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सुप्रीम कोर्ट ने कन्हैयालाल हत्याकांड के आरोपी जावेद की जमानत बरकरार रखी, हाईकोर्ट का आदेश चुनौती देने से किया इनकार, एनआईए और पीड़ित के बेटे की याचिका खारिज

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कोर्ट ने कहा—19 वर्षीय आरोपी पर मुकदमा लंबा खिंचेगा, निचली अदालत सबूतों पर स्वतंत्र रूप से विचार करे

24 News Update नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उदयपुर के चर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड के आरोपी मोहम्मद जावेद को राजस्थान हाईकोर्ट से मिली जमानत को रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोपी की उम्र अपराध के समय मात्र 19 साल थी और मुकदमा अभी शुरुआती चरण में है, ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। पीड़ित कन्हैयालाल के बेटे यश तेली और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जावेद की जमानत रद्द करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि हाईकोर्ट ने आरोपी के खिलाफ मौजूद अहम सबूतों को नजरअंदाज किया और आरोपी पर हत्या की साजिश रचने में मदद का गंभीर आरोप है।

📌 मामला: सोशल मीडिया पोस्ट के समर्थन पर हत्या
जून 2022 में उदयपुर के टेलर कन्हैयालाल की दुकान पर पैगंबर मोहम्मद पर नूपुर शर्मा के बयान के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट डालने के कारण आरोपियों मोहम्मद रियाज और मोहम्मद गौस ने गला काटकर हत्या कर दी थी। हत्या का वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। जांच में सामने आया कि कई अन्य लोगों ने हमलावरों को सहयोग दिया, जिनमें जावेद पर कन्हैयालाल की गतिविधियों की जानकारी देने का आरोप है।

📌 हाईकोर्ट का फैसला और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
5 सितंबर, 2024 को राजस्थान हाईकोर्ट ने जावेद को यह कहते हुए जमानत दी थी कि उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा कि मुकदमे में कुल 166 गवाह हैं, जिनमें अब तक केवल 8 की गवाही हुई है। सुनवाई लंबी चल सकती है, इसलिए आरोपी को जमानत से वंचित करना उचित नहीं होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट की टिप्पणियों से निचली अदालत प्रभावित न हो और जावेद को दी गई जमानत का मतलब यह नहीं कि उसे किसी अन्य राहत का हकदार माना जाए।

📍 मुख्य बिंदु:
कन्हैयालाल हत्या केस में आरोपी जावेद की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट का हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखने का फैसला।
हत्या के समय आरोपी की उम्र 19 साल; केस में 166 गवाह, लंबी सुनवाई का अनुमान।
एनआईए और पीड़ित पक्ष की याचिका खारिज; अदालत ने निचली अदालत को निष्पक्ष सुनवाई का निर्देश दिया।

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