24 News Update जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल के सर्जिकल विभाग के डॉक्टरों ने एक अद्भुत और जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। डॉक्टरों की टीम ने धौलपुर के एक 68 वर्षीय बुजुर्ग की जांघ से 8 किलो 400 ग्राम की एक विशालकाय गांठ (ट्यूमर) को ऑपरेशन कर बाहर निकाला है। डॉक्टरों का दावा है कि जांघ से निकाली गई यह अब तक की सबसे बड़ी गांठ है, और ऐसा मामला पहले कभी सामने नहीं आया।
30 साल से थी गांठ, डर के मारे नहीं कराया ऑपरेशन
धौलपुर के राजाखेड़ा निवासी 68 वर्षीय रामबाबू जब पहली बार एसएमएस अस्पताल की ओपीडी में आए तो उनकी जांघ पर मौजूद इतनी बड़ी गांठ देखकर अस्पताल स्टाफ भी हैरान रह गया। सर्जिकल डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नरेंद्र शर्मा ने बताया कि उन्होंने मरीज से पूछा कि वे इतने बड़े पैर के साथ जीवन कैसे जी रहे हैं। इस पर मरीज ने बताया कि यह गांठ उन्हें पिछले 30 साल से थी, लेकिन ऑपरेशन के डर से उन्होंने इसे निकलवाया नहीं था। जब परेशानी बहुत ज्यादा बढ़ गई तो उन्होंने धौलपुर और आसपास के इलाकों में डॉक्टरों को दिखाया, जिसके बाद उन्हें एसएमएस हॉस्पिटल जाने की सलाह दी गई।
28 सेंटीमीटर का चीरा, 2 घंटे की सर्जरी
डॉ. नरेंद्र शर्मा ने बताया कि ओपीडी से मरीज को भर्ती करने के बाद उनकी कई तरह की जांचें करवाई गईं। जांचों के बाद ऑपरेशन का निर्णय लिया गया। ऑपरेशन के दौरान मरीज की जांघ पर करीब 28 सेंटीमीटर का लंबा चीरा लगाकर गांठ को अत्यधिक सावधानी से बाहर निकाला गया, ताकि कोई भी महत्वपूर्ण नस प्रभावित न हो। डॉ. शर्मा ने बताया कि इस जटिल ऑपरेशन में डॉक्टरों की टीम को करीब 2 घंटे का समय लगा। ऑपरेशन के बाद मरीज अब स्वस्थ है और खतरे से बाहर है।
सफल ऑपरेशन टीम
यह सफल ऑपरेशन यूनिट हेड डॉ. भूपेन सोनगरा के कुशल निर्देशन में हुआ। ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. नरेंद्र शर्मा, डॉ. राहुल गोस्वामी, डॉ. पीयूष मोरोडिया, डॉ. अभिषेक कुमार और डॉ. देवांग शामिल थे। एनेस्थीसिया और नर्सिंग स्टाफ ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें डॉ. कंचन चौहान, डॉ. सुनील चौहान, डॉ. इंदु वर्मा, डॉ. अजय सैनी और नर्सिंग स्टाफ मनीषा व राकेश का विशेष सहयोग रहा। इस सफल सर्जरी ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है।
जयपुर के SMS हॉस्पिटल में 8.4 किलो की विशालकाय गांठ का सफल ऑपरेशन: 30 साल से थी जांघ में, डॉक्टरों का दावा- देश का पहला ऐसा मामला

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