनहंस श्मशान भूमि में पूरे सम्मान के साथ किया गया। अस्पताल से उनका पार्थिव शरीर अंधेरी वेस्ट स्थित उनके आवास लाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए टीवी और फिल्म इंडस्ट्री की कई जानी-मानी हस्तियां पहुंचीं। रजा मुराद, असित मोदी, अशोक पंडित, टीना घई और दीपक काजिर जैसी हस्तियों ने उनके दर्शन किए और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। “हमने एक सच्चा और सरल इंसान खो दिया” – रजा मुराद धीरज कुमार के पुराने मित्र और वरिष्ठ अभिनेता रजा मुराद ने गहरे दुख के साथ उन्हें याद किया। एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा,“उन्होंने न सिर्फ शोहरत, बल्कि इज्जत भी कमाई। आखिरी वक्त तक सक्रिय रहे। हमारी आखिरी मुलाकात मनोज कुमार के अंतिम संस्कार में हुई थी। यकीन नहीं हो रहा कि वो इतनी जल्दी हमें छोड़कर चले गए। वो बेहद फिट थे, पैरालिसिस से भी उबर गए थे। उन्होंने एक ईमानदार जिंदगी जी, और एक ऐसा साम्राज्य खड़ा किया जिसकी नींव में सच्चाई और सादगी थी। हम दोनों एक ही अपार्टमेंट में रहते थे। धीरज मेरे पड़ोसी ही नहीं, मेरे दिल के करीब भी थे।” असित मोदी बोले – “टीवी इंडस्ट्री के लिए अपूरणीय क्षति” ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के निर्माता असित मोदी ने भी अंतिम दर्शन किए और शोक जताते हुए कहा,“धीरज जी का यूं अचानक जाना टीवी इंडस्ट्री के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है। मैं एक हफ्ते पहले ही उनसे मिला था, तब वे बिल्कुल ठीक थे। यह खबर सुनकर गहरा आघात लगा है।” धीरज कुमार : एक बहुआयामी व्यक्तित्व धीरज कुमार ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी और उन्होंने 1960 के दशक के फिल्मफेयर टैलेंट हंट में तीसरा स्थान हासिल किया था, जहां पहले स्थान पर राजेश खन्ना और दूसरे पर सुभाष घई रहे थे। इसके बाद तीनों ने हिंदी सिनेमा में कदम रखा और अपनी-अपनी पहचान बनाई। 1970 से लेकर 1985 तक धीरज कुमार ने ‘हीरा पन्ना’, ‘शिरडी के साईं बाबा’, ‘सरगम’, ‘मांग भरो सजना’, ‘क्रांति’, ‘पुराना मंदिर’, ‘कर्म युद्ध’ और ‘बेपनाह’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया। इसके बाद उन्होंने टेलीविजन जगत की ओर रुख किया और ‘क्रिएटिव आई’ नाम से प्रोडक्शन हाउस की स्थापना की। इस बैनर के तहत उन्होंने ‘ओम नमः शिवाय’, ‘श्री गणेश’, ‘मिली’, ‘घर की लक्ष्मी बेटियां’, ‘मन में है विश्वास’, ‘ये प्यार न होगा कम’, ‘तुझ संग प्रीत लगाई सजना’, ‘नादानियां’ और ‘इश्क सुबहान अल्लाह’ जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों का निर्माण और निर्देशन किया। एक युग का अंत धीरज कुमार की सादगी, ईमानदारी और समर्पण ने उन्हें न केवल एक सफल कलाकार बल्कि एक आदर्श इंसान के रूप में स्थापित किया। उनका जाना न केवल मनोरंजन जगत के लिए बल्कि उन सभी लोगों के लिए एक बड़ी क्षति है जिन्होंने उन्हें जाना और सराहा। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation सर्पमित्र ने पकड़ा सांप, स्कूल से फोन आया तो सांप गले में डालकर चला गया, वापसी में डसा, मौत प्रधानमंत्री 18 जुलाई को बिहार और पश्चिम बंगाल का दौरा करेंगे, 7,200 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन