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74 दिन बाद जेल से बाहर आए विक्रम भट्ट: ‘मेवाड़ का टीका’ लगाकर बोले—सत्य पराजित नहीं होगा

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24 News Update उदयपुर। फिल्मी दुनिया में सस्पेंस और थ्रिलर रचने वाले निर्देशक विक्रम भट्ट शुक्रवार को खुद एक कानूनी ड्रामे के किरदार बनकर उदयपुर सेंट्रल जेल से बाहर निकले। 7 दिसंबर 2025 को गिरफ्तारी के बाद 2 महीने 11 दिन (कुल 74 दिन) जेल में बिताने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिली। रिहाई के बाद उन्होंने सबसे पहले जेल परिसर स्थित शिव मंदिर में दर्शन किए, फिर मीडिया के सामने आकर कहा—“मुझे उम्मीद नहीं, यकीन था कि सच सामने आएगा। मेवाड़ की मिट्टी ने सिखाया है—सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।”

रिहाई का दिन: दस्तखत, दर्शन और संदेश

सुबह औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद मुख्य द्वार पर गेट रजिस्टर में हस्ताक्षर किए गए। बाहर निकलते ही भट्ट सीधे मंदिर पहुंचे। सीढ़ियों से उतरते हुए उन्होंने कहा कि यह समय उनके आत्ममंथन का रहा। “मैं कृष्ण भक्त हूं। जहां श्रीकृष्ण ने जन्म लिया, वहीं रहा। अब पहले से बेहतर इंसान बनकर नया संघर्ष शुरू कर रहा हूं। देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है,” उन्होंने कहा।

उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट 13 फरवरी को अंतरिम जमानत पर बाहर आ चुकी थीं। 19 फरवरी को दोनों को सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिली।

केस की टाइमलाइन: FIR से गिरफ्तारी तक

17 नवंबर 2025: इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया ने उदयपुर में 30 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी की FIR दर्ज कराई।

आरोप: पत्नी की बायोपिक और चार फिल्मों के निर्माण के नाम पर निवेश लेकर वादे पूरे न करने का आरोप।

24 अप्रैल 2024: मुंबई के वृंदावन स्टूडियो में मुलाकात, जहां प्रोजेक्ट पर चर्चा हुई।

प्रस्ताव: 47 करोड़ में चार फिल्में बनाने और रिलीज के बाद 100–200 करोड़ मुनाफे का दावा।

भुगतान विवरण: विभिन्न खातों में 77.86 लाख रुपए, कुल मिलाकर 2.45 करोड़ रुपए ट्रांसफर; साथ ही इंदिरा एंटरटेनमेंट से 42.70 करोड़ रुपए का भुगतान—जबकि निर्माण लागत 47 करोड़ तय बताई गई।

7 दिसंबर 2025: उदयपुर पुलिस की टीम ने मुंबई के जुहू स्थित गंगाभवन कॉम्प्लेक्स से भट्ट दंपती को गिरफ्तार किया। सुरक्षा गार्डों द्वारा प्रारंभिक रोकटोक के बावजूद पुलिस ने कार्रवाई पूरी की।

कानूनी मोर्चा और आगे की राह

भट्ट के वकीलों का कहना है कि लेन-देन व्यावसायिक प्रकृति का था और शर्तों/समझौतों की व्याख्या को लेकर विवाद है, जिसे अदालत में साबित किया जाएगा। वहीं, शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि निवेश के नाम पर रकम लेकर वादे पूरे नहीं किए गए।

नियमित जमानत के बाद अब ट्रायल कोर्ट में सुनवाई आगे बढ़ेगी। जांच एजेंसियां फंड फ्लो, कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों और संबंधित खातों की पड़ताल कर रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, फिल्म फाइनेंसिंग में पारदर्शिता, एस्क्रो मैकेनिज्म और स्पष्ट डिलीवेरेबल्स का अभाव ऐसे विवादों को जन्म देता है।

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