Site icon 24 News Update

सत्य से बड़ा कोई धर्म नही है-संत शास्त्री

Advertisements

24 News Update सागवाड़ा (जयदीप जोशी)। नरग के आसपुर मार्ग योगिन्द्रङ्क्षगरी तलहट पर स्थित श्रीप्रभुदास धाम रामद्धारा मे चातुर्मास रामकथा मे मेडता उत्तराधिकारी संत श्रीरामनिवास शास्त्रजी महाराज ने कहा सत्य से बड़ा कोई धर्म नहीं है। धर्म की रक्षा करना राजाओं का कर्तव्य है।
संत ने कहा हमारे कई ऋषि ,मुनियों ,राजाओं ने अपने धर्म की रक्षा के लिए सर्वस्व लुटा दिया परंतु अपना धर्म नहीं खोया दधिची ने अपने शरीर की हड्डियां शत्रुओं के विनाश के लिए अर्पण कर दी । वहीं राजा हरिश्चंद्र ने अपना सर्वोच्च धर्म की रक्षा हेतु समर्पित कर दिया । केवट राम जी के चरण धोना चाहता है वह कहता है प्रभु आपके चरणों में कोई जादू है आपके चरणकमल से पत्थर की नारी बन गई। मेरी तो यह लकड़ी की नव है । यही मेरा रोजगार है। कहने का तात्पर्य यह है कि भगवान के चरणों की पूजा करनी चाहिये। केवट प्रभु से केवल कृपा मागते है प्रभु की कृपा से भवसागर पार होता है केवट सन्तोषी है। अतःप्रयाग को प्रयागराज कहते है। प्रयागराज त्रिवेणी संगम है। प्रयागराज के दर्शन मात्र से मोक्ष प्राप्त होता हे.भगवत दर्शन से सारे पुण्यो का लाभ प्राप्त होता है। संसारिक मानव भटका सकता हे परन्तु संत सही मार्ग बतायेगा। सन्तों के बताए रास्तें पर चलना चाहिए। रास्ते से मतलब है कल्याण मार्ग । कोई बधंन नही है। विभिन्न वाद्ययंत्रो पर लता तायल केलाश माकड, तबले पर लोकेश ठाकुर,मंगलेश भाटी ने ंसगत दी। उदयराम महाराज के सानिध्य मे केशव चन्द्र बारोट/दशरथलाल बारोट परिवार द्धारा व्यासपीठ एवं पोथी पूजन का लाभ प्राप्त किया। कथा में संत अमृत राम महाराज, महेश, नयन, लक्ष्मण, बादल, हर्षित, रामचंद्र अग्रवाल, कमल शर्मा, रामजी लाल अग्रवाल, रमाकांत भावसार, रामप्रकाश अग्रवाल, प्रसाद भावसार, प्रभाशंकर फलोत,कमल शर्मा, गोर्धनलाल शर्मा, हेमंन्त शुक्ला,रमेश तायल, हेमंत भावसार, विजयराम भवसागर, मधुकर भावसार,राजेंद्र शुक्ला, रमाकांत भावसार, लाला भाई भावसार, नैयना त्रिवेदी, मीना भावसार, हेमा खांट, पिंकी भावसार, मधुकान्ता आर्य, निर्मला भावसार, भावना भावसार, मोनिका भावसार, मधुबाला सोमपुरा सहित अन्य समाज के भक्त उपस्थित रहे।

Exit mobile version