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सांवलियाजी मंदिर में बदली परंपरा, अब 56 भोग और मोरपंख चढ़ाने पर रोक

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24 News Update चित्तौड़गढ़। सांवलियाजी मंदिर में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ और अव्यवस्था को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने पारंपरिक 56 भोग और मोरपंख चढ़ाने की व्यवस्था पर रोक लगा दी है। अब श्रद्धालु केवल भंडार में नकद राशि या सोना-चांदी जैसी भेंट ही अर्पित कर सकेंगे और दर्शन के लिए उन्हें खाली हाथ ही मंदिर में प्रवेश करना होगा।
मंदिर मंडल अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव के अनुसार हाल के समय में श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते भोग चढ़ाने की प्रक्रिया में काफी समय लगने लगा था। कई श्रद्धालु समूह में आकर गर्भगृह के सामने लंबे समय तक रुकते थे, जिससे कतारें लंबी हो जाती थीं और अन्य भक्तों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। विशेष रूप से 56 भोग लगाने में करीब एक घंटा लग जाता था, जिससे पूरे दिन की व्यवस्था प्रभावित होती थी।
इसके अलावा मंदिर परिसर में गाजे-बाजे के साथ आने, नाच-गाने और भोग के बाद गार्डन क्षेत्र में फोटो-वीडियो बनाने जैसी गतिविधियों से भी भीड़ और अव्यवस्था बढ़ रही थी। कई बार इन बातों को लेकर विवाद की स्थिति भी बन जाती थी। ऐसे में मंदिर में शांति और अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
मंदिर प्रशासन ने नकली सामग्री को भी एक बड़ी समस्या बताया है। हाल के दिनों में नकली मावे से बनी मिठाइयां, कृत्रिम फूल और नकली मोरपंख बड़ी मात्रा में उपयोग किए जा रहे थे, जो धार्मिक भावनाओं और गुणवत्ता दोनों के लिहाज से उचित नहीं थे। इसी कारण इन सभी वस्तुओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
हालांकि इस फैसले पर श्रद्धालुओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ लोग इसे व्यवस्था सुधारने की दिशा में जरूरी कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु भोग चढ़ाने के लिए अलग व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। फिलहाल प्रशासन ने प्रसाद के लिए अलग काउंटर शुरू किए हैं और विशेष भोग के लिए आरती के बाद रसीद आधारित व्यवस्था लागू की गई है।

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