24 News Update उदयपुर। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में एक बात तो साबित हो गई है कि चाहे जो वीसी हो, चाहे जिसकी सरकार हो, चाहे जिसका प्रभाव हो, चाहे जिसकी चलती हो। एसएफएबी कर्मचारियों के साथ किसी ना किसी बहाने से चक्की पिसिंग एटीट्यूड से बाज नहीं आते। सबको लगता है कि इन अस्थायी कर्मचारियों से जमकर काम लो। ऐसा टाइम टेबल रखो कि जिसमें लंच तक का ब्रेक मत दो, जैसे कि ये सारे कर्मचारी तो मानों पत्थर के बने हैं, संवेदनाएं तो कब की मर चुकी हैं। दूसरी तरफ स्थायी कर्मचारियों को गरमी लगती है, पसीना भी आता है तो उनका टाइम स्लॉट थोड़ा सा ईजी वाला रखो, उनका खयाल रखना ज्यादा जरूरी है। जबकि जग जाहिर है कि काम एसएफएबी वाले ज्यादा कर रहे हैं। डेडिकेशन के मामले में ये रीढ़ की हड्डी है सुविवि की। मगर प्रशासन हमेशा अंधा होता है, उसके आंख नाक और कान वे लोग होते हैं जो हमेशा अपना मतलब साधते हैं। इस बार भी यही दिख् रहा है।
गर्मी के मद्देनजर विश्वविद्यालय कार्यालयों के समय में बदलाव करते हुए सुविवि प्रशासन ने नियमित कर्मचारियों और एसएफएबी के तहत कार्यरत सर्विस कंसल्टेंट्स के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी दो अलग आदेशों के बाद कर्मचारियों के बीच नई व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
कुलसचिव कार्यालय द्वारा 6 मई 2026 को जारी आदेश के अनुसार विभिन्न संघटक महाविद्यालयों, इकाइयों, कार्यालयों एवं विभागों में एसएफएबी के तहत लगाए गए सभी सर्विस कंसल्टेंट्स का कार्यालय समय 1 मई 2026 से 15 जून 2026 तक सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक निर्धारित किया गया है। यह समय बिना लंच ब्रेक के रहेगा। आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रत्येक इकाई में एक नियमित कर्मचारी की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों। याने चक्की पिसिंग वाला टाइमिंग।
इसके पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने 18 अप्रैल 2026 को नियमित विश्वविद्यालय कार्यालयों के लिए अलग आदेश जारी किया था। इस आदेश के अनुसार 1 मई से 15 जून 2026 तक विश्वविद्यालय के सभी कार्यालय सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक संचालित किए जाएंगे। यह समय भी बिना लंच ब्रेक के रहेगा। याने नियमित का समय कम और बाकी का ज्यादा।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी कर्मचारियों को निर्धारित समय का कड़ाई से पालन करना होगा। आवश्यकता पड़ने पर कर्मचारियों को दोपहर 1 बजे के बाद भी कार्य के लिए उपलब्ध रहना होगा तथा विश्वविद्यालय कार्य किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होना चाहिए।
इन आदेशों के बाद विश्वविद्यालय में यह चर्चा है कि एसएफएबी कर्मियों का समय नियमित कर्मचारियों की तुलना में अधिक काहे को रखा गया है। जबकि तनख्वाह उनकी ज्यादा है, परिलाभ उनके ज्यादा है। दूसरी तरफ एसएफएबी कर्मचारियों की तो नौकरी तक पर हमेशा तलवार लटकी रहती है। सवाल ये भी है कि क्या प्रशासन इस फर्क को समझेगा, वैसे उम्मीद तो बहुत कम है।


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