24 News Update उदयपुर। बेटियों के प्रति समाज में अब पिछले कई वर्षो से मध्यकालीन सोच में बदलाव नजर आ रहा हैं। बेटे को कुल का दीपक समझ कर अधिक महत्व देने वाली सोच अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है। बेटियों को भी अब उतना ही महत्व दिया जाने लगा, जितना बेटों को दिया जाता था। उदयपुर में श्रीमाली समाज के श्री संस्कार भवन में आयोजित ढूढोत्सव कार्यक्रम में बेटियों को भी बेटों के साथ बिठा कर ढूंढा गया। दो-तीन दशक पूर्व की बात करें तो सिर्फ बेटे का जन्म होने के बाद पहली होली पर परिवार ढूंढोत्सव मनाता था। पिछले कुछ वर्षो धीरे-धीरे बदलाव होने लगे।श्रीमाली नवयुवक सेवा संस्थान द्वारा संस्कार भवन में आयोजित सामूहिक रूप से 15 बच्चों का ढूंढोत्सव आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में 8 बच्चें और 7 बच्चियों को ढूंढा गया। बूआ की गोद में बच्चें और बच्चियों को बिठाया गया और फिर लकडियां बजाई गई। माना जाता हैं कि नवजात शिशुओं की सुख-समृद्धि और निडरता के लिए यह परंपरा किया जाता है। समाज के सामूहिक ढूंढोत्सव कार्यक्रम में परिवार और समाज के सैकड़ों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। संस्थान के अध्यक्ष प्रकाश श्रीमाली ने इस अवसर पर ढूंढोत्सव की परंपरा और इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे सामूहिक आयोजन समाज को एकजुट करने और कम खर्च में पारंपरिक संस्कार निभाने में सहायक होते हैं। उन्होंने बताया कि ढूंढोत्सव बच्चों के स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और निर्भीकता के लिए किया जाता है, ताकि वे निडर होकर समाज में आगे बढ़ सकें।लकड़ियां बजाते हुए समाज के लोग ढूंढ के अवसर पर विशेष गीत हरिया बाग रे हरिया बाग…वागा जा रे बागा जा..गाते गए। संस्थान के पंकज लटावत ने इस आयोजन की सफलता के लिए सभी कार्यकर्ताओं और उपस्थित जनसमूह का धन्यवाद किया और कहा कि इस प्रकार के आयोजन भविष्य में भी आयोजित किए जाएंगे।इस दौरान वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेंद्र दशोत्तर, भगवती लाल दशोत्तर, ललित दुर्गावत, उमेश श्रीमाली, कार्यक्रम संयोजक हेमेंद्र जगनावत, संरक्षक शांतिलाल ओझा और दिनेश लटावत, श्रीमाली युवा संगठन के प्रफुल्ल श्रीमाली मौजूद रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation रातभर खेली बारूद की होली: तोप-बंदूकें गरजीं, तलवारों की झंकार गूंजी; 451 साल पुरानी जीत की याद में मेनार में सजी शौर्य की रात डॉक्टर सक्का विश्व के 195 देशों को भेंट करेंगे 195 मिनट में बनाए गए 195 चांदी के तिरंगे झंडे रचे एक साथ 195 विश्व रिकॉर्ड