24 News Update सागवाड़ा (जयदीप जोशी) बांसवाड़ा मार्ग गमलेश्वर महादेव मंदिर के सामने स्थित गमलेश्वर तालाब पेटे में भराव कर सड़क निर्माण पर उपखण्ड अधिकारी सुबोध सिंह चारण ने न.पा. प्रशासन को फटकार लगाई। नगर के प्रमुख चार तालाब—लोहारिया, मसानिया, गमलेश्वर और सासरिया तालाब पर भूमाफियों की गिद्ध नजर होकर तालाबों की भूमि पर अतिक्रमण किया जा रहा है, जिस पर प्रशासन की कोई नजर नहीं है। वहीं जनता ने कई बार तालाबों के सीमांकन की आवाज उठाई है, लेकिन उसकी ओर प्रशासन का कोई कदम नहीं है। प्रशासन किसी राजनीतिक दबाव में है या और कोई कारण है, यह जनता समझ नहीं पा रही है। वहीं नगर पालिका पूरी तरह अंधी बनी हुई है। किसी की शिकायत आती है तो कार्रवाई करती नहीं, तो मूकदर्शी बनकर देखती रहती है।
जिस समय न.पा. में राजनीतिक बोर्ड कायम होता है तो अतिक्रमण करने वालों की बाढ़ आ जाती है, जिसमें भाजपा व कांग्रेस दोनों प्रमुख पार्टियों के नेता व पदाधिकारी शामिल हैं। जिस पर दोनों पार्टियों के नेता एक-दूसरे पर आरोप लगाकर अपने आप को पाक-साफ सिद्ध करने में लगे हुए हैं, लेकिन वास्तविकता से जनता वाकिफ है।
आरयूआईडीपी के तहत तालाबों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के दावे जोर-शोर से किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। शहर के गमलेश्वर तालाब पेटे में मिट्टी भराव कर कच्ची सड़क बना दी गई है। इस निर्माण के बाद नगरपालिका प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। जानकारी मिलने पर तालाब पेटे जैसे संवेदनशील क्षेत्र में रातों-रात भराव कर सड़क तैयार कर दी गई। जल संरक्षण की दृष्टि से तालाब का पेटा कैचमेंट एरिया माना जाता है, जहां किसी भी प्रकार का स्थायी या अस्थायी निर्माण नियमों के विपरीत है।
सवाल उठता है कि यह निर्माण किसकी अनुमति से हुआ? क्या पालिका को इसकी जानकारी नहीं थी या फिर अनदेखी की गई? यह प्रश्नवाचक बना हुआ है। जानकारी मिलते ही एसडीएम सुबोध सिंह चारण मौके पर पहुंचे और वस्तुस्थिति का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की तथा नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी और पटवारी को मौके पर बुलाकर जवाब मांगा।
एसडीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक ओर तालाबों के सौंदर्यीकरण पर सरकारी धन खर्च हो रहा है, वहीं दूसरी ओर तालाब पेटे में भराव अस्वीकार्य है। उन्होंने पालिका को निगरानी में गंभीरता बरतने के निर्देश दिए।
गौरतलब है कि शहर के अन्य तालाबों के किनारों पर भी भराव और कॉलोनाइजेशन की शिकायतें सामने आ रही हैं। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो संरक्षण योजनाएं केवल कागजी साबित होंगी और प्राकृतिक जलस्रोतों पर खतरा बढ़ता जाएगा। अब देखना यह है कि जिम्मेदारी तय कर वास्तविक कार्रवाई होती है या मामला औपचारिक नोटिस तक सीमित रह जाता है।
पूर्व में नगरवासियों ने नगर के प्रमुख चार तालाब—लोहारिया, मसानिया, गमलेश्वर और सासरिया—के सीमांकन की कई बार आवाज उठाई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। भूमाफिया बेधड़क तालाब की भूमि पर अतिक्रमण कर भवन निर्माण कर रहे हैं तथा अभी भी नगर के तालाबों की भूमि पर गिद्ध नजर लगाए बैठे हैं।
नगर के आसपुर मार्ग नर्सरी मोड़ के पास स्थित सासरिया तालाब तो अपनी अंतिम सांस गिन रहा है, जहां आगे-पीछे पूरी तरह अतिक्रमण हो गया है। अंदर का कुछ भाग ही शेष है, जहां अभी भी पानी नजर आ रहा है। जैसे ही गर्मी का मौसम आएगा, तो यह भी पूरी तरह अतिक्रमण होकर समाप्त होने के कगार पर है।
आखिर प्रशासन कब नगर के इन तीनों तालाबों की सुध लेगा? चारों तरफ भूमाफियों का साम्राज्य है। कहीं प्रशासन राजनीतिक दबाव या प्रभावशाली लोगों के दबाव में तो नहीं आ रहा, जिसके चलते अभी तक तालाबों का सीमांकन नहीं किया जा रहा है। जहां नगर में गरीब व्यक्ति अपना आशियाना बनाता है तो नगर पालिका मौके पर पहुंचकर रोक लेती है, लेकिन भूमाफियों पर हाथ नहीं डालती। जनता की मांग है कि आखिर कब होगा तालाबों का वास्तविक सीमांकन।
गमलेश्वर तालाब पेटे में भराव कर सड़क निर्माण, उपखण्ड अधिकारी ने न.पा. को लगाई फटकार

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