राजस्थान विद्यापीठ में विशेषज्ञों ने समझाए खोज और आइडिया की सुरक्षा के गुर, कुलपति प्रो. मंजू मांडोत ने हर विषय में पेटेंट जागरूकता को बताया जरूरी; विश्वविद्यालय में आईपीआर सेल स्थापित करने की तैयारी उदयपुर, 24 अक्टूबर। किसी नए विचार को विकसित करना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी उसकी मौलिकता और अधिकारों की सुरक्षा करना भी है। शोध में मिली उपलब्धि हो, तकनीक का नया प्रयोग हो या किसी उत्पाद को तैयार करने का अनूठा तरीका—यदि उसके बौद्धिक संपदा अधिकारों की समय पर सुरक्षा नहीं की गई, तो आविष्कारक को अपने ही काम पर अधिकार साबित करने में मुश्किल हो सकती है। पेटेंट की इसी अहमियत और उसकी प्रक्रिया की बारीकियों से विद्यार्थियों व शोधकर्ताओं को परिचित कराने के लिए राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय की ओर से शनिवार को प्रतापनगर स्थित आईटी सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। ‘पेटेंट जागरूकता—रिसर्च, आइडिया और इनोवेशन की सुरक्षा’ विषय पर हुई इस कार्यशाला में एसीएम उदयपुर प्रोफेशनल चैप्टर और सीएसआई उदयपुर चैप्टर ने तकनीकी सहयोग दिया। विशेषज्ञों ने पेटेंट के महत्व, उसके विभिन्न प्रकार, शोध की मौलिकता और पेटेंट लेखन में सावधानी जैसे पहलुओं पर जानकारी साझा की। कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मंजू मांडोत ने कहा कि पेटेंट का दायरा किसी एक विषय तक सीमित नहीं है। विज्ञान, तकनीक, शिक्षा, चिकित्सा, कृषि और समाज विज्ञान सहित हर क्षेत्र में नए विचारों और खोजों की सुरक्षा की आवश्यकता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में विभिन्न विभागों के शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर काम करें तो नए शोध और नवाचार के अवसर बढ़ सकते हैं। ऐसे प्रयासों को पेटेंट के माध्यम से सुरक्षित करना विश्वविद्यालय की पहचान और शोध क्षमता को भी मजबूत कर सकता है। प्रो. मांडोत ने कहा कि विश्वविद्यालय का दायित्व केवल विद्यार्थियों को पढ़ाना नहीं, बल्कि नया ज्ञान विकसित करना और उसकी सुरक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करना भी है। पेटेंट को बहुविषयक दृष्टिकोण से अपनाने पर अलग-अलग विषयों में किए जा रहे शोध का उपयोगी परिणाम सामने आ सकता है। पेटेंट लेखन में शब्दों का चयन भी निर्णायक कार्यशाला के मुख्य वक्ता कैरियर पॉइंट यूनिवर्सिटी, कोटा के प्रो. आबिद हुसैन ने पेटेंट की प्रक्रिया और उसके विभिन्न प्रकारों की जानकारी दी। उन्होंने यूटिलिटी पेटेंट का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके तहत नई मशीन, प्रक्रिया या उत्पाद जैसे आविष्कारों को सुरक्षा प्रदान की जाती है। उन्होंने पेटेंट तैयार करते समय नैतिकता और मौलिकता का पालन करने पर जोर दिया। किसी दूसरे व्यक्ति की खोज को अपना बताकर पेटेंट कराने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। प्रो. हुसैन ने पेटेंट लेखन की बारीकियों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दस्तावेज में एक गलत शब्द भी पेटेंट को कमजोर कर सकता है। इसलिए आविष्कार का विवरण तैयार करते समय सटीक भाषा, स्पष्टता और तकनीकी तथ्यों का ध्यान रखना जरूरी है। शोधकर्ताओं के लिए केवल नया विचार विकसित करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे सही तरीके से प्रस्तुत करना और उसके अधिकारों की सुरक्षा की प्रक्रिया समझना भी आवश्यक है। आयोजन सचिव डॉ. भारत सिंह देवड़ा ने कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को पेटेंट के प्रति जागरूक करना आयोजन का प्रमुख लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि भविष्य में विश्वविद्यालय में आईपीआर सेल स्थापित करने की योजना है, जिससे शिक्षकों और विद्यार्थियों को अपने शोध व आविष्कारों के पेटेंट की प्रक्रिया में संस्थागत सहयोग मिल सकेगा। कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ। इसमें प्रतिभागियों ने पेटेंट से जुड़े सवाल पूछे, जिनका समाधान प्रो. आबिद हुसैन और डॉ. भारत सिंह देवड़ा ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. भरत सुखवाल ने किया, जबकि डॉ. मनीष श्रीमाली ने आभार जताया। इस अवसर पर डॉ. पारस जैन, प्रो. बलिदान जैन, प्रो. अमी राठौड़, प्रो. सुनीता मुड़रिया, प्रो. अवनीश नागर, डॉ. एसबी नागर, डॉ. राजन सूद, डॉ. मीता चौधरी, प्रो. लाला राम जाट, डॉ. हीना खान, प्रो. सुनील चौधरी, डॉ. शिल्पा कंठालिया, डॉ. सपना श्रीमाली, डॉ. मोहसीन छीपा, प्रो. भूरालाल श्रीमाली, डॉ. गजेन्द्र सिंह, डॉ. जयसिंह जोधा, डॉ. कुलशेखर व्यास, डॉ. प्रदीप एस. शक्तावत, डॉ. गौरव गर्ग, डॉ. दिनेश श्रीमाली, डॉ. दिलीप चौधरी, डॉ. ललित सालवी, मुकेश नाथ, दुर्गाशंकर, त्रिभुवन सिंह बमनिया और मनोज यादव सहित अन्य उपस्थित रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation खाद्य और डेयरी उद्योग में नवाचार से खुलेंगे नए अवसर, उद्यमियों ने साझा किए सफलता के अनुभव दीपावली मेले की कमान 21 समितियों के हाथ, महापौर पारस सिंघवी ने तय की जिम्मेदारियां