रिपोर्ट—जयवंत भैरविया24 News Update उदयपुर। उदयपुर विकास प्राधिकरण (UDA) में सूचना का अधिकार कानून को लेकर गंभीर लापरवाही और मनमानी सामने आई है। UDA के सहायक नगर नियोजक (ATP) सर्वेश्वर व्यास पर RTI अधिनियम की अवहेलना करते हुए मांगी गई सूचनाएं देने से इनकार करने के आरोप लगे हैं। हैरानी की बात यह है कि सूचना देने से इनकार करते हुए यह तर्क दिया गया कि मांगी गई जानकारी “बहु-आयामी एवं बहु-उद्देशीय” है और इसलिए “सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत नहीं आती।”RTI के तहत शिल्पग्राम के पास स्थित शौर्यगढ़ (अब Wyndham Grand) तथा बड़ी रोड स्थित मैरियट होटल के स्वीकृत नक्शों की सत्यापित प्रतियां मांगी गई थीं। इसके अलावा ATP सर्वेश्वर व्यास की UDA में नियुक्ति से संबंधित सत्यापित सूचना भी चाही गई थी। आवेदन में केवल दो होटलों के स्वीकृत नक्शे और एक अधिकारी की नियुक्ति से जुड़ा रिकॉर्ड मांगा गया था, इसके बावजूद इसे “बहु-आयामी” बताकर सूचना देने से इनकार कर दिया गया। याने अफसरों का इन दो होटलों से बहुत याराना लगता है। दाल में काला है या पूरी दाल ही काली है यह जांच का विषय है। जिला कलेक्टर को संज्ञान लेकर मामले की जांच करवानी चाहिए कि सूचना देने से क्यों मना कर रहे हैं। ऐसी पर्देदारी से कई सवाल उठ रहे हैं जो पूरे यूडीए पर ही संदेह और सवाल पैदा कर रहे हैं।कार्रवाई कर रहे हैं मगर सूचनाएं नहीं देंगेUDA द्वारा समय-समय पर शहर में होटलों और रिसॉर्ट्स को बिना अनुमति या नो-कंस्ट्रक्शन ज़ोन में बने होने के आधार पर सीज किया जाता रहा है। ऐसे मामलों में UDA सार्वजनिक रूप से कार्रवाई की जानकारी देता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं करता कि किसी निर्माण को वैध या अवैध घोषित करने का आधार क्या है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या ऐसे होटल और रिसॉर्ट अचानक अस्तित्व में आ गए या निर्माण के दौरान संबंधित अधिकारियों ने कभी निरीक्षण ही नहीं किया।स्वीकृति दी मगर सूचना मांगने पर कांप गएRTI आवेदक का कहना है कि जब UDA के पास अवैध निर्माण चिह्नित करने का अधिकार और आधार मौजूद है, तो उसी आधार से जुड़े स्वीकृत नक्शे और रिकॉर्ड सार्वजनिक करने में क्या आपत्ति है। यदि निर्माण के समय नियमों के अनुसार अनुमति दी गई थी, तो उसका दस्तावेज़ उपलब्ध कराया जाना चाहिए, और यदि नहीं दी गई थी, तो वह तथ्य भी रिकॉर्ड में होना चाहिए। एक और गंभीर पहलू यह है कि ATP द्वारा दिए गए जवाब में न तो पूरा नाम स्पष्ट रूप से अंकित किया गया और न ही पदनाम, जबकि राजस्थान सरकार के प्रशासनिक सुधार विभाग के 4 दिसंबर 2020 के आदेश के अनुसार किसी भी अधिकारी द्वारा राजकीय पत्राचार में हस्ताक्षर के नीचे पूरा नाम, पदनाम और दिनांक अंकित करना अनिवार्य है।RTI से जुड़ी इस तरह की सूचनाओं को लेकर राजस्थान सूचना आयोग और केंद्रीय सूचना आयोग के पूर्व निर्णय भी स्पष्ट हैं। आयोगों ने अपने फैसलों में कहा है कि सूचना उसी रूप में दी जानी चाहिए जिस रूप में मांगी गई हो, और फाइल या रिकॉर्ड ढूंढने की जिम्मेदारी लोक सूचना अधिकारी की होती है, न कि आवेदक की। इसके बावजूद UDA में इन आदेशों की अनदेखी की जा रही है। पूरे मामले ने UDA की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय पर सही सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई, तो मामला राज्य सूचना आयोग के समक्ष अपील में ले जाया जाएगा। सवाल साफ है—क्या UDA सूचना के अधिकार को स्वीकार करेगा या फिर कानून को कागज़ों तक ही सीमित रखेगा? Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation भील समाज क्रिकेट प्रतियोगिता का भव्य समापन, मेहरो का गुड़ा बना विजेता वृंदा करात के नेतृत्व में पीड़ित महिलाएं संभागीय आयुक्त से मिलीं, झाड़ोल में आदिवासियों पर अत्याचार का मामला गरमाया