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उदयपुर में स्कूली वाहन चालकों का विरोध तेज: मनमाने चालानों के खिलाफ चार यूनियनें एकजुट, 31 दिसंबर तक राहत अवधि की मांग

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24 News Update उदयपुर। शहर में स्कूली वाहनों पर हो रही कड़ी कार्रवाई को लेकर सोमवार को ऑटो व वेन चालकों में भारी नाराज़गी देखने को मिली। चार प्रमुख यूनियनों—इंडियन ऑटो रिक्शा चालक श्रमिक यूनियन, एकता ऑटो यूनियन, लेकसिटी ऑटो चालक यूनियन और बाल वाहिनी संघर्ष समिति—ने संयुक्त रूप से जिला पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर कहा कि यातायात विभाग मनमाने तरीके से चालान कर रहा है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका संकट में पड़ गई है।

“संख्या से कम बच्चों पर भी चालान”—चालकों का आरोप
यूनियनों का कहना है कि अब तक ऑटो में 8 और वेन में 10–12 बच्चों को बैठाने की व्यवस्था थी, लेकिन हाल के दिनों में निर्धारित संख्या से कम बच्चों को ले जाने पर भी चालान किए जा रहे हैं। चालकों के अनुसार, नियमों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं, जबकि कार्रवाई लगातार बढ़ती जा रही है।

“सालाना टैक्स भी भरते हैं, फिर भी कार्रवाई”—यूनियनों की आपत्ति
चालकों ने बताया कि शहर के 30 से 90 प्रतिशत स्कूली वाहन एस.आर.टी. टैक्स जमा करते हैं, जो सालाना 10 से 15 हजार रुपए तक होता है। इस टैक्स के तहत वाहन की छत पर स्टैंड लगाने की अनुमति भी मिलती है, फिर भी समान वाहनों पर चालान काटे जा रहे हैं। यूनियनों ने इसे वाहन मालिकों के साथ अन्याय करार दिया।

31 दिसंबर तक मोहलत और चालानों पर रोक की मांग
ज्ञापन में मांग की गई है कि स्कूली वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र और पीली पट्टी लगाने जैसी अनिवार्य शर्तों को पूरा करने के लिए चालकों को 31 दिसंबर 2025 तक की राहत अवधि दी जाए। उनका कहना है कि अचानक लागू की गई शर्तों से आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, जिसे पूरा करने के लिए समय जरूरी है।

अभिभावकों से किराया तय करने की अपील का सुझाव
यूनियनों ने प्रशासन को सुझाव दिया कि यदि प्रति सीट बच्चों की संख्या तय की जाती है, तो समान अनुपात में अभिभावकों को भी किराया बढ़ाने के लिए जागरूक किया जाए—वेन के लिए न्यूनतम 2000 रुपए और ऑटो के लिए 1500 रुपए प्रति बच्चा। इससे दूरी और खर्च के अनुसार वाहन मालिकों को संतुलन मिल सकेगा। प्रदर्शनकारी चालकों ने मांग की कि जब तक नए नियम स्पष्ट रूप से लागू नहीं हो जाते, तब तक यातायात पुलिस और परिवहन विभाग चालान कार्रवाई पर रोक लगाए, ताकि गरीब वाहन चालक अपनी रोज़मर्रा की जरूरतें पूरी कर सकें।

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