उदयपुर। नगर निगम की ओर से प्लास्टिक को जब्त करने की कार्रवाई के दौरान अब सवाल उठ रहे हैं कि उन फेक्ट्रियों को बंद क्यों नहीं करवाया जा रहा है जहां से ये जहरीली थैलियां बनकर आ रही है। किसने हाथ बांधे हैं आईएएस अफसरों के। उदयपुर में तो पूरा अमला बैठा है, एक से एक होनहार धुरंधर है। मगर उसके बाद भी एक भी गिरफ्तारी आखिर क्योें नहीं हुई गुजरात से प्लास्टिक भेजने वालों पर, थोक में बेचने वालों पर। क्या पता नहीं चला या फिर जानना ही नहीं चाहते हैं। अब निगम ने हैल्पलाइन नंबर जारी कर दिया है ताकि लोग एक दूसरे की शिकायतें करते हुए निगम को आसान लक्ष्य दें जिससे निगम कार्रवाई करके वाहवाही लूट सके। जबकि एक ही सख्त प्रहार करना है तो उन फेक्ट्रियों पर करना होगा जहां से ये बनकर मार्केट में आ रहा है। जड़ों पर प्रहार करना मुश्किल भी नहीं है। जिसको पकड़ा, उससे पूछा कहां से लाया, जिसका नाम बताए उससे पूछो कहां से लाया, ऐसा करते करते बहुत ही आसानी से वो नाम सामने आ सकते हैं जो जहरीला प्लास्टिक बेच कर खुद मजे कर रहे हैं और हमारे उदयपुर की जिंदगी में जहर घोल रहे हैं। आज निगम की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि हेल्पलाइन पर मिली शिकायत पर निगम ने की कार्यवाही की है। निगम की ओर से हेल्पलाइन नंबर 0294-2426262 जारी किया गया है। निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना के निर्देश पर कार्रवाई कर 80 किलो प्रतिबंधित प्लास्टिक को जब्त किया गया बताया है। इस पर पर्यावरण प्रेमी ने निगम में प्रतिबंधित प्लास्टिक होने की जानकारी दी। जानकारी के सत्यापन पर निगम पुलिस निरीक्षक मांगीलाल डांगी को धानमण्डी लखारा चौक में शेखर कुमार आनन्दी लाल अग्रवाल नामक प्रतिष्ठान पर मय टीम भेजा गया। दुकान की नियमानुसार की तलाशी ली गई। दुकान में काउन्टर व लोहे की रेक में अलग अलग रंग की सिंगल युज प्लास्टिक कैरी बैग रखी हुई थी। दुकान में रखी प्लास्टिक कैरी बैग को 3 प्लास्टिक कट्टो में भरा गया। जिसका वजन 80 किलो 700 ग्राम हुआ। प्रतिबन्धित प्लास्टिक कैरी बैग जब्त किये गये। विज्ञप्ति में यह नहीं बताया गया है कि व्यापारी ये कहां से लेकर आया था? याने कड़ियां मत जोड़ो बस वाहवाही लूटते रहो ताकि भ्रम बना रहे और बाहर की पावरफुल लॉबी भी अपना काम निर्बाध करती रही। सवाल हमारा साफ है, अगर स्थानीय स्तर पर बन रहा है तो एक कार्रवाई बताओ जहां पर प्रतिबंधित प्लास्टिक की फेक्ट्री पकड़ी हो, एक कुबूलनामा बताओ जिसमें व्यापारी खुद कह रहा हो कि मैंने यह उदयपुर में बनाई। याने कहीं और से माल आ रहा है। वो माल कहां से आ रहा है यह सबको पता है। सब जानते हुए भी अनजान बनना और कार्रवाई नहीं करना प्रशासन को खूब रास आता है। नेता भी चुप हैं गुजरात का नाम आते ही, और जन प्रतिनिधियों की तो बात ही क्या करें, उनको तो तब तक उस मुद्दे का पता ही नहीं चलता, जब तक बताया नहीं जा सकता। पूछने पर बहुत भोले बनकर कहते हैं, कि अच्छा ऐसा हो रहा है क्या, मामला दिखवाते हैं। याने जनता के जीवन में जहर तब तक चोरी छिपे घुलता ही रहेगा जब तक कि प्लास्टिक राक्षसों पर कार्रवाई नहीं होगी। उसके लिए प्रशासन में हिम्मत कब आएगी, यह देखने वाली बात होगी। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation शोध, शिक्षा और सादगी की मिसाल रहे डॉ. मधुसूदन शर्मा, मात्स्यकी महाविद्यालय में श्रद्धांजलि सभा, शिक्षाविदों ने साझा की स्मृतियाँ होमस्टे इकाइयों के संचालन में बड़ा बदलाव, अब 8 कमरे और 24 बिस्तरों तक की अनुमति