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11 साल 4 महीने 24 दिन बाद जेल से बाहर आए रामपाल, मुस्कुराते हुए निकला काफिला, हाईकोर्ट से मिली जमानत

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24 News Update हिसार/हरियाणा। सतलोक आश्रम प्रकरण में उम्रकैद की सजा काट रहे रामपाल शुक्रवार को 11 साल 4 महीने 24 दिन बाद हिसार की सेंट्रल जेल-2 से रिहा हो गए। जेल से बाहर आते समय रामपाल मुस्कुराते हुए नजर आए और इस दौरान वहां मौजूद एक पुलिसकर्मी ने हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम भी किया।
जेल गेट के बाहर रामपाल के परिजन और समर्थक बड़ी संख्या में मौजूद थे। रिहाई के बाद वह सफेद पर्दे से ढकी फॉर्च्यूनर में बैठकर रवाना हुए। इसके बाद उनका काफिला सोनीपत जिले के गोहाना स्थित धनाना के सतलोक आश्रम के लिए निकल गया।
रामपाल के काफिले में करीब 20 गाड़ियां शामिल रहीं, जिनमें डिफेंडर और फॉर्च्यूनर जैसी लग्जरी गाड़ियां भी देखी गईं। हरियाणा पुलिस की एक गाड़ी पूरे काफिले को एस्कॉर्ट करती नजर आई।
धनाना गांव में उनके समर्थकों की भारी भीड़ जुटी रही। रामपाल के भतीजे युद्धवीर ने बताया कि गांव से करीब एक किलोमीटर पहले उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। समर्थकों ने इस दिन को “दिवाली जैसा उत्सव” बताया।
गौरतलब है कि 8 अप्रैल को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रामपाल की नियमित जमानत मंजूर की थी। इसके बाद अदालत के आदेश पर उनके वकीलों ने हत्या के दो मामलों में 5-5 लाख रुपये के बेल बॉन्ड जमा करवाए।
2014 के टकराव में हुई थी 6 मौतें
नवंबर 2014 में पुलिस और सतलोक आश्रम समर्थकों के बीच हुए टकराव के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें महिलाओं और बच्चों समेत 6 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद रामपाल की गिरफ्तारी हुई थी। 2018 में हिसार कोर्ट ने उन्हें हत्या सहित कई मामलों में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि रामपाल करीब 11 साल से अधिक समय से जेल में हैं और ट्रायल बेहद धीमी गति से चल रहा है। वहीं सरकारी पक्ष ने गंभीर आरोपों का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया था। अदालत ने माना कि कई सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है और लंबी कैद को देखते हुए यह मामला जमानत योग्य है। हालांकि कोर्ट ने कड़ी शर्तें लगाई हैं, जिनमें भीड़ एकत्र न करने और किसी भी तरह की गतिविधि में शामिल न होने का निर्देश शामिल है।

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