24 News Update उदयपुर। सागवाड़ा नगर पालिका की राजनीति में एक बार फिर सत्ता का पलड़ा बदल गया है। कांग्रेस नेता नरेंद्र खोड़निया के निलंबन के साथ ही न सिर्फ उनकी कुर्सी गई, बल्कि पालिका भवन से उनका नाम भी हटा दिया गया। इसके तुरंत बाद भाजपा नेता आशीष गांधी ने दोबारा अध्यक्ष पद की कमान संभाल ली, जिससे सागवाड़ा की स्थानीय राजनीति में नया संदेश चला गया है।
दरअसल, सागवाड़ा नगर पालिका में अध्यक्ष पद को लेकर बीते कई दिनों से खींचतान चल रही थी। 14 जनवरी को अदालत के आदेशों के आधार पर नरेंद्र खोड़निया ने खुद को अध्यक्ष बताते हुए कार्यभार संभाला था, लेकिन हालात इतने उलझे कि अगले ही दिन, 15 जनवरी को, एक ही कक्ष में दो-दो अध्यक्ष नजर आए। दोनों पक्षों ने अलग-अलग कुर्सियां लगाकर खुद को पालिका प्रमुख घोषित कर दिया, जिससे प्रशासनिक असमंजस और राजनीतिक तनाव खुलकर सामने आ गया।
मामला तब निर्णायक मोड़ पर पहुंचा जब राज्य सरकार ने 20 जनवरी को पट्टा आवंटन से जुड़े कथित घोटाले के आरोपों में नरेंद्र खोड़निया को एक बार फिर अध्यक्ष और पार्षद पद से निलंबित कर दिया। इसके बाद पालिका कार्यालय में कार्रवाई तेज हुई। अध्यक्ष कक्ष के बाहर लगी खोड़निया की नेम प्लेट हटाई गई और कार्यकाल बोर्ड पर भाजपा नेता आशीष गांधी का नाम दर्ज किया गया।
स्वायत्त शासन विभाग के आदेशों के तहत वार्ड संख्या 21 के पार्षद और पूर्व अध्यक्ष आशीष गांधी को पुनः सागवाड़ा नगर पालिका का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। बुधवार को वे नगर पालिका पहुंचे, जहां भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने फूल-मालाओं से उनका जोरदार स्वागत किया। समर्थकों की मौजूदगी में आशीष गांधी ने अध्यक्ष की कुर्सी संभाली और नगर पालिका का औपचारिक कार्यभार ग्रहण किया।
सागवाड़ा पालिका में इस घटनाक्रम के बाद साफ हो गया है कि फिलहाल प्रशासनिक और राजनीतिक नियंत्रण भाजपा के हाथ में लौट आया है, जबकि कांग्रेस को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है।

