Site icon 24 News Update

मैग्नस हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप : बार एसोसिएशन ने की डॉ. शिल्पा गोयल एवं डॉ. मनोज अग्रवाल के पंजीयन को रद्द करने की मांग

Advertisements

24 News Update उदयपुर। शहर में चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़ा एक संवेदनशील मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। अधिवक्ता योगेश जोशी के नवजात पुत्र की आंखों की रोशनी जाने के प्रकरण को लेकर बार एसोसिएशन उदयपुर खुलकर सामने आ गया है। मंगलवार को अधिवक्ताओं ने जिला कलेक्टर एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए मैग्नस हॉस्पिटल के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। मामले ने न केवल विधि समुदाय बल्कि आमजन में भी आक्रोश पैदा कर दिया है।

बार एसोसिएशन के महासचिव लोकेश गुर्जर ने बताया कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, उदयपुर की ओर से नोटिस क्रमांक 1786 दिनांक 16 मार्च 2026 को अस्पताल को जारी कर गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही के मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन निर्धारित समय के बावजूद अस्पताल प्रशासन द्वारा संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इस चुप्पी ने पूरे मामले को और अधिक संदेहास्पद बना दिया है।
ज्ञापन के अनुसार, अधिवक्ता योगेश जोशी के नवजात पुत्र के उपचार के दौरान अस्पताल में घोर चिकित्सकीय लापरवाही बरती गई, जिसके परिणामस्वरूप बच्चे की आंखों की रोशनी स्थायी रूप से चली गई। बार एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि उपचार में आवश्यक चिकित्सकीय मानकों का पालन नहीं किया गया, समय पर उचित इलाज नहीं दिया गया और स्थिति बिगड़ने के बावजूद आवश्यक विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध नहीं कराया गया। इतना ही नहीं, मामले में अस्पताल प्रशासन द्वारा रिकॉर्ड और दस्तावेजों में फेरबदल किए जाने के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिससे पूरे प्रकरण की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

पुलिस जांच में कई तथ्यों की हुई पुष्टि
इस मामले को लेकर सुखेर थाना में एफआईआर क्रमांक 0483 दिनांक 5 सितंबर 2024 को दर्ज की जा चुकी है तथा पुलिस द्वारा जांच के बाद चालान न्यायालय में पेश किया जा चुका है। प्रकरण वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। बार एसोसिएशन का कहना है कि पुलिस जांच में भी कई तथ्यों की पुष्टि होना सामने आया है, जो आरोपों को और गंभीर बनाता है।

लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त या निलंबित किया जाए
बार एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट रूप से आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही की कमी का उदाहरण है। आरोपों में प्रमुख रूप से—उपचार में गंभीर लापरवाही, समय पर सही चिकित्सा न देना, आवश्यक विशेषज्ञ सुविधा उपलब्ध न कराना, रिकॉर्ड में कथित हेरफेर, नोटिस का संतोषजनक जवाब न देना और मरीज की स्थिति को लेकर पारदर्शिता न बरतना शामिल हैं।
सभी तथ्यों को आधार बनाते हुए बार एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की है कि मैग्नस हॉस्पिटल का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त या निलंबित किया जाए तथा संबंधित चिकित्सकों डॉ. शिल्पा गोयल एवं डॉ. मनोज अग्रवाल के पंजीयन को रद्द करने हेतु सक्षम प्राधिकरण को निर्देशित किया जाए। साथ ही दोषियों के विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई करते हुए भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र विकसित करने की भी मांग की गई है।

इनकी रही मौजूदगी
ज्ञापन सौंपने के दौरान बार एसोसिएशन उदयपुर के अध्यक्ष जितेंद्र जैन, उपाध्यक्ष महेंद्र मेनारिया, महासचिव लोकेश गुर्जर, सचिव आशीष कुमार कोठारी, वित्त सचिव धर्मेंद्र सोनी, पुस्तकालय सचिव विनोद ओदीच्य सहित अधिवक्ता योगेश जोशी, देवी लाल जाट, अजय आचार्य, अनिल धाभाई, वैभव जैन, गजेन्द्र वैष्णव, दिलीप सिंह, धीरज माली, चंद्रवीर सिंह देवड़ा एवं रौनक पुरोहित सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस गंभीर मामले में शीघ्र और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे।

Exit mobile version