24 News Update सागवाड़ा (जयदीप जोशी)। नगर के आसपुर मार्ग लोहारिया तालाब के सामने स्थित कान्हडदास दास धाम बड़ा रामद्वारा में चातुर्मास में शाहपुरा धाम के रामस्नेही संत तिलकराम ने सत्संग में बताया कि जन्माष्टमी की कथा जो सुन लेगा उसका अंतःकरण से मुक्ति हो जाएगी ।
संत ने कृष्ण जन्मोत्सव को लेकर कहा भगवान की मूर्ति छोटी -बड़ी नहीं होती वह सिर्फ भाव के भगवान ही होते हैं । कृष्णा आध्यात्मिक क्रांति के यथार्थ दृष्टा है, वे राग, प्रेम ,काम, ध्यान ,योग, भोग ,आत्मा -परमात्मा, युद्ध, कूटनीति और राजनीति आदि विषयों को यथार्थ रूप से स्वीकार करते हैं । जब मन में गहन अंधकार छाया हो बंधनयुक्त हो तब कैसे हमारा पुरुषार्थ हमारे अवचेतन में ऐसा रचनात्मक भाव उत्पन्न कर दे कि सारे बंधन टूट जाए और अज्ञान के तमस का आवरण टूटकर बिखर जाए असलियत में यही कृष्ण- तत्व की मौजूदगी है और यही जन्माष्टमी है । कृष्ण सदैव कर्म के प्रति प्रतिबद्ध दिखाई देते हैं । वह कोई निजी हित साधने या व्यक्तिगत लाभ उठाने के लिए कर्म से प्रेरित नहीं होते इसलिए दूसरों को भी कर्मफल की चिंता से मुक्ति का संदेश देते हैं । संत ने कहा कि भक्त बनना आसान नहीं है सभी कामनाओ को त्याग करता वही भगवान की शरण में जाता है वही सच्चा भक्त होता है । धर्मशास्त्रों में धर्म, अर्थ ,काम और मोक्ष चार पदार्थ बताए गए हैं पर भक्त के मन में ये नहीं रहते । वह केवल भक्ति चाहता है । भक्त को केवल प्रभु के चरणों की सेवा मिले, वही काफी है । प्रेम- ज्ञान और भक्ति ऐसी संपत्ति है, जो सब कुछ समाप्त होने के बाद भी आपके पास शेष रह जाते हैं । संत ने कहा कि यदि जीवन में कुछ श्रेष्ठ पाने की ठान ली तो बड़ी से बड़ी बाधाएं भी आपसे परास्त होकर चली जाएगी । कारागार में जन्म लेने वाले कृष्णा यूं ही द्वारिकाधीश नहीं बन जाते । उसके लिए पूतना, तृणावर्त, अघासुर, बकासुर, व्योमासुर, चारुण ,मुष्टिक और कंस जैसी जीवन की तमाम प्रतिकूलताओं, विघ्न -बाधाओ और बवंडरो का सदैव डटकर सामना भी किया । ऐसे ही मनुष्य को जीवन में बड़ी उपलब्धि हासिल करने के लिए बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है । प्रवक्ता बलदेव सोमपुरा ने बताया कि संत के सानिध्य में भक्तो द्वारा जन्माष्टमी उत्सव मनाया गया। संत प्रसाद संजय गुप्ता परिवार का रहा । सत्संग में समिति अध्यक्ष सुधीर वाडेल ,हरीश गुप्ता, दिनेश शर्मा ,दामोदर दलाल, भरत शर्मा, बालमुकुद शर्मा, हरीश गुप्ता ,देवीलाल सोनी ,दीपक गुप्ता, शिवराम मोची, नानालाल दर्जी, गोपाल टेलर, दिलीप कोठारी, मंगलेश गुप्ता, नाथू परमार ,विष्णु दोसी., अनूप परमार, विजय पंचाल ,अशोक भट्ट ,सुरेंद्र शर्मा सहित रामस्नेही भक्त उपस्थित रहे।
भगवान की मूर्ति कोई छोटी-बड़ी नहीं होती, वे तो सिर्फ भाव के भगवान ही होते हैं-संत तिलकराम महाराज

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