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जिला स्तरीय जनसुनवाई में शिकायत के बाद भी फूटा तालाब से भूमाफियाओं के अतिक्रमण हटाने की नहीं हुई कार्रवाई

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24 न्यूज़ अपडेट उदयपुर। उदयपुर देहात जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व महासचिव प्रदीप त्रिपाठी ने बताया कि सितंबर 2024 में जिला स्तरीय जनसुनवाई शिविर में जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर उदयपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 17 के हिरण मगरी सेक्टर 13 के फुटा तालाब में पिछले वर्षों में उदयपुर के कुछ कतिपय राजनीतिक, रसूखदार और प्रभावशाली लोगों द्वारा तालाब की एतिहासिक पाल ( जो करीब 8-10 फीट ऊंची है ) को करीब 15 फीट चौड़ी तोड कर तालाब पेटे के अन्दर अवैध तरीके से बनवाई गई कच्ची सड़क को हटवाने की मांग की थी लेकिन करीब 3 माह बीत जाने के पश्चात भी जिला प्रशासन और न्क्। द्वारा इस मुद्दे पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी।
प्रदीप त्रिपाठी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि जिला प्रशासन और यूडीए द्वारा इस मुद्दे पर उदासीनता पुर्ण रवैया “ पुरे कुएं में भांग घुली हुई है“ मुहावरे/ कहावत को चरितार्थ कर रहा है, साथ ही इन अधिकारियों द्वारा यहां किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं करने से राजनीतिक पहुंच रखने वाले प्रभावशाली, रसूखदार, और भुमाफियो द्वारा तालाब क्षेत्र में बिना अनुमति के कई पक्के निर्माण (मकान) कराये जा रहे हैं तो दूसरी तरफ इन्हीं तथाकथित व्यक्तियों द्वारा तालाब पेटे में ट्रेक्टरों द्वारा ईमारती मलबा डलवा कर तालाब पेटे की जमीन को खत्म किया जा रहा है।
प्रदीप त्रिपाठी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि जिला प्रशासन और यूडीए को कई बार पत्र लिखकर, विभिन्न समाचार पत्रों के संवाददाताओं ने अपने समाचार पत्र में समाचार प्रकाशित कर और कई इलेक्ट्रॉनिक मीडिया चैनल ने अपने – अपने चैनल पर खबर प्रसारित कर उदयपुर जिले के आला और जिम्मेदार अधिकारियों को इस प्रकरण से अवगत कराया मगर अधिकारी तथाकथित प्रभावशाली व्यक्तियों के दबाव और डर से अपनी – अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ कर बैठे हैं। जबकि राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर की ओर से एक जनहित याचिका पर प्रदेश भर की झीलों के सम्बंध में दिये गये निर्णय में झील एवं तालाब के भराव क्षेत्र में किसी भी तरह के पक्के निर्माण पर रोक लगा रखी है तथा झील एवं तालाब में किये गये सभी निर्माणों को सम्बन्धित सरकारी विभागो द्वारा हटाये जाने के निर्देश दिए हुए हैं और यदि ऐसा नहीं होता है तो राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना है। लेकिन यूडीए के अधिकारी राजनीतिक पार्टी के तथाकथित नेताओं के दबाव में आ कर तालाब पेटे में अवैध रूप से बनाई जा रही कच्ची सड़क और हो रहे अन्य निर्माण कार्यों पर आंखें मूंदकर कर बैठे हैं और राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्णय की अवमानना कर रहे हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि गिर्वा तहसीलदार ने भी उक्त तालाब पेटे की जमीन को पेटा भूमि राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 की धारा 16 के अन्तर्गत प्रतिबंधित भूमि के श्रेणी में माना है जिसका अन्य किसी उपयोग हेतु परिवर्तन नहीं किया जा सकता है इसके अतिरिक्त जनहित याचिका संख्या 1536/2003 अब्दुल रहमान बनाम सरकार में माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर द्वारा पारित निर्णय की अवहेलना मानी है तथा करीब 188 व्यक्तियों को बेदखली के लिए राजस्व न्यायालय में एक वाद दायर कर रखा है। प्रदीप त्रिपाठी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर राजस्थान उच्च न्यायालय और राजस्थान सरकार को स्वत संज्ञान लेकर इस तालाब में अब तक हुए विभिन्न अतिक्रमणों को हटवाने का आदेश दिलावे जिससे यह तालाब संरक्षित यह सके तथा इस तालाब पेटे में किये गए अतिक्रमणों में लापरवाही बरतने वाले विभिन्न विभागों के अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करवाने का आदेश दिलाएं।

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