24 न्यूज अपडेट, चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींडसा का बुधवार शाम मोहाली के एक अस्पताल में निधन हो गया। वे 89 वर्ष के थे और पिछले लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। शाम करीब 5 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार 30 मई को किया जाएगा, जब तक उनकी बेटी विदेश से भारत लौट आएंगी। ढींडसा पंजाब की राजनीति के एक प्रमुख और प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। वर्ष 2000 से 2004 तक वे केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रसायन एवं उर्वरक और खेल मंत्री रहे। इसके अलावा वे कई बार राज्यसभा और विधानसभा सदस्य भी रह चुके हैं। साल 2019 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था, लेकिन दिसंबर 2020 में उन्होंने कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए यह सम्मान लौटा दिया था। यह निर्णय उस समय देशभर में चर्चा का विषय बना था।
धार्मिक विवाद में भी आए थे चर्चा में
पिछले वर्ष ढींडसा को श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा धार्मिक सजा सुनाई गई थी। इसके तहत उन्होंने गुरुद्वारा फतेहगढ़ साहिब में व्हीलचेयर पर बैठकर प्रतीकात्मक रूप से गेट पर पहरेदारी की थी। इस घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुई थीं।
उनका जन्म 9 अप्रैल 1936, गांव उभवाल, जिला संगरूर (पंजाब), शिक्षाः स्नातक गवर्नमेंट रणबीर कॉलेज, संगरूर से की। 4 बार विधायकः 1972, 1977, 1980, 1985 रहे। मंत्री पदः परिवहन, खेल, पर्यटन, सांस्कृतिक मामले, नागरिक उड्डयन उनके पास रहा। राज्यसभा सदस्यः 1998-2004, 2010-2022 में रहे। लोकसभा सदस्यः 2004-2009 (संगरूर सीट) से रहे।
अलग पार्टी बनाई, फिर हुआ विलय
सुखबीर बादल की कार्यशैली से असंतुष्ट होकर ढींडसा ने शिरोमणि अकाली दल छोड़ दी थी। उन्होंने 2021 में शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) का गठन किया, जिसे बाद में मार्च 2024 में पुनः शिरोमणि अकाली दल में विलय कर दिया गया। इस दौरान उन्होंने भाजपा से गठबंधन भी किया था। उनके पुत्र परमिंदर सिंह ढींडसा पंजाब सरकार में वित्त मंत्री रह चुके हैं और पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
अकाली दल के वरिष्ठ नेता सुखदेव सिंह ढींडसा का 89 वर्ष की उम्र में निधन, लंबे समय से चल रहे थे बीमार

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