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“नौकरी देने वाला बने युवा” बयान युवाओं के जख्मों पर नमक— माकपा

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24 News Update उदयपुर। राज्य सरकार के बजट 2026-27 को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। माकपा जिला सचिव एवं पूर्व पार्षद राजेश सिंघवी ने वित्त मंत्री दीया कुमारी द्वारा पेश किए गए बजट को राजस्थान की जनता को “ऊंचे सपने दिखाकर फिर से ठगने वाला बजट” करार दिया है।
राजेश सिंघवी ने कहा कि यह बजट आम जनता, मध्यम वर्ग, मजदूर, किसान, छात्र और युवाओं के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने के बजाय केवल शब्दों और लफ्फाजी तक सीमित है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में जमीनी समस्याओं का कोई समाधान नजर नहीं आता।
युवाओं के प्रति असंवेदनशील सोच का आरोप
माकपा नेता ने मुख्यमंत्री के उस कथन पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया कि “राजस्थान का युवा नौकरी लेने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बने”। सिंघवी ने इसे रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे लाखों युवाओं के घावों पर नमक छिड़कने जैसा बताते हुए कहा कि यह बयान बेरोजगार युवाओं के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता और क्रूर सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में लाखों पद रिक्त पड़े हैं, लेकिन बजट में इन पदों को भरने को लेकर कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया।

किसान, मजदूर और सामाजिक वर्गों की उपेक्षा
सिंघवी ने आरोप लगाया कि किसान लगातार बर्बादी की ओर बढ़ रहा है, लेकिन बजट में फसलों के उचित मूल्य, खरीद व्यवस्था और नई मंडियों की स्थापना को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के चलते उद्योग बंद हो रहे हैं, लेकिन न तो बंद उद्योगों के पुनरुद्धार की कोई योजना है और न ही वहां कार्यरत मजदूरों के पुनर्वास की।

शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय पर सवाल
माकपा नेता ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में डॉक्टर, दवाइयां, जांच उपकरण, स्टाफ और भवनों की भारी कमी है। वहीं, स्कूलों की हालत जर्जर है, पढ़ाई की व्यवस्था कमजोर है और छात्रावास बदहाल स्थिति में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और कर्मचारियों के कल्याण के लिए कोई ठोस योजना नहीं है तथा पुरानी पेंशन योजना को लेकर भी कोई घोषणा नहीं की गई।
उदयपुर को भी निराशा
राजेश सिंघवी ने कहा कि यह बजट उदयपुर की जनता के लिए भी छलावा साबित हुआ है। बजट में उदयपुर के लिए ऐसी कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई, जिससे आम लोगों को सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि बजट 2026-27 विकास का दस्तावेज नहीं, बल्कि जनता की वास्तविक समस्याओं से आंख मूंदने वाला बजट है, जो आने वाले समय में जन असंतोष को और बढ़ाएगा।

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