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परमात्मा भक्ति से ही पुण्य की सच्ची कमाई होती है : जैनाचार्य रत्नसेन सूरीश्वर महाराज

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24 News Update उदयपुर। श्री शांतिनाथ जैन संघ, हिरण मगरी सेक्टर-3 में शुक्रवार को जैनाचार्य श्रीमद् विजय रत्नसेन सूरीश्वर महाराज आदि ठाणा 5 का जंबूद्वीप टावर से विहार कर मंगल प्रवेश हुआ। संघ के कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया ने बताया कि संघ द्वारा प्रथम बार पधारे आचार्य श्री का गाजे-बाजे व भव्य स्वागत किया गया। प्रातः 9:30 बजे महावीर भवन में धर्मसभा का आयोजन हुआ। प्रारंभ में पूज्य पंन्यास प्रवर निरागरत्न विजय महाराज ने प्रभु भक्ति में ही जीवन की सच्ची सफलता बताते हुए भावपूर्ण प्रवचन दिए। इसके बाद आचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वर महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि संसार में सुख और सौभाग्य पुण्य का ही परिणाम है। जब तक पुण्य का साथ है, तब तक लाखों शत्रुओं के बीच भी व्यक्ति सुरक्षित रहता है, और पुण्य क्षीण होते ही भारी सुरक्षा के बीच भी जीवन संकट में आ सकता है। इसलिए हर गृहस्थ को जीवन में अधिक से अधिक पुण्य अर्जित करने हेतु धर्म, दान, सेवा और परमात्म भक्ति जैसे पुण्य कार्य करने चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे खेत में बोया गया अन्न लाखों गुना फल देता है, वैसे ही पुण्य के कार्य में लगाया गया धन जन्मों तक सुखदायी और मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाला बनता है। भोग विलास में खर्च की गई लक्ष्मी क्षणभंगुर है, परंतु धर्मकार्य में किया गया व्यय चिरस्थायी पुण्यफल प्रदान करता है। इस अवसर पर श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर, कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया, श्रावक समिति अध्यक्ष आनंदीलाल बम्बोरिया, भूपाल सिंह दलाल, जीवन सिंह कंठालिया सहित कार्यकारिणी सदस्य व बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहीं। धर्मसभा के पश्चात सामूहिक आरती व मंगल पाठ भी संपन्न हुआ।

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