-सांसद डॉ मन्नालाल रावत के प्रश्न पर जनजातीय कार्य राज्य मंत्री ने दी जानकारी-जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान और कौशल को कामर्शियल बनाती है यह योजना24 News Update उदयपुर। राजस्थान में 505 वन धन विकास केंद्र कार्यरत हैं जिनसे 1 लाख 52 हजार 362 लोग लाभ ले रहे हैं। ट्राइफेड के पास 08 श्रेणियों (कपड़ा, मिट्टी के बर्तन, पेंटिंग, उपहार और वर्गीकृत वस्तुएं, बेत और बांस, धातु, आभूषण और प्राकृतिक उत्पाद) में 1 लाख से अधिक उत्पादों की माल-सूची है। राजस्थान में 51774 परिवारों से जुड़े 283 जनजातीय कारीगर या आपूर्तिकर्ताओं को ट्राइफेड के साथ सूचीबद्ध किया गया है।सांसद डॉ मन्नालाल रावत द्वारा संसद में पूछे गए प्रश्न पर जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उड़के ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत में वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके), प्रधानमंत्री वन धन योजना (पीएमवीडीवाय) के अंतर्गत स्थापित केंद्र हैं, जिनका उद्देश्य जनजातीय समुदायों (आदिवासियों) के पारंपरिक ज्ञान और कौशल को एक आर्थिक गतिविधि में बदलना है। ट्राइफेड और जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा संचालित ये केंद्र वनों से प्राप्त लघु वनोपज के मूल्यवर्धन प्रोसेसिंग और विपणन में मदद करते हैं। यह पहल मुख्य रूप से आदिवासी महिलाओं के सशक्तिकरण और उनकी आय में वृद्धि पर केंद्रित है।भारत सरकार ने जनजातीय समुदाय के लोगों को लाभान्वित करने के लिये वन धन विकास योजना की शुरुआत की। इस योजना को प्रधानमंत्री द्वारा 14 अप्रैल 2018 को संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के जन्मदिवस के मौके पर शुरु किया गया था। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय ने देश के जनजातीय ज़िलों में वन धन विकास केन्द्रों का विस्तार करने के कार्य पर ध्यान केंद्रित किया है।वन धन मिशन गैर-लकड़ी के वन उत्पादन का उपयोग करके जनजातियों के लिए आजीविका के साधन उत्पन्न करने की पहल है। जंगलों से प्राप्त होने वाली संपदा, जो कि वन धन है, का कुल मूल्य दो लाख करोड़ प्रतिवर्ष है। इस पहल से जनजातीय समुदाय के सामूहिक सशक्तिकरण को प्रोत्साहन मिलता है।केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड (ट्राइफेड), बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 1984 (2002 और 2023 में संशोधित) के तहत पंजीकृत एक राष्ट्रीय स्तर की बहुराज्य सहकारी समिति है। ट्राइफेड अपने उप-नियमों के अनुसार शासित होता है जो एमएससीएस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार बनाए गए हैं।पीएमजेवीएम योजना के तहत, मंत्रालय लघु वन उपज (एमएफपी) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को अधिसूचित करता है और अधिसूचित एमएसपी पर एमएफपी की खरीद के लिए राज्य सरकारों को रिवॉल्विंग फंड प्रदान करता है। अब तक मंत्रालय ने एमएफपी खरीद के लिए राज्य सरकारों को 319.65 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation रीसेंट ट्रेंड्स इन आईओटी एवं आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित कड़ी चौकसी के बीच रक्षा के बीच शुरू हुई बोर्ड परीक्षाएं