उदयपुर, 23 सितंबर। नगर निगम उदयपुर के नए महापौर पारस सिंघवी ने बुधवार को विधिवत पदभार संभालते ही अपने कार्यकाल की प्राथमिकताओं का खाका सामने रख दिया। महापौर की कुर्सी संभालने के बाद सिंघवी ने कहा कि उदयपुर को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाना उनका एकमात्र लक्ष्य है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर को शून्य से शिखर तक का सफर बताते हुए कहा कि शहर, कार्यकर्ताओं और संगठन ने उन्हें बहुत कुछ दिया है और अब उनके पास उदयपुर की सेवा करने का अवसर है। सिंघवी ने कहा कि वह अपनी अंतिम सांस तक उदयपुर के विकास की बात करते रहेंगे और शहर के लिए काम करते रहेंगे।महापौर के पदभार ग्रहण समारोह में शहर भाजपा अध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़, उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन, ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, राजसमंद विधायक दीप्ति माहेश्वरी, महाराष्ट्र के पूर्व सांसद मनोज कोटक और संजीव नाईक, पूर्व महापौर रजनी डांगी, चंद्रसिंह कोठारी और गोविंद सिंह टांक, पूर्व उपमहापौर लोकेश द्विवेदी, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष मांगीलाल जोशी, पूर्व सभापति युधिष्ठिर कुमावत, भाजपा महामंत्री देवीलाल सालवी, पंकज बोराणा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने उपरणा ओढ़ाकर और पुष्पगु च्छ भेंट कर सिंघवी का स्वागत किया। आयुक्त ने शहर के विकास के लिए निगम की टीम के रूप में मिलकर काम करने की बात कही। पदभार ग्रहण करने के बाद सिंघवी ने जिस अंदाज में अपनी प्राथमिकताएं गिनाईं, उससे साफ है कि उनके सामने केवल बड़े विकास प्रोजेक्ट खड़े करना ही लक्ष्य नहीं है। उन्होंने सड़क, नाली, सफाई, रोशनी, पार्क, यातायात और रोजमर्रा की नागरिक सुविधाओं को विकास की पहली पंक्ति में रखा। सिंघवी ने कहा कि बड़े प्रोजेक्ट अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन आम आदमी के जीवन को प्रभावित करने वाले छोटे-छोटे काम भी उतने ही जरूरी हैं। उनका कहना था कि किसी व्यवस्था में सुधार की शुरुआत अपनी कमियों को स्वीकार करने से होती है और जहां गलती हुई है, उसे स्वीकार कर सुधार करना ही सफलता की कुंजी है। निगम की कार्यप्रणाली में भी इसी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की बात उन्होंने कही। सिंघवी ने उदयपुर के विकास को केवल सड़कों और भवनों तक सीमित करने के बजाय शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उदयपुर की पहचान उसकी झीलों, स्मारकों, हवेलियों, पुरानी बस्तियों, बाजारों, प्राकृतिक सौंदर्य और मेवाड़ की सांस्कृतिक विरासत से है। ऐसे में विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी। स्मार्ट सिटी के दौरान हुए कामों की समीक्षा कर जहां सुधार की जरूरत है, वहां प्राथमिकता के आधार पर काम करने की बात भी उन्होंने कही।महापौर ने कहा कि उदयपुर की पहचान भगवान एकलिंगनाथ और वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की गौरवशाली परंपरा से भी जुड़ी है। इसलिए शहर को केवल आधुनिक सुविधाओं से लैस करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसकी सांस्कृतिक पहचान को भी विश्व स्तर पर स्थापित करने की दिशा में काम करना होगा। झीलों का संरक्षण, हरित क्षेत्र बढ़ाना और प्राकृतिक सौंदर्य को बनाए रखते हुए विकास करना उनके सामने महत्वपूर्ण मुद्दे रहेंगे। पांच बार पार्षद रहने का अनुभव अब महापौर की परीक्षा मेंसिंघवी ने अपने राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि वे पांच बार पार्षद रह चुके हैं और निगम की अलग-अलग समितियों के अध्यक्ष सहित गैराज, स्वास्थ्य, निर्माण और उपमहापौर जैसी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। उनका कहना था कि विभिन्न विभागों और समितियों में काम करने के दौरान उन्हें निगम की व्यवस्थाओं और उनकी चुनौतियों को नजदीक से समझने का अवसर मिला। अब इसी अनुभव का उपयोग व्यापक स्तर पर शहर के विकास के लिए किया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि यह केवल महापौर का कार्यकाल नहीं होगा। समिति अध्यक्षों, पार्षदों, अधिकारियों और निगम की पूरी टीम की सामूहिक भूमिका रहेगी। वरिष्ठ पार्षदों के अनुभव और युवा टीम की ऊर्जा को साथ लेकर काम करने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि सामूहिकता के जरिए निगम के कामकाज में नई दिशा देने का प्रयास किया जाएगा। नए शामिल इलाकों पर भी नजरनगर निगम के परिसीमन के बाद शहर के आसपास के कई नए क्षेत्र निगम सीमा में शामिल हुए हैं। सिंघवी ने इन इलाकों को अपने कार्यकाल की महत्वपूर्ण प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि नए शामिल क्षेत्रों में पेयजल, सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और दूसरी मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है। इन क्षेत्रों को वे छोटे भाई की तरह मानकर विकसित करने का प्रयास करेंगे। उनके मुताबिक शहर और नए शामिल क्षेत्रों के बीच सुविधाओं का अंतर कम करना जरूरी है। विकास की योजनाएं बनाते समय निगम क्षेत्र के किसी एक हिस्से को केंद्र में रखने के बजाय पूरे निगम क्षेत्र को एक इकाई मानकर संतुलित विकास की दिशा में काम किया जाएगा। ऐसे में नए क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना नए बोर्ड के लिए शुरुआती स्तर पर ही बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी। सड़क और नालों की समस्या पर विशेष फोकसउदयपुर की सड़कों और बड़े नालों की स्थिति को लेकर भी सिंघवी ने स्पष्ट संकेत दिए। उन्होंने कहा कि जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करना, नालों की नियमित सफाई, सड़कों की मरम्मत और नागरिक सुविधाओं में सुधार प्राथमिकता में रहेगा। बरसात के दौरान सामने आने वाली समस्याओं को केवल तत्काल राहत के रूप में नहीं, बल्कि स्थायी समाधान के नजरिए से देखने की जरूरत बताई।इसी के साथ ठेला और रेहड़ी व्यवसाय को लेकर भी महापौर ने संतुलित नीति की बात कही। उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारियों की आजीविका महत्वपूर्ण है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों, यातायात और स्वच्छता की व्यवस्था भी बनाए रखना जरूरी है। ऐसी व्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जाएगा जिसमें रोजगार भी बना रहे और शहर की व्यवस्था भी प्रभावित न हो। पर्यटन को सालभर की अर्थव्यवस्था से जोड़ने की तैयारीउदयपुर की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की भूमिका को देखते हुए सिंघवी ने इसे भी निगम की प्राथमिकताओं से जोड़ने की बात कही। उन्होंने कहा कि अब उदयपुर में वर्षभर देश-विदेश से पर्यटक आ रहे हैं। होटल और ट्रेवल्स व्यवसाय से जुड़े अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यटन की संभावनाओं को बेहतर नागरिक सुविधाओं के जरिए और मजबूत किया जा सकता है।पर्यटकों के लिए स्वच्छता, सड़क, पार्किंग, सार्वजनिक सुविधाएं, ऐतिहासिक स्थलों के आसपास की व्यवस्था और शहर की सुंदरता महत्वपूर्ण हैं। इसलिए पर्यटन को केवल होटल और पर्यटन स्थलों तक सीमित न रखकर पूरे शहर की व्यवस्थाओं से जोड़ने की दिशा में काम करने का संकेत उन्होंने दिया। ‘ट्रिपल इंजन’ के जरिए योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर महापौर ने राज्य और केंद्र में समान विचारधारा की सरकार तथा नगर निगम में भाजपा बोर्ड को विकास के बेहतर समन्वय का अवसर बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ निगम क्षेत्र के प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। गरीब और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने तथा शहरी रोजगार और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने को भी उन्होंने निगम की जिम्मेदारी बताया। बच्चों और हरित क्षेत्रों के लिए भी योजना सिंघवी ने उदयपुर में बड़े सार्वजनिक पार्कों की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि गुलाबबाग के अलावा शहर में बड़े और व्यवस्थित हरित क्षेत्रों की आवश्यकता है। उपलब्ध भूमि और संभावित स्थानों का अध्ययन कर नए पार्क और मनोरंजन स्थलों के विकास की कार्ययोजना बनाने का प्रयास किया जाएगा। बच्चों के लिए सुरक्षित खेल क्षेत्र और मनोरंजन की सुविधाओं को भी शहर की योजना में शामिल करने की बात उन्होंने कही। ‘भाजपा मेरी मां, संघ मेरे रक्त में’ अपने राजनीतिक सफर और संगठन से रिश्ते को लेकर सिंघवी ने कहा कि भाजपा उनके लिए केवल राजनीतिक दल नहीं, बल्कि परिवार की तरह है। उन्होंने कहा, “भाजपा मेरी मां है और संघ मेरे रक्त में है।” सिंघवी ने कहा कि संगठन ने उन्हें लंबे समय तक काम करने का अवसर दिया और आज मिली जिम्मेदारी के पीछे कार्यकर्ताओं और संगठन का योगदान है। उन्होंने कहा कि अब उनके जीवन का लक्ष्य उदयपुर की सेवा और विकास है। सिंघवी ने कहा कि शहर ने उन्हें जीवन में बहुत कुछ दिया है और अब वह खुद को शहर का कर्जदार मानते हैं। उनके शब्दों में, अब इस कर्ज को सेवा के जरिए चुकाने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि महापौर का पद उनके लिए केवल पद नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी है और आने वाले समय में शहरवासियों की अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही सबसे बड़ी कसौटी होगी। महापौर ने कहा कि अतीत में कई जिम्मेदारियां मिलीं, कुछ अवसर आए और कुछ अवसर छूटे भी, लेकिन हर अनुभव ने आगे बढ़ने की सीख दी। अब पीछे देखने के बजाय भविष्य की ओर देखने और उदयपुर के विकास को नई दिशा देने का समय है। उन्होंने कहा कि उनकी व्यक्तिगत पहचान से ज्यादा महत्वपूर्ण यह होगा कि उनके कार्यकाल के बाद शहर में हुए कामों के जरिए उनकी पहचान बने। नए बोर्ड के सामने अब महापौर द्वारा गिनाई गई इन प्राथमिकताओं को जमीन पर उतारने की चुनौती है। उदयपुर जैसे पर्यटन और विरासत शहर में एक तरफ सड़क, सफाई, नाली, यातायात और पार्किंग जैसी रोजमर्रा की समस्याएं हैं तो दूसरी तरफ झीलों, विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य को बचाते हुए आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की चुनौती। नए शामिल क्षेत्रों को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ना और पूरे निगम क्षेत्र में संतुलित विकास करना भी आसान काम नहीं होगा। ऐसे में सिंघवी के सामने महापौर की कुर्सी केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि लंबे समय से अपने निर्वाचित प्रतिनिधि का इंतजार कर रहे शहर की अपेक्षाओं को पूरा करने की परीक्षा भी है। उन्होंने पदभार संभालते हुए जिस ‘शून्य से शिखर’ तक के सफर और ‘अंतिम सांस तक सेवा’ के संकल्प की बात कही है, अब उसकी असली कसौटी निगम की बैठकों में नहीं, बल्कि उदयपुर की गलियों, सड़कों, नालों, झीलों, बाजारों और नए शामिल क्षेत्रों में दिखाई देगी। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. 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