24 न्यूज अपडेट, जयपुर। राजस्थान में शिक्षक वर्ग अब सरकारी नियमों और व्यावहारिक असंभवताओं के बीच फंसा हुआ है। मोबाइल से शाला दर्पण पर सभी एंट्री अनिवार्य करना और नियम न मानने पर निलंबन जैसी कार्रवाई की धमकी, शिक्षकों को उलझन में डाल रही है।
मिड-डे-मील का नया मीनू, जो जुलाई में जारी हुआ था, अब उन्हें दोहरी मुसीबत में डाल रहा है। शिक्षक कहते हैं कि नियम पालन न करने पर उन्हें गबन करने वाला साबित कर कार्रवाई का डर, और पालन करने पर व्यावहारिक असंभवता का सामना करना पड़ रहा है। उदाहरण के लिए, एक कुक और हेल्पर के लिए 50 बच्चों के लिए दूध, दाल, सब्जी और रोटियों का समय पर परोसना केवल एक चुनौती नहीं, बल्कि असंभव कार्य है।
शिक्षक संघों का कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ मिड-डे-मील या शिक्षकों तक सीमित नहीं है। यह प्रश्न उठाता है कि क्या सरकारी योजनाएं और नियम धरातल की सच्चाई, संसाधन और वास्तविकताओं के अनुरूप बनाए जा रहे हैं। देश में अधिकांश परिवारों में एक ही सब्जी या दाल बनती है, जबकि नियम यह अपेक्षा करते हैं कि अलग-अलग व्यंजन तैयार किए जाएं।
राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष शेर सिंह चौहान ने चेतावनी दी है कि यह मुद्दा संगठन और शिक्षक वर्ग के लिए गंभीर चुनौती बन गया है और इसे लेकर प्रत्येक जिले में सम्मेलन और विरोध किया जाएगा। इस पूरे विवाद में सवाल यह है कि क्या नियम और योजनाएं केवल कागजी प्रतिबद्धता हैं या वास्तविक धरातल की परिस्थितियों और शिक्षकों की सीमाओं को समझने का प्रयास भी किया गया है। वातानुकूलित कमरों में बैठकर अफसर नीतियां बनाते हैं और लगता है कि धरातल की वस्तुस्थितियों से वे सदा अनजान ही रहते हैं।
मिड-डे-मील का नया मीनू कर रहा ‘‘भेजा फ्राई’’, शिक्षकों के लिए बना सवाल और चुनौती

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