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नशे की हालत में नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट छूने की कोशिश करना POCSO एक्ट के तहत रेप की कोशिश नहीं : कलकत्ता हाईकोर्ट

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24 न्यूज अपडेट, नेशनल डेस्क। कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले में फैसला सुनाया कि नशे की हालत में नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट छूने की कोशिश करना POCSO एक्ट के तहत रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता, बल्कि इसे गंभीर यौन उत्पीड़न (धारा 10, POCSO एक्ट) की श्रेणी में रखा जा सकता है। कोर्ट ने इस आधार पर आरोपी को जमानत दे दी। यह फैसला ट्रायल कोर्ट के उस निर्णय के खिलाफ अपील पर आया, जिसमें आरोपी को POCSO एक्ट की धारा 10 और IPC की धाराओं 448, 376(2)(c), 511 के तहत 12 साल की सजा और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी

मामले का विवरण:

सुप्रीम कोर्ट की हिदायत और इलाहाबाद हाईकोर्ट का मामला: यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब सुप्रीम कोर्ट ने 26 मार्च 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक समान मामले में दिए गए फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2025 को कहा था कि नाबालिग के ब्रेस्ट पकड़ना, पायजामे का नाड़ा तोड़ना, या उसे घसीटने की कोशिश रेप की कोशिश नहीं, बल्कि यौन उत्पीड़न है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे “असंवेदनशील” बताते हुए फैसले पर रोक लगा दी और कहा कि इस तरह के मामलों में संवेदनशीलता की जरूरत है।

निष्कर्ष: कलकत्ता हाईकोर्ट ने तकनीकी रूप से कानूनी परिभाषाओं (पेनिट्रेशन की अनुपस्थिति) के आधार पर फैसला दिया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की हालिया हिदायत को देखते हुए, यह फैसला विवादास्पद हो सकता है। ऐसे मामलों में पीड़ित की गरिमा और सामाजिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखना जरूरी है। अगर आपको इस मामले में और गहराई से जानकारी चाहिए, जैसे कि विशिष्ट कानूनी धाराओं की व्याख्या या सुप्रीम कोर्ट के फैसले का प्रभाव, तो बता सकते हैं।

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