24 News Update सागवाड़ा, 20 अगस्त (जयदीप जोशी)। नगर के आसपुर मार्ग लोहारिया तालाब के सामने स्थित कान्हददास धाम रामद्वारा में शाहपुरा धाम के रामस्नेही संत कीर्तिराम महाराज ने सत्संग में बताया कि काल जीवन की वह अदृश्य धारा है जो निरंतर प्रवाहित रहती है। धन, वैभव और खोई हुई वस्तुएं पुनः प्राप्त की जा सकती हैं, किंतु व्यतीत हुआ क्षण संपूर्ण संसार का वैभव देकर भी वापस नहीं खरीदा जा सकता। इसलिए समय का सम्मान करना वस्तुतः अपने जीवन का सम्मान करना है। जो मनुष्य वर्तमान क्षण को प्रमाद में खो देता है, वह भविष्य की अनेक संभावनाओं से स्वयं को वंचित कर देता है। संत ने कहा कि महापुरुषों ने कभी अनुकूल परिस्थितियों की प्रतीक्षा को जीवन का आधार नहीं बनाया। उन्होंने प्रतिकूलताओं के मध्य भी अपने पुरुषार्थ का दीप प्रज्वलित रखा। परिस्थितियां मनुष्य की परीक्षा ले सकती हैं, किंतु उसका अंतर्बल तभी पराजित होता है, जब वह स्वयं पर विश्वास खो देता है। जिसके भीतर ध्येय की स्पष्टता और संकल्प की दृढ़ता है, उसके लिए विपत्ति भी आत्मविकास की भूमि बन जाती है।दृढ़ संकल्प केवल मन की कठोरता नहीं, वरन् आत्मशक्ति का जागरण है। जब मनुष्य अपने अंतरतम में यह निश्चय प्रतिष्ठित करता है कि वह सत्य, श्रेय और ध्येय के पथ से विचलित नहीं होगा, तब उसके भीतर अद्भुत धैर्य का उदय होता है। संशय की धुंध छंटती है, भय का क्षय होता है और चेतना में वह तेज प्रकट होता है, जो असंभव प्रतीत होने वाले मार्गों को भी साध्य बना देता है।जीवन में कोई भी महान फल एकाएक नहीं पकता। उसके पीछे अनगिनत अदृश्य प्रयत्न, त्याग, संयम, असफलताओं से प्राप्त शिक्षाएं और पुनः उठ खड़े होने का साहस निहित रहता है। पर्वत की ऊंचाई एक ही चरण से नहीं मापी जाती; उसी प्रकार जीवन की सिद्धि भी एक ही प्रयत्न से प्राप्त नहीं होती। प्रत्येक सजग क्षण लक्ष्य की ओर उठाया गया एक चरण है।संत ने बताया कि संयोग की प्रतीक्षा मत करो, अपने कर्तव्य को पहचानो। परिस्थितियों को दोष मत दो, अपने अंतर्बल को जाग्रत करो। बीते हुए समय का शोक मत करो, शेष जीवन को सार्थक बनाने का संकल्प करो। क्योंकि जीवन की वास्तविक विजय वहां आरंभ होती है, जहां मनुष्य बाह्य आश्रयों से ऊपर उठकर अपने विवेक, आत्मबल और पुरुषार्थ को अपना सहारा बना लेता है।शुभ संकल्प से विचार पवित्र होता है, पवित्र विचार से कर्म निर्मित होता है, श्रेष्ठ कर्म से चरित्र का निर्माण होता है और चरित्र से जीवन की दिशा निर्धारित होती है। यही कारण है कि जीवन-निर्माण का प्रथम चरण बाह्य साधनों का संग्रह नहीं, अंतःकरण का परिष्कार है।संत प्रसाद अशोक भट्ट परिवार का रहा। सत्संग में प्रवक्ता बलदेव सोमपुरा, देवीलाल सोनी, पूजा परमार, सुरेंद्र शर्मा, राजेश्वरी शर्मा, संगीता सोनी, प्रेमलता सुथार सहित कई महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation विद्यालय में छात्र संसद का शपथ ग्रहण समारोह, अध्यक्ष बने नमन पंचाल विद्यालय में नशामुक्त भारत अभियान एवं मिशन स्पंदन, विकसित भारत की ओर एक सशक्त कदम