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विद्यापीठ – ’तेल आधारित सौंदर्य उत्पाद पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण का हुआ समापन,जीडीपी में महिलाओं की बढ़ी भागीदारी – प्रो. सारंगदेवोत

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24 News Update उदयपुर. राजस्थान विद्यापीठ के संघटक एग्रीेल्चर महाविद्यालय के कृषि भवन के सभागार में महिलाओं के लिए आयोजित पाँच दिवसीय “तेल आधारित सौंदर्य एवं त्वचा देखभाल उत्पाद निर्माण” उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ।

प्रारंभ में नोडल अधिकारी एवं कृषि सलाहकार प्रो. इन्द्रजीत माथुर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आईआईओआर – आईसीएआर के अनुसूचित जाति उपयोजना परियोजना के अंतर्गत प्रायोजित है। पाँच दिनों में प्रशिक्षार्थियों को सरसों, कुसुम, सूरजमुखी और अलसी के तेल पर आधारित विभिन्न उत्पादोंकृफेस सीरम, हेयर मास्क, डी-टैन पैक, गुलाब जल सीरम, हेयर ऑयल, ड्राई फेस पैक, स्किन एक्सफोलिएटर स्क्रब आदिकृके निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने निर्माण प्रक्रिया के साथ गुणवत्ता, पैकेजिंग और विपणन के पहलुओं पर भी विस्तार से मार्गदर्शन प्रदान किया।

मुख्य अतिथि कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक होती है जब वह जीवन और आजीविका से जुड़ती है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों की महिलाएं यदि कृषि आधारित संसाधनों से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करें, तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकती हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित कर सकती हैं। उन्होंने प्रशिक्षार्थियों से आग्रह किया कि वे प्रशिक्षण में सीखे गए कौशल को व्यवहार में उतारें और आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम बढ़ाएं।

अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. शिव सिंह सारंगदेवोत ने कहा कि भारत के स्टार्ट-अप पारितंत्र में महिलाओं की भूमिका निरंतर बढ़ रही है। देश में 50 प्रतिशत जनसंख्याॅ महिलाओं की है लेकिन उन्हें पुरूष की तुलना में उन्हें हर क्षेत्र में कम अवसर प्रदान किये जाते है। हमारी जीडीपी में महिलाओं का योगदान 18 से 25 प्रतिशत ही है। 2017-18 में श्रम रोजगार में 23 प्रतिशत था जो 2023-24 में बढकर यह 41.07 हो गया है। आज हर महिला आत्म निर्भर बनना चाहती है लेकिन जरूरत है उन्हें अवसर देने की। देश की महिलाएॅ शिक्षित हो रही है। सौंदर्य उद्योग उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें नवाचार और गुणवत्ता के लिए अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रशिक्षण महिलाओं को उद्यमिता की ओर प्रेरित करेगा और विश्वविद्यालय समाज के विभिन्न वर्गोंकृविशेषकर युवाओं, बालिकाओं और वंचित समूहोंकृको तकनीकी ज्ञान देकर सशक्त बनाने के अपने संकल्प पर निरंतर अग्रसर रहेगा।

अधिष्ठाता प्रो. गजेन्द्र कुमार माथुर ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम क्षेत्र की महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलते हैं। समारोह के दौरान प्रशिक्षार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए और प्रशिक्षण को जीवन बदलने वाला अवसर बताया।

अंत में सभी प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा उपरणा एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। संचालन देवेन्द्र ंगुर्जर ने किया जबकि आभार प्रो. एन. एस. सोलंकी ने जताया।

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