24 News Update सागवाड़ा (जयदीप जोशी)। सागवाड़ा नगर पालिका इन दिनों राजनीतिक खेल का अखाड़ा बन गई है। सात दिन पहले न्यायालय के स्टे आदेश के बाद कांग्रेस के नरेंद्र खोड़निया अध्यक्ष पद पर लौटे थे, लेकिन अब उन्हें फिर से निलंबित कर दिया गया है। खोड़निया पर पद का दुरुपयोग, गलत पट्टे जारी करने और नाले की जमीन पर पट्टे देने के गंभीर आरोप हैं।
सूत्रों के अनुसार, खोड़निया ने अध्यक्ष रहते हुए एम्पावर्ड कमेटी के माध्यम से अपने भाई संतोष कुमार खोड़निया और बेटे सुमित खोड़निया के नाम पर अनैतिक लाभ के लिए पट्टे जारी किए। इसमें 2.06 बिस्वा और 4462 वर्गगज जमीन, साथ ही 7275 वर्गगज जमीन को नियम विरुद्ध रूप से आवासीय पट्टों में बदला गया। जांच में यह भी पाया गया कि मूल सत्यापित प्लान में मौजूद 30 फीट सड़क की जमीन को अनैतिक रूप से अपने परिवार के लाभ के लिए शामिल किया गया।
स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक और विशेष सचिव प्रतीक चंद्रशेखर जुईकर ने मंगलवार को निलंबन आदेश जारी किया। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि खोड़निया ने न्यायिक जांच को प्रभावित करने की संभावना को देखते हुए नियमों का उल्लंघन किया।
पूर्व में, खोड़निया को 10 अप्रैल 2025 को सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित किया गया था। इसके बाद 12 जनवरी को राजस्थान हाईकोर्ट ने उनके निलंबन पर स्टे आदेश जारी किया था। 14 जनवरी को वह फिर से अध्यक्ष पद पर लौटे थे, लेकिन सात दिन के भीतर दो अध्यक्ष एक ही टेबल पर बैठे रहे, जिससे पालिका में कोई विकास कार्य नहीं हो पाए और जनता असंतुष्ट रही। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दल इस राजनीतिक खेल में उलझी हुई हैं। भाजपा की राज्य सरकार ने बाद में आशीष गांधी को नगर पालिका अध्यक्ष नियुक्त किया। गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद विकास कार्यों में ठहराव आया और पालिका पूरी तरह से राजनीतिक अखाड़ा बन गई।
सागवाड़ा की जनता इस स्थिति से खासा नाराज है, क्योंकि लंबे समय से नगर विकास कार्य रुके हुए हैं। अब प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि नियमों और कानून का पालन करते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सागवाड़ा नगर पालिका में राजनीतिक अखाड़ा: निलंबित हुए अध्यक्ष नरेंद्र खोड़निया

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