उदयपुर, 28 मार्च। श्रमण भगवान महावीर स्वामी के 2625वें जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर शनिवार रात उदयपुर भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। “जय-जय-जय महावीर तुम्हारी, मां त्रिशला के नन्दन अवतारी…” जैसे भजनों की गूंज के बीच सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं देर रात तक भक्ति रस में डूबकर झूमते रहे।
महावीर जैन परिषद के तत्वावधान में आयोजित “एक शाम महावीर स्वामी के नाम” विराट भक्ति संध्या 100 फीट रोड स्थित शुभ केसर गार्डन में भव्य रूप से संपन्न हुई। कार्यक्रम में बैंगलोर के प्रख्यात भजन गायक विपिन पोरवाल ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि पूरा परिसर “महावीर स्वामी” के जयकारों से गूंज उठा।
भजनों पर थिरका जनसमूह, “हम जैन हैं…” पर गूंजी तालियां
“न ओसवाल मुझे कहना, न पोरवाल कहना, हम जैन हैं…”, “वीर जी महावीर जी…”, “कुण्डलपुर वाले…”, “कोयलिया गीत गाए…” जैसे भजनों पर दर्शक खुद को थिरकने से नहीं रोक सके। हर प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट और “वंस मोर” के नारों ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया।
महोत्सव बना सामाजिक एकता का मंच
मुख्य संयोजक राजकुमार फत्तावत ने बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक एकता का संदेश देने वाला महोत्सव है। कार्यक्रम में एसआरजी हाउसिंग फाइनेंस परिवार सहित विभिन्न अतिथियों का मेवाड़ी परंपरा अनुसार पगड़ी व उपरणा ओढ़ाकर सम्मान किया गया।
भारतीय जैन संघटना के अध्यक्ष दीपक सिंघवी और जैन जागृति सेंटर के अध्यक्ष अरुण मेहता ने बताया कि इस भक्ति संध्या ने महावीर के सिद्धांतों—अहिंसा, सत्य और संयम—को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया।
गरिमामयी उपस्थिति और भव्य स्वागत
कार्यक्रम में सुरेश गुंदेचा, ताराचंद जैन, सीए महावीर चपलोत सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। भजन गायक विपिन पोरवाल एवं उनकी टीम का पारंपरिक मेवाड़ी अंदाज में स्वागत किया गया। संचालन दीपक सिंघवी ने किया, जबकि स्वागत उद्बोधन अरुण मेहता ने दिया।
आज स्वर्ण जयंती समारोह व संगोष्ठी
महोत्सव की श्रृंखला में रविवार को महावीर जैन परिषद का स्वर्ण जयंती समारोह सोलिटियर गार्डन सभागार में आयोजित होगा, जिसमें पूर्व संयोजकों को मरणोपरांत सम्मानित किया जाएगा। साथ ही “आदर्श समाज की परिकल्पना” विषय पर संगोष्ठी में ख्यात मोटिवेटर डॉ. राजेन्द्र लूंकड़ मार्गदर्शन देंगे।
महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव के इस आयोजन ने न केवल भक्ति की अलख जगाई, बल्कि समाज को एक सूत्र में पिरोने का संदेश भी दिया—जहां हर स्वर में महावीर और हर दिल में अहिंसा की गूंज सुनाई दी।

