24 News Update प्रयागराज। प्रयागराज माघ मेले में उपजे विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला समय से पहले छोड़ दिया है। वह बिना संगम स्नान किए काशी के लिए रवाना हो गए। बुधवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि उनका मन अत्यंत व्यथित है और ऐसे भाव में स्नान करना उन्हें स्वीकार नहीं।
शंकराचार्य ने कहा कि प्रयागराज सदियों से आस्था और शांति की धरती रहा है। वह श्रद्धा भाव से माघ मेले में आए थे, लेकिन जो घटनाक्रम सामने आया, उसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी। उन्होंने कहा कि इस पीड़ा की भरपाई कौन करेगा, यह कहना कठिन है—कौन सा नेता या कौन सी पार्टी इस क्षति को भर पाएगी, यह सवाल बना हुआ है।
उन्होंने बताया कि माघ मेला प्रशासन की ओर से उन्हें पत्र भेजकर सम्मानपूर्वक पालकी से संगम ले जाकर स्नान कराने, पुष्पवर्षा करने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। शंकराचार्य ने कहा कि जब मन में दुख और आक्रोश हो, तब पवित्र जल भी शांति प्रदान नहीं कर पाता।
उल्लेखनीय है कि माघ मेला 15 फरवरी तक प्रस्तावित है और अभी दो प्रमुख स्नान—माघी पूर्णिमा (1 फरवरी) और महाशिवरात्रि (15 फरवरी)—शेष थे। बावजूद इसके, शंकराचार्य ने विवाद के चलते मेला 18 दिन पहले ही छोड़ने का निर्णय लिया। इससे पहले मौनी अमावस्या के दिन प्रशासन से हुए विवाद के बाद वह बिना स्नान लौट गए थे और बसंत पंचमी पर भी उन्होंने स्नान नहीं किया था। अब शेष दोनों स्नानों में भी उनकी सहभागिता नहीं होगी।
प्रशासन ने कहा—फूल बरसाएंगे स्नान कर लीजिए— शंकराचार्य नहीं माने, व्यथित मन के प्रयागराज से हो गए विदा

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