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कृर्षि उपज मंडी परिसर में अचानक बरसी रिमझिम बारिश बनी किसानों के आँसुओं का कारण, भीग गई खुले आसमान के नीचे रखी उपज खून-पसीने से उगाई गई फसलें

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कविता पारख

24 News Update निम्बाहेडा। मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। मौसम विभाग ने निम्बाहेडा उपखंड क्षेत्र में आज सुबह तेज हवाओं का दौर चलने के बाद कुछ समय के लिए बारिश का दौर चला। जिससे मौसम में ठंडक घुल गई व गर्मी छू मंतर हो गई। एकदम मौसम बदलने से लोगों को काफी राहत महसूस हुई लेकिन तेज हवाओं के चलते विवाह समारोह में लग टेंन्ट ,कनाते सभी ढहे व कहीं तो उड गये काफी दूर जाकर गिरे। जिससे विवाह वाले घरों में चिंता बढ़ गई व आनन-फानन में अलग से व्यवस्थाएं करनी पड़ीं। इस तेज हवाओं के दौरान नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं लोहे के पत्तडे उड कर आस-पास सडकों पर भी देखे गये कहीं प्लेक्स डउ कर इधर -उधर उड कर कहीं पेड की डालियो पर तो बिजली के तारों में उलझ गये इसकी सूचना मिली है।
किसानों की पसीने की खरी मेहनत की कमाई बेमौसम की बारिष से उपज जिन्स गिली हुई
जहां एक ओर बेंमौसम की पहली बारिश लोगों के लिए राहत और सुकून लेकर आई, वहीं दूसरी ओर यह बरसात किसानों के लिए एक नई पीड़ा बनकर आई। आज अचानक हुई तेज बारिश ने निम्बाहेड़ा कृर्षि उपज मंडी परिसर में किसानों की उपज खुले आसमान के नीचे रखा जो रिमझिम बरसात ने भिगो दिया। आसमान के नीचे खुले में रखी फसलें पानी में तरबतर हो गईं। कई किसान मंडी परिसर में अपनी उपज बेचने की आस में पिछले कई दिनों से डटे हुए थे। मेहनत की कमाई जब मंडी परिसर में पानी में बहती दिखी, तो कई किसानों की आंखें नम हो गईं। एक किसान ने रुंधे गले से कहा, “यह फसल नहीं, हमारा सपना था जो आज भीग गया। अब तो इसका दाम भी शायद ना मिले। गिले होने से कुछ कम मिले ।कुछ किसानों ने अपनी उपज खुले आसमान के नीचे रखी उसके उपर तिरपाल की व्यवस्था कर ढक भी दिया लेकिन बरसात का बहता पानी से गिले हो गये।
बारिश की इन बूँदों में शहर के लोगों को सुकून मिला, मगर इन्हीं बूँदों ने मंडी में खड़े किसानों की उम्मीदों को भिगो दिया। सवाल यह भी है कि क्या मंडी व्यवस्थाएं इतनी असुरक्षित हो सकती हैं कि हर बरसात किसानों के लिए एक आपदा बन जाए? सरकार और प्रशासन से किसानों की यह उम्मीद है कि नुकसान की भरपाई के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। वरना ये बादल सिर्फ पानी नहीं, किसानों की मेहनत और सपनों को बहा ले जाएंगे।

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