24 News update अयोध्या, 1 मई 2025
राम मंदिर के निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। अब मंदिर के प्रथम तल के छह प्रमुख दरवाजों पर 18 किलो शुद्ध सोना मढ़ा जा रहा है। हर दरवाजे पर 3 किलो सोने की परत चढ़ाई जा रही है। इसके साथ ही मंदिर के मुख्य शिखर पर स्थित कलश और श्रीराम दरबार के सिंहासन को भी स्वर्ण से अलंकृत किया जा रहा है। यहां 3 से 4 किलो तक सोना उपयोग में लाया जाएगा।
स्वर्ण-मंडित दरवाजे और सिंहासन
प्रथम तल पर लगाए जा रहे सभी दरवाजे महाराष्ट्र के चंद्रपुर से लाई गई सागौन की लकड़ी से तैयार किए गए हैं। पहले इन पर तांबे की परत चढ़ाई गई और अब उसी पर बारीकी से सोना मढ़ा जा रहा है। प्रत्येक दरवाजे पर कमल पुष्प पर जलवर्षा करते दो हाथियों की कलाकृति है, जबकि दोनों ओर जय-विजय की आकृतियाँ उकेरी गई हैं। यह कार्य अगले तीन दिनों में पूरा कर लिया जाएगा।
राम दरबार के स्वरूप की झलक
मंदिर के फर्स्ट फ्लोर पर श्रीराम दरबार की भव्य संगमरमर की प्रतिमाएं जयपुर के प्रसिद्ध शिल्पकार सत्यनारायण पांडे द्वारा निर्मित की गई हैं। दरबार में भगवान राम और माता सीता सिंहासन पर विराजमान रहेंगे। उनके समीप लक्ष्मण और शत्रुघ्न पंखा डोलाते हुए, हनुमान और भरत चरणों में बैठे हुए दिखाई देंगे।
ध्वज दंड से मंदिर की नई ऊंचाई
वैशाख तृतीया के दिन मंगलवार को मंदिर के मुख्य शिखर पर 42 फुट ऊंचे ध्वज दंड की स्थापना की गई, जिससे मंदिर की कुल ऊंचाई अब 203 फुट हो गई है। यह कार्य एल एंड टी और टीसीएस की इंजीनियरिंग टीम ने ट्रॉली और दो टावर क्रेन की सहायता से सुबह 6:30 से 8 बजे के बीच सम्पन्न किया। ध्वज दंड का निर्माण गुजरात की भरत भाई कंपनी द्वारा विशेष धार्मिक डिज़ाइन में किया गया है।
प्राण-प्रतिष्ठा की तैयारी और उत्सव की योजना
ट्रस्ट द्वारा जून माह में श्रीराम दरबार की प्राण-प्रतिष्ठा आयोजित की जाएगी, जिसे लेकर तीन दिवसीय भव्य उत्सव की योजना बनाई गई है। इसकी तिथि जल्द ही घोषित की जाएगी। मंदिर परिसर में सप्त ऋषियों के सात मंदिर और परकोटे में छह देवी-देवताओं के मंदिरों का निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। सप्त ऋषियों की मूर्तियां स्थापित हो चुकी हैं और चार शिखर कलश भी लगाए जा चुके हैं।
15 मई तक पूरा होगा सम्पूर्ण निर्माण
ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के अनुसार, 15 मई 2025 तक पूरे मंदिर परिसर का निर्माण और सभी मूर्तियों की स्थापना पूर्ण कर ली जाएगी। गर्भगृह का निर्माण पूर्व में ही पूरा किया जा चुका है, जहां रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ दर्शन शुरू हो गए थे।

