24 News Update जयपुर. राजस्थान सरकार ने ऊंटपालकों के लिए नए नियमों की घोषणा की है। अब राज्य से ऊंटों को चराई, डेयरी, कृषि कार्य और पशु मेलों में भाग लेने के लिए अन्य राज्यों में ले जाना आसान होगा। इसके लिए पशुपालन एवं गोपालन मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने संबंधित नियमों की स्वीकृति दे दी है।
मंत्री कुमावत ने बताया कि राजस्थान ऊंट (वध का प्रतिषेध और अस्थायी प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) अधिनियम, 2015 के तहत अब ऊंटों को राज्य से बाहर ले जाने की प्रक्रिया और अधिक सुव्यवस्थित होगी। इसके लिए ऊंटपालक निर्धारित प्रपत्र भरकर कलेक्टर, एसडीओ या राज्य स्तरीय मेला के मेला प्रभारी अधिकारी से विशेष परमिट प्राप्त कर सकेंगे।
नए नियमों की प्रमुख बातें:
ऊंट को चराई, डेयरी, कृषि कार्य और पशु मेलों में भाग लेने के लिए राज्य से बाहर ले जाने के लिए विशेष परमिट जारी किया जा सकेगा।
उपखण्ड अधिकारी (एसडीओ) और मेला प्रभारी अधिकारी को भी यह अधिकार दिया गया है।
ऊंट का अस्थायी प्रव्रजन या निर्यात करने के लिए राज्य सरकार से परमिशन अनिवार्य होगी।
मेलों के दौरान ऊंटों को राज्य से बाहर भेजने के लिए सशर्त परमिट जारी किया जा सकेगा।
निर्यात में यह ध्यान रखा जाएगा कि स्थानीय क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकता से ऊंटों की संख्या कम न हो।
ऊंट का वध करने पर होगी सख्त कार्रवाई:
मत्री कुमावत ने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने पर कड़े प्रावधान लागू होंगे। अधिनियम के तहत ऊंट का वध करने या उसे वध के प्रयोजन के लिए राज्य से बाहर ले जाने पर 5 साल तक का कारावास और 20 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि यह कदम ऊंटपालकों को राहत देने के साथ-साथ राज्य में ऊंटों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
ऊंट का वध करने पर राजस्थान में अब 5 साल तक कारावास, 20 हजार तक का जुर्माना

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