24 News Update उदयपुर, 20 अगस्त। बदलते दौर और नई पीढ़ी के साथ संवाद का तरीका भी बदलना जरूरी है, लेकिन इसके साथ मूल मूल्य और ध्येय से समझौता नहीं होना चाहिए। आज की जेन-जी और जेन-अल्फा डिजिटल तकनीक के बीच पली-बढ़ी पीढ़ियां हैं। उनकी भाषा, सवाल और सामाजिक सोच पिछली पीढ़ियों से अलग है। ऐसे में पीढ़ियों के बीच सार्थक संवाद के लिए एक-दूसरे को समझना और सीखना जरूरी है। यह बात प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार ने उदयपुर में विभिन्न शिक्षण संस्थानों में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रमों में कही।कॉलेज ऑफ कम्युनिटी एंड एप्लाइड साइंस में छात्राओं से संवाद करते हुए नंदकुमार ने कहा कि कोई संगठन यदि केवल पुरानी पीढ़ी की भाषा में बात करता रहेगा तो धीरे-धीरे संग्रहालय जैसा हो सकता है, जबकि मूल दृष्टि छोड़कर केवल नई पीढ़ी की भाषा अपनाने से उसकी पहचान खत्म हो सकती है। इसलिए मूल्य स्थिर रहें, अभिव्यक्ति समयानुकूल हो और ध्येय स्थिर रहते हुए कार्यपद्धति गतिशील होनी चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यपद्धति का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्ति से व्यक्ति संवाद, साथ बैठना, खेलना, सीखना और काम करना संगठन की कार्यशैली का हिस्सा है। इसी सहज संवाद के जरिए डिजिटल दौर की पीढ़ी से जुड़ते हुए भी मूल विचारों को कायम रखा जा सकता है। CTAE में राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर चर्चाकॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग (CTAE) में इंजीनियरिंग विद्यार्थियों से संवाद के दौरान नंदकुमार ने भारत की गौरवशाली परंपरा, वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भागीदारी पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवाओं के हाथों में है। आत्मविश्वास, दृढ़निश्चय, साहस, सामर्थ्य और निर्भीकता जैसे गुण युवाओं के व्यक्तित्व का हिस्सा होने चाहिए।उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग समाज और राष्ट्रहित में करने का आह्वान किया। विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके विभिन्न आनुषंगिक संगठनों से जुड़े सवाल भी पूछे। आरएनटी मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग विद्यार्थियों के युवा संवाद कार्यक्रम में मुख्य वक्ता रमेश शुक्ल ने भारत के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और देश के विकास में युवाओं की भूमिका पर विचार रखे। उन्होंने युवाओं से ‘स्व’ के बोध के साथ सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों को समझने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा अपने पेशे में ईमानदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और सामाजिक एवं राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए जीवन की दिशा तय करें। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। इस दौरान रविन्द्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राहुल जैन, नर्सिंग कॉलेज के प्राचार्य सहित शिक्षक मौजूद रहे। अरावली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज में प्रांत महाविद्यालय विद्यार्थी कार्य प्रमुख डॉ. विनोद यादव ने विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि सशक्त, जागरूक और संस्कारित युवा देश की सबसे बड़ी पूंजी हैं। युवाओं को इतिहास के साथ वर्तमान भारत की उपलब्धियों और वैश्विक स्तर पर बढ़ती भूमिका को भी समझना चाहिए।उन्होंने निर्भीकता, समर्पण और दृढ़निश्चय जैसे गुणों को युवाओं के व्यक्तित्व के लिए जरूरी बताते हुए चुनौतियों का साहस और आत्मविश्वास से सामना करने की बात कही। कार्यक्रम में संघ के विभिन्न आनुषंगिक संगठनों की शिक्षा, सेवा, सामाजिक जागरूकता, स्वावलंबन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी भी दी गई।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह धाकड़ रहे। उन्होंने युवाओं से शिक्षा के साथ संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation उज्ज्वल राजस्थान 3.0 में दिखी विकसित उदयपुर की तस्वीर, तीन दिवसीय प्रदर्शनी का भव्य शुभारंभ सीबीएसई वेस्ट जोन शतरंज में सेंट एंथोनी स्कूल का दबदबा