— दरीबा में मिलेट उत्पादन इकाई शुरू, ले मार्शे से साझेदारी के बाद दिल्ली के तीन स्टोर तक पहुंचे महिला उद्यमियों के उत्पाद उदयपुर, 24 अक्टूबर। पति के निधन के बाद दो बच्चों की परवरिश और परिवार का खर्च चलाने के लिए मौसमी खेती व अस्थायी मजदूरी पर निर्भर रहने वाली मंजू देवी अब हर महीने करीब 8 हजार रुपए की नियमित आय अर्जित कर रही हैं। हिंदुस्तान जिंक की सखी पहल से जुड़ने के बाद उनके काम का स्वरूप बदल गया है। अब वे आधुनिक प्रोसेसिंग मशीनें चलाती हैं और आसपास की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं।मंजू देवी की यह यात्रा ग्रामीण महिलाओं को आजीविका से जोड़ने वाली सखी माइक्रोएंटरप्राइज पहल में आए बदलाव की तस्वीर पेश करती है। वेदांता समूह की कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की इस पहल से वर्तमान में 426 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। कंपनी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इन महिलाओं की सामूहिक आय वित्त वर्ष 2026 में 23 लाख रुपए से बढ़कर 32.84 लाख रुपए हो गई। पिछले वर्ष की तुलना में इसमें 43 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। स्थानीय हुनर से तैयार हो रहे उत्पाद, बाजार का दायरा बढ़ासखी माइक्रोएंटरप्राइज के तहत महिलाओं को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उनके तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने पर भी काम किया जा रहा है। इसके दो प्रमुख ब्रांड ‘दायची’ और ‘उपाया’ हैं। दायची के तहत अचार, शहद, मसाले, दालें, नमकीन, तेल और घी जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जबकि उपाया परिधान उत्पादों पर केंद्रित है। राजस्थान और उत्तराखंड में संचालित 14 उत्पादन इकाइयों के माध्यम से महिलाएं पारंपरिक खाद्य सामग्री के साथ क्रोशिया उत्पाद, मूंगफली का तेल और मिलेट यानी मोटे अनाज से बने उत्पाद भी तैयार कर रही हैं। इस विविधता से स्थानीय कौशल को व्यावसायिक गतिविधियों में बदलने और महिलाओं के लिए कमाई के नए अवसर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में दरीबा में नई मिलेट उत्पादन इकाई स्थापित की गई है। इससे महिलाओं को मिलेट आधारित मूल्य संवर्धित खाद्य उत्पाद बनाने का अवसर मिलेगा। इकाई का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ पारंपरिक अनाजों के उपयोग को भी प्रोत्साहित करना है।दिल्ली के स्टोर और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक पहुंचसखी के उत्पादों को बड़े उपभोक्ता बाजार तक पहुंचाने के लिए ले मार्शे के साथ साझेदारी की गई है। इसके तहत अब सखी के उत्पाद दिल्ली के तीन स्टोर में उपलब्ध हैं। इसके अलावा ब्लिंकिट, अमेजन, फ्लिपकार्ट और ओएनडीसी के माध्यम से भी इनकी बिक्री की जा रही है। सखी का अपना ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘हार्ट्स विद फिंगर्स’ भी उत्पादों की ऑनलाइन पहुंच बढ़ाने का माध्यम है। इस व्यवस्था से महिला उद्यमियों को स्थानीय बाजारों से आगे निकलकर व्यापक ग्राहक वर्ग तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है। उत्पादन इकाइयों का विस्तार, नए उत्पादों का निर्माण और बिक्री के नए माध्यम इस पहल के प्रमुख हिस्से हैं। हिंदुस्तान जिंक के अनुसार, सखी माइक्रोएंटरप्राइज का उद्देश्य स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक हुनर और महिलाओं की उद्यमशीलता को स्थायी आजीविका से जोड़ना है। कंपनी शिक्षा, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सतत आजीविका के क्षेत्रों में भी सामाजिक विकास कार्यक्रम संचालित करती है। कंपनी का दावा है कि इन कार्यक्रमों के जरिए 4,100 से अधिक गांवों में पहुंच बनाते हुए 26 लाख से अधिक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया जा रहा है। यह प्रयास वर्ष 2030 के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation फतहसागर की पाल पर नशामुक्ति का संकल्प, एनएसजी आईजी अमित पाठक सहित देशभर के सुरक्षा बलों के राइडर्स गुजरात रवाना गर्डर लॉन्चिंग के चलते 26 अक्टूबर को दो ट्रेनें प्रभावित, उदयपुर-मैसूरू एक्सप्रेस बदले रास्ते से चलेगी