– मालदास स्ट्रीट आराधना भवन में चल रहे है निरंतर धार्मिक प्रवचन 24 News Update उदयपुर। मालदास स्ट्रीट स्थित आराधना भवन में जैनाचार्य श्रीमद् विजय रत्नसेन सूरीश्वर महाराज की निश्रा में बुधवार को विविध आयोजन हुए । श्रीसंघ के कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया ने बताया कि आराधना भवन में सुबह 7 बजे संतों के सानिध्य में आरती, मंगल दीपक, सुबह सर्व औषधी से महाअभिषेक एवं अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की गई।मालदास स्ट्रीट के नूतन आराधना भवन में जैनाचार्य श्रीमद् विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने प्रवचन देते हुए कहा कि मानवीय मन पर द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव का अत्याधिक प्रभाव होता है। आँखों के सामने जब परमात्मा, गुरुदेव या किसी सज्जन की मूर्ति या चित्र आता है, तब मन में उनके जीवन का अनुसरण करने का मन स्वत: हो जाता है और जब आँखों के सामने बीभत्स या हिंसा आदि के चित्र या दृश्य आते हैं, तब मन में पाप प्रवृत्तियों के कुसंस्कार उत्तेजित हो जाते हैं। जब मंदिर आदि धर्म स्थान, तीर्थस्थान, या किसी महामुनि के साधना-स्थल पर जाते हैं तब मन में सात्त्विकता एवं निर्मलता का स्पर्श होता है और जब हम सिनेमागृह, बगीचे या पर्यटन स्थल पर जाते हैं तब मन में मौज-शौक एवं विलासिता के विचार आते हैं। वैसे ही जब पर्व दिनों, वर्षावास-चातुर्मास, पर्युषण पर्व आदि विशिष्ट पर्वों में मन शुभ भावों से भावित बनता है, स्वत: ही त्याग, तपश्चर्या, व्रत-नियम स्वीकार करके पाप कार्यों की अल्पता के शुभ भाव पैदा हो जाते हैं। जब मन में एक शुभ भाव पैदा होता है, तब वह शुभ भाव, अनेक शुभ भावों को पैदा कराकर आत्मा को मुक्ति के पथ पर अग्रसर करा देता है और जब मन में एक दुर्भाव पैदा होता है, तब चाहे जितनी आत्म प्रगति की हो, सब कुछ ध्वस्त होकर पतन के गर्त में डूब जाता है। मानव शब्द में ही मान शब्द रहा है, जो मानव के अभिमान का सूचक है। मानव के लिए सत्ता, संपत्ति, स्वजन आदि का त्याग आसान है, सबसे कठिन है अपने अभिमान का त्याग । अभिमान के कारण ही मानव के मन में क्रोध, माया और लोभ के भाव पैदा होते हैं। दुनिया में होने वाले सारे युद्ध इन चार कषायों को ही आभारी हैं। चाहे दुनिया के बड़े युद्ध हो या पल-पल मन में पैदा होते सूक्ष्म युद्ध, वे भी क्रोधादि कषायों के कारण हैं। कषायों से मुक्त होने के लिए यह वर्षावास का चातुर्मास है। जिंदगी भर की आराधना तो साधु जीवन में है, परंतु जिसके पास साधु-जीवन योग्य, शक्ति और मनोबल न हो, उसे अधिकाधिक पाप कार्यों के त्याग स्वरूप श्रावक जीवन का पालन करना चाहिए । आत्म जागृति के लिए वर्षावास का चातुर्मास अत्यधिक महत्वपूर्ण है। जैसे व्यापार की सीजन में व्यक्ति थोड़ा भी आलस किये बिना व्यापार में जुड़ जाता है। वहाँ तो मात्र पैसे की कमाई होगी, जो मात्र एक भव में साथ देगी। जबकि आराधना की सीजन के समान चातुर्मास पर्व हमें जगाने के लिए दरवाजे पर आ खड़ा है। मात्र अल्प समय में ही चातुर्मास का प्रारंभ होगा। आये हुए इस अवसर को अधिक-से-अधिक धर्म-आराधना में जुडक़र सफल करना चाहिए ।इस अवसर पर कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया, अध्यक्ष शैलेन्द्र हिरण, भोपालसिंह सिंघवी, जसवंत सिंह सुराणा, गौतम मुर्डिया, हेमंत सिंघवी आदि उपस्थित रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation तीन दिवसीय कैट उड़ान एग्जीबिशन का हुआ शुभारंभ, पहले दिन उमड़े शहरवासी स्कूली बच्चों को स्टेशनरी वितरीत की : राजस्थान समाज सेवा संस्थान का सेवा मन से अभियान