24 News Update नाथद्वारा. नाथद्वारा में धुलंडी के अवसर पर मंगलवार रात परंपरा और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। श्रीनाथजी मंदिर की प्राचीन परंपरा के अनुसार नगर में ‘बादशाह की सवारी’ निकाली गई, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधान पीठ श्रीनाथजी मंदिर से जुड़ी इस परंपरा ने पूरे नगर को भक्तिमय माहौल में रंग दिया।
शाही सवारी की शुरुआत गुर्जरपुरा स्थित बादशाह गली से हुई। बादशाह का रूप धारण किए व्यक्ति ने नकली दाढ़ी-मूंछ, मुगलकालीन पोशाक और आंखों में काजल लगाकर दोनों हाथों में श्रीनाथजी की छवि धारण की और पालकी में सवार होकर पूरे ठाठ-बाठ के साथ नगर भ्रमण पर निकला। सवारी के साथ मंदिर मंडल का बैंड और बांसुरी की मधुर धुनें वातावरण को और भी भक्तिमय बना रही थीं।
नगर भ्रमण करते हुए सवारी मंदिर की परिक्रमा कर सूरजपोल पहुंची, जहां बादशाह बने व्यक्ति ने नवधा भक्ति के प्रतीक नौ सीढ़ियों को अपनी दाढ़ी से साफ किया। इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इसके बाद मंदिर के परछना विभाग के मुखिया ने बादशाह को वस्त्र और आभूषण भेंट किए। परंपरा के अनुसार उपस्थित लोगों ने उसे खरी-खोटी भी सुनाई, जिसे इस आयोजन की परंपरागत रस्म माना जाता है।
मान्यता है कि यह परंपरा मुगल बादशाह औरंगजेब के समय से जुड़ी एक ऐतिहासिक घटना की स्मृति में निभाई जाती है। सदियों पुरानी इस परंपरा को आज भी नाथद्वारा में पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ जीवंत रखा गया है।

