24 News Update Udaipur. श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, हिरण मगरी सेक्टर 4 उदयपुर स्थित नागेंद्रा भवन में वर्षा योग करने के उपरांत वात्सल्य निधी आचार्य कल्प पुण्य सागर ससंघ (21 पिच्छी) का वर्षा योग कलश निष्ठापन एवं पिच्छीका परिवर्तन समारोह 25 जनवरी, रविवार को दोपहर 12.15 बजे से नागेंद्रा भवन में संपन्न होगा।
अध्यक्ष झमक लाल अखावत एवं महामंत्री सुंदर लाल लुणदिया ने बताया कि वर्षा योग पर स्थापित सभी कलश पुण्यार्जक परिवारों को आचार्य श्री के हाथों प्रदान किये जायेंगे। मूल नायक पार्श्वनाथ भगवान के नाम से स्थापित पार्श्वनाथ कलश का भाग्यशाली भक्त लक्की ड्रॉ के माध्यम से चुना जायेगा। ये कलश आचार्य संघ की तपस्या, मंत्रोच्चारण द्वारा पावन एवं पवित्र हो गए है जिन्हें श्रावक अपने घर के पवित्र स्थान पर आचार्य श्री के आशीर्वाद के माध्यम से बिराजित करेंगे।
वर्षा योग कमेटी के मुख्य संयोजक निर्मल कुमार मालवी ने बताया कि वात्सल्य निधि आचार्य कल्प पुण्य सागर जी महाराज ससंघ का उदयपुर के उपनगर हिरण मगरी सेक्टर 4 में वर्षा योग हेतु मंगल प्रवेश दिनांक 29 जून, 2025 को हुआ था। वर्षा योग के दौरान सकल दिगंबर जैन समाज हिरण मगरी सेक्टर 3,4,5 एवं आचार्य कल्प पुण्य सागर जी वर्षा योग कमेटी के तत्वावधान में दो बड़े राष्ट्रीय स्तर के धार्मिक कार्यक्रम यहाँ संपन्न हुए जिसमें 5 ओक्तूबर, 2025 को 3 जैनेश्वरी मुनि दीक्षा कार्यक्रम एवं 12 ओक्तूबर को संघस्थ 3 तपस्वी साधु वृन्दों का महा पारणा महोत्सव सानंद संपन्न हुए। इसके अलावा दो क्षुल्लिका दीक्षा, एक आर्यिका दीक्षा लेकर आर्यिका धन्यमति नाम पाकर संलेखना पूर्वक समाधि मरण किया। दिनांक 29 सितंबर को आचार्य कल्प पुण्य सागर जी महाराज का जन्मोत्सव मनाया गया। 20 वी सदी के प्रथम आचार्य चारित्र चक्रवर्ती श्री शांति सागर जी महाराज की 70 वी पुण्य तिथि भाद्र पद शुक्ला दूज दिनांक 25 अगस्त 2025 को दो दिवसीय गुरु उपकार दिवस पर बग्गी मे गुरु के रत्नमयी चरणों को बिराजित कर शोभा यात्रा निकली।
आचार्य कल्प पुण्य सागर जी महाराज ने कुछ श्रावक, श्राविकाओं को भी जीवन के अंतिम क्षणों मे सब कुछ यानी जल का भी त्याग करवा कर समाधि मरण करवा कर आगे के भव सुधार कर उनका मनुष्य जन्म और उसमें भी जैन कुल मे जन्म लेना सार्थक किया।
प्रचार प्रसार प्रभारी मुकेश पांड्या ने बताया कि आचार्य कल्प पुण्य सागर जी महाराज के संघ में मुनि महोत्सव सागर, उदित सागर, मुदित सागर, उत्सव सागर, उपहार सागर, उपदेश सागर, उज्जवल सागर, उपशम सागर एवं आर्यिका सौरभ मति, प्रमोद मति, हर्षित मति, पर्व मति, उत्साह मति, निर्णय मति, नियम मति,निश्चय मति, उपासना मति, उपशम मति, एवं क्षुल्लिका स्वर्ण मति एवं प्रफुल्ल मति माताजी एवं ब्रह्मचारी विकास भैया, ब्रह्म चारिणी वीणा दीदी “बिगुल”, मुन्नी देवी एवं सरोज देवी शामिल हैं।

