उदयपुर। शहर में ऑटो पर पहचान संबंधी स्टीकर लगाने की पहल ने यात्रियों, खासकर महिलाओं और पर्यटकों को राहत दी है। वाहन संख्या, चालक का नाम, मोबाइल नंबर और हेल्पलाइन जैसी जानकारी ऑटो पर स्पष्ट दिखाई देने लगी है। इस अभियान की शुरुआत 4 अक्टूबर 2025 को देहलीगेट स्थित यातायात कार्यालय के सामने शहर विधायक ताराचंद जैन, ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, जिला कलेक्टर, एसपी सहित पुलिस एवं ऑटो यूनियन पदाधिकारियों की मौजूदगी में हुई।
यातायात पुलिस ने अब तक 2710 ऑटो पर स्टीकर लगवा दिए हैं। सत्यापन के बाद इन वाहनों को दस्तावेज हर समय साथ रखने से भी छूट मिली है। पुलिस का दावा है कि इससे पर्यटकों का खोया सामान मिलने में आसानी हुई है और महिलाओं व गृहिणियों में भी भरोसा बढ़ा है।
स्टीकर से मिली सुविधा, पर मनमाना किराया अब भी सबसे बड़ी परेशानी
शहरवासियों और दैनिक यात्रियों का कहना है कि स्टीकर पहल स्वागतयोग्य है, लेकिन इससे ऑटो की मनमानी किराया वसूली पर कोई असर नहीं पड़ा। कई रूटों पर आज भी किराया बिना किसी नियम के तय किया जा रहा है।
यात्रियों के अनुसार—
“स्टीकर लगाने से पहचान तो आसान हुई, पर असली समस्या वही की वही है। हर रूट का किराया तय होना चाहिए, तभी लूट रुकेगी।”
कई स्थानीय संगठनों ने भी प्रशासन से मांग की है कि—
- शहर के सभी प्रमुख रूटों के लिए मानक किराया सूची जारी की जाए
- किराया बोर्ड हर ऑटो में लगाना अनिवार्य किया जाए
- तय किराए से अधिक वसूली पर त्वरित कार्रवाई की जाए
- ऑटो यूनियनों के साथ संयुक्त बैठक कर समान किराया प्रणाली लागू की जाए
पर्यटकों की भी यही मांग — “किराया तय नहीं, इसलिए असमंजस रहता है”
उदयपुर आने वाले देशी–विदेशी पर्यटक बताते हैं कि स्टीकर से जानकारी मिलना आसान हुआ है, लेकिन खराब अनुभव तब होता है जब अलग–अलग ऑटो एक ही दूरी पर अलग–अलग किराया मांगते हैं। कई पर्यटकों का कहना है कि तय किराया व्यवस्था लागू होने से शहर की सकारात्मक छवि और मजबूत होगी।
दिसंबर तक स्टीकर अनिवार्य, नहीं तो होगी सख्त कार्रवाई
यातायात पुलिस ने चेतावनी दी है कि—
- दिसंबर 2025 के अंत तक हर ऑटो पर स्टीकर लगाना अनिवार्य
- ऐसा नहीं करने वालों पर परमिट शर्तों का उल्लंघन मानते हुए मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी
समाधान की दिशा में आगे बढ़े प्रशासन
शहर के लोग अब प्रशासन से उम्मीद कर रहे हैं कि स्टीकर व्यवस्था के साथ–साथ किराया निर्धारण प्रणाली भी लागू की जाए, ताकि—
- ऑटो संचालन में पारदर्शिता बढ़े
- यात्रियों की शिकायतें घटें
- पर्यटन पर सकारात्मक असर पड़े
- ऑटो चालकों और यात्रियों के बीच विवाद कम हों
स्टीकर व्यवस्था ने सुरक्षा और पहचान बढ़ाई है, लेकिन शहरवासी अब इंतजार में हैं उस बड़े कदम के—हर रूट का तय किराया, जो मनमानी वसूली पर पूरी तरह रोक लगा सके।

