24 News Update भोपाल। करीब नौ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद मध्य प्रदेश के कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों में छात्र राजनीति फिर सक्रिय होती नजर आ रही है। हाईकोर्ट के सख्त रुख और जबलपुर के छात्र अदनान अंसारी की जनहित याचिका के बाद प्रदेश सरकार ने सितंबर 2026 में छात्रसंघ चुनाव कराने का आश्वासन दिया है। इस घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों के बीच इसका श्रेय लेने की होड़ भी शुरू हो गई है। छात्रसंघ चुनाव को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने इसे विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली बताया है, जबकि कांग्रेस और एनएसयूआई का दावा है कि यह वर्षों के आंदोलन, लगातार उठाई गई मांगों और न्यायालय के हस्तक्षेप का परिणाम है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता और पूर्व एनएसयूआई प्रदेश प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव केवल छात्र प्रतिनिधियों के चयन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र की पहली पाठशाला हैं। उनके अनुसार प्रदेश के कई वरिष्ठ नेताओं, जिनमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, कांग्रेस नेता राजकुमार पटेल और मुकेश नायक शामिल हैं, ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से ही की थी। उनका कहना है कि यदि छात्रसंघ सक्रिय होते तो नीट परीक्षा जैसे विवादों में छात्रों की आवाज अधिक प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुंच सकती थी। विवेक त्रिपाठी ने 2016-17 के आंदोलन का उल्लेख करते हुए बताया कि छात्रसंघ चुनाव बहाल कराने की मांग पर जब तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया से मुलाकात नहीं हो सकी, तब एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस से प्रेरित होकर ‘गेट वेल सून’ अभियान चलाया। मंत्री के पीए के माध्यम से लाखों शुभकामना संदेश भेजे गए, लेकिन मांग पूरी नहीं होने पर मंत्री निवास का घेराव किया गया, जिसके बाद 70 से 80 छात्र नेताओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।भोपाल जिला एनएसयूआई अध्यक्ष अक्षय तोमर का कहना है कि 2016 के छात्रसंघ चुनाव आंदोलन, छात्रवृत्ति की मांग और पुलिस लाठीचार्ज की घटनाओं ने प्रदेश में छात्र नेतृत्व की नई पीढ़ी तैयार की।वहीं एबीवीपी ने हाईकोर्ट के रुख का स्वागत करते हुए सरकार से छात्रसंघ चुनाव जल्द कराने की मांग दोहराई है। एबीवीपी के मध्य भारत प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने सरकार से अकादमिक कैलेंडर का पालन सुनिश्चित करने तथा लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुरूप निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध चुनाव कराने की मांग की है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation ‘सतर्क रहें, सुरक्षित रहें’; विद्यार्थियों को दिया गया साइबर सुरक्षा का संदेश अफसर की बेटी ने ‘लोन’ से ठगे 3.67 करोड़, रोज डायरी में लिखती— “मैं अरबपति बनूंगी”, पिता-बेटी गिरफ्तार