24 News update National desk. 14 मार्च 2025 को आगरा में होली का दिन था। रविंद्र कुमार, फिरोजाबाद ऑर्डनेंस फैक्ट्री में चार्जमैन, अपनी पत्नी आरती और दोनों बच्चों के साथ रंगों में सराबोर होकर खेल रहे थे। बिंदू कटरा मोहल्ले के उनके साधारण से घर में हंसी-खुशी का माहौल था। 15 साल से फैक्ट्री में स्टॉक, स्टोर और रोजाना उत्पादन की देखरेख करने वाले रविंद्र ने उस शाम काम की तैयारी शुरू की। लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह आम सी शाम उनकी जिंदगी को उलट-पुलट कर रख देगी।
शाम ढलते ही दरवाजे पर दस्तक हुई। आरती ने दरवाजा खोला, यह सोचकर कि होली की शुभकामनाएं देने कोई पड़ोसी आया होगा। मगर वहां कुछ सख्त चेहरों वाले लोग खड़े थे। उन्होंने रविंद्र का फोन मांगा। आरती का दिल बैठ गया, उसने पति की ओर देखा जो चुपचाप खड़ा था। “कुछ गड़बड़ है,” उसने मन में सोचा। उन लोगों ने रविंद्र के फोन की तलाशी ली, कुछ सवाल पूछे और फिर उसे अपने साथ चलने को कहा। आरती ने घबराते हुए पूछा, “इन्हें कहां ले जा रहे हैं?” जवाब मिला, “फोन चेक करना है, जल्दी लौटा देंगे।” मगर वह “जल्दी” रात भर के इंतजार में बदल गया। रविंद्र वापस नहीं आया।
सुबह होते ही सच सामने आया। रविंद्र को ले जाने वाले उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) के अधिकारी थे। वह कोई छोटी-मोटी गलतफहमी का शिकार नहीं था—उस पर जासूसी का गंभीर आरोप था। ATS ने खुलासा किया कि रविंद्र पाकिस्तान के हनीट्रैप जाल में फंस गया था और उसने भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान से जुड़े गोपनीय दस्तावेज, ड्रोन निर्माण और फैक्ट्री के संवेदनशील विवरण लीक कर दिए थे। जो शख्स कभी गर्व से अपने काम की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालता था, वह अब ISI के खतरनाक खेल का मोहरा बन चुका था।
जाल की शुरुआत: जून 2024 में एक फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट
यह कहानी नौ महीने पहले, जून 2024 में शुरू हुई थी—एक साधारण फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट से। रविंद्र सोशल मीडिया पर सक्रिय था और अक्सर फिरोजाबाद ऑर्डनेंस फैक्ट्री की झलकियां शेयर करता था—मशीनों की तस्वीरें, सहकर्मियों के साथ पल, और अपने काम पर गर्व। जांचकर्ताओं का मानना है कि ऐसी ही एक पोस्ट ने ISI के नजर में उसे ला दिया।
रिक्वेस्ट “नेहा शर्मा” नाम के प्रोफाइल से आई थी। उसकी बायो में लिखा था: ISRO की टेक्निकल ऑफिसर। सैन्य उत्पादन की दुनिया में डूबे रविंद्र के लिए ISRO से जुड़े किसी से बात करना एक सुनहरा मौका जैसा लगा होगा। उसने रिक्वेस्ट स्वीकार की, और जल्द ही बातचीत फेसबुक मैसेंजर से वॉट्सऐप पर पहुंच गई। शुरुआत में साधारण बातें हुईं—शायद काम या टेक्नोलॉजी पर चर्चा—फिर रोजाना कॉल शुरू हुईं और बाद में वीडियो कॉल।
रविंद्र ने इस “दोस्ती” को आरती और परिवार से छिपाया। अपने फोन में उसने नेहा का नंबर “चंदन कुमार, स्टोरकीपर” के नाम से सेव किया। मगर नेहा कोई ISRO अधिकारी नहीं थी। वह ISI की एजेंट थी, जो रविंद्र जैसे लोगों को फंसाने के लिए तैयार किए गए हनीट्रैप नेटवर्क का हिस्सा थी—ऐसे लोग जिनके पास गोपनीय जानकारी तक पहुंच हो और शायद चापलूसी या लालच में फंसने की कमजोरी।
जाल और गहरा हुआ: पैसे के बदले रहस्य
नेहा ने अपना खेल बड़ी चालاکی से खेला। उसने पहले रविंद्र से फैक्ट्री में उसकी ड्यूटी और कामकाज के बारे में साधारण सवाल पूछे। धीरे-धीरे जब भरोसा बढ़ा, तो उसकी मांगें भी बढ़ीं। उसने फैक्ट्री की डेली प्रोडक्शन रिपोर्ट (DPR), ड्रोन निर्माण की जानकारी और सबसे खतरनाक—गगनयान प्रोजेक्ट से जुड़े गोपनीय दस्तावेज मांगे। रविंद्र, चाहे पैसे के वादे से ललचाया हो या भावनात्मक दबाव में आया हो, मान गया।
महीनों तक उसने वॉट्सऐप के जरिए संवेदनशील फाइलें भेजीं—ऐसी जानकारी जो राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल सकती थी। ATS को बाद में पता चला कि 2024 में रविंद्र के बैंक खाते में तीन बार अज्ञात स्रोतों से पैसे आए, हालांकि रकम का खुलासा नहीं हुआ। हर लेन-देन उसे इस जाल में और गहरे धकेलता गया। उसके साथ एक सहकर्मी भी था—जो अब हिरासत में है—जिसने कथित तौर पर इस गद्दारी में हिस्सेदारी की।
नेहा के हैंडलर, जो पाकिस्तान से ऑपरेट कर रहे थे, के लिए यह बड़ी कामयाबी थी। गगनयान प्रोजेक्ट, जो 2025 के अंत या 2026 की शुरुआत में लॉन्च होने वाला है, भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है। इसमें चार अंतरिक्ष यात्रियों को निचली पृथ्वी कक्षा में भेजा जाएगा। फिरोजाबाद फैक्ट्री, जहां रविंद्र काम करता था, उनके सुरक्षित लौटने के लिए 15 खास पैराशूट बना रही थी—एक ऐसी तकनीक जो गोपनीय थी। इन विवरणों को लीक करके रविंद्र ने ISI को भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं की झलक दे दी।
जाल बंद हुआ: ATS की नजर
रविंद्र को नहीं पता था कि ATS उसकी हर हरकत पर नजर रख रही थी। 2019 से ही एजेंसी ने ISI के हनीट्रैप नेटवर्क से जुड़े 150 से ज्यादा फेसबुक अकाउंट्स की पहचान की थी—खूबसूरत महिलाओं की तस्वीरों वाले फर्जी प्रोफाइल, जो रविंद्र जैसे लोगों को फंसाने के लिए बनाए गए थे। नेहा का अकाउंट सबसे सक्रिय में से एक था। ATS ने रविंद्र की चैट्स, उनकी आवृत्ति और उसके खाते में संदिग्ध जमा राशि पर नजर रखी। 12 मार्च 2025 को पहली पूछताछ की कोशिश हुई, मगर 14 मार्च को—होली के बाद—उन्होंने उसे गिरफ्तार कर लिया।
उस शाम ATS ने रविंद्र के घर की तलाशी ली। उन्हें उसका फोन, 6,220 रुपये नकद, आधार कार्ड और डेबिट कार्ड मिले। परिवार सन्नाटे में डूब गया, उनका दावा है कि रविंद्र पर झूठा इल्जाम लगाया गया। मगर सबूत—चैट लॉग, बैंक रिकॉर्ड और लीक दस्तावेज—एक भयानक कहानी बयान करते हैं।
रविंद्र पर अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 148 (देश के खिलाफ साजिश) और ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट की कई धाराओं में केस दर्ज है। दोषी पाए जाने पर उसे 14 साल तक की जेल हो सकती है, या उससे भी ज्यादा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसने कितना नुकसान पहुंचाया।
पर्दे के पीछे: ISI का हनीट्रैप साम्राज्य
यह कोई इकलौता मामला नहीं था। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि ISI का हनीट्रैप मॉड्यूल सालों से सक्रिय है और बेहद सटीकता से काम करता है। इस्लामाबाद, लाहौर, रावलपिंडी और कराची में बने कॉल सेंटरों से एजेंट—जिनमें कई को फातिमा जिन्ना विमेन यूनिवर्सिटी में ट्रेनिंग दी गई—AI टूल्स और वॉयस मॉड्यूलेटर का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छिपाते हैं। 2022 में शुरू हुए “प्रोजेक्ट लायनेस” के तहत, 3,500 करोड़ रुपये के बजट से ISI ने 300 महिलाओं को भर्ती किया ताकि वे भारतीय अधिकारियों से खुफिया जानकारी निकाल सकें।
रविंद्र का मामला इसका नमूना है। उसकी फैक्ट्री पोस्ट्स ने उसे निशाना बनाया; नेहा के आकर्षण ने उसे जाल में फंसा लिया। ATS को डर है कि उसके जैसे और भी लोग पहले ही फंस चुके होंगे। 16 मार्च को प्रेस कॉन्फ्रेंस में UP-ATS चीफ नीलाब्जा चौधरी ने चेतावनी दी, “यह राष्ट्रीय सुरक्षा का संकट है। स्टॉक लिस्ट से लेकर गगनयान तकनीक तक, उसने सब कुछ पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजा।”
नतीजा: टूटा परिवार, चौकन्ना देश
बिंदू कटरा में आरती अब एक खामोश घर में इंतजार कर रही है, जहां कल तक हंसी गूंजती थी। बच्चे सवाल पूछते हैं, जिनका जवाब उसके पास नहीं। रविंद्र, जो कभी भारत की रक्षा व्यवस्था का गर्वीला हिस्सा था, अब ATS की हिरासत में है, उसका भविष्य अनिश्चित। इस बीच, एजेंसी बैंक ट्रेल्स का पीछा कर रही है और नेहा के नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश में जुटी है।
भारत के लिए दांव इससे बड़ा नहीं हो सकता। गगनयान मिशन, जो राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है, खतरे में है। और जैसे-जैसे ATS ISI के जाल को ध्वस्त करने की दौड़ में है, एक सवाल सबके मन में है: ऐसे कितने और रविंद्र हैं, जो उस जाल में फंसे हैं जिसे उन्होंने कभी देखा भी नहीं?

