रिपोर्ट—जयवंत भैरविया
24 News Update उदयपुर। आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि यूडीए ने अपने किसी खासमखास हैविवेट को बचाने के लिए एक नया शब्द गढ़ा है—गैप भूमि!!! लेकिन इसकी परिभाषा पूछने पर यूडीए के पसीने छूट रहे हैं। शब्द बनाया तो उस खास को बचाने के लिए मगर अब यह अफसरों के ही गले पड़ गया है। सरकार पूछ रही है, आरटीआई में पूछा जा रहा है मगर गेप भूमि आखिर किस बला का नाम है या मोटी चमड़ी वाले किस अफसर की आर्थिक जुगाली के बाद जन्मी हुई जमीन है?? इसका जवाब कोई नहीं दे रहा है। आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों में पढ़े अफसर, जनता के टेक्स के पैसों से लाखों खर्च करके शानदार ट्रेनिंग पास अफसर और बरसों के अनुभवी कर्मचारी भी इस शब्द के आगे पानी भर रहे हैं। उदयपुर के UDA को इस शब्द को जन्म देने के लिए तुरंत कोई ना कोई पुरस्कार जरूर दे देना चाहिए या चाहें तो राजस्थान सरकार इसे पिछले साल जन्मा महानतम शब्द भी बता सकती है। इसे रेवेन्यू वाली भाषा में शामिल भी कर सकती है। खांचा भूमि तो आपने सुना ही होगा मगर ये जो मामला है इसमें घोटाले का जो गैप भूमि बताया जा रहा टुकड़ा है उसकी साइज सुनकर ही आपको सांप सूंघ जाएगा। अगर यही हालात रहे तो आने वाले दिनों में उदयपुर शहर की पूरी की पूरी कॉलोनियां गैप भूमि बताकर किसी खास को किसी खास मकसद के लिए सौंप दी जाएगी।
UDA के उच्च शिक्षित महान अफसरों ने खासतौर पर DPS स्कूल के जमीन घोटाले को जस्टिफाई करने के लिये इस शब्द का किसी मालदार लैब में निर्माण किया है। यह हस्त निर्मित शब्द लगता है। यहां पर — तुझे जमीं पर उतारा गया है मेरे लिए….टाइप बात हो गई है।
आप भी आजमाएं, यह आजमाया हुआ नुस्खा
इसे ऐसे समझिए कि जैसे आपके मकान के पास कोई जमीन है औऱ उस पर आप नीयत खराब करके जबरन कब्जा कर लेते है। उसके बाद जब आपको लगता है कि जमीन को कागजों में कैसे लीगल किया जाए, तो आप UDA के पास जाकर कहते हैं कि — व्यापक जनहित के लिये इस जमीन को मुझे दे दीजिए। वो भी बाजार भाव से कम रेट पर। इस जमीन से मैं लाभ नही कमाऊँगा और बल्कि गरीब आदिवासियों के लिए काम मे लूँगा। UDA के अफसर पहले आपको देखेंगे, फिर आपके आस पास के पॉलिटिकल और मनी पावर की गहराई का जायजा लेंगे, आपके किसी खास संगठन से जुड़ाव की जानकारी लेंगे और इसका आत्मज्ञान होते ही आपके चरणों में दंडवत कर लेंगे। कहेंगे—नो प्रॉब्लम। आपने कब्जा किया, ठीक किया, कोई फिकर नोट। चिंता मत कीजिए, राहु—ल काल में सब मुमकिन है। आपको कौड़ियों में जमीन अलॉट कर देते हैं।
उसके बाद तो आपके मजे हो जाते हैं। आप मजे से उस जमीन का अपने फायदे के लिये उपयोग करते है। सब कुछ एकदम —झिंगा—लाला टाइप चलता है। बाद में कोई सरकार को शिकायत कर देता है कि ये क्या तरीका हुआ?? कब्जे की जमीन कैसे दे दी??? नियम बताओ??? कानून की किताब खोलो?? अफसरों को सस्पेंड करो??? भ्रष्टाचार बंद करो???
बहुत ज्यादा चिल्लपौं मचने के बाद सरकार को लगता है कि अब इमेज पर बात आ जाएगी?? कोर्ट में जवाब देने पड़ जाएंगे….तो सरकार UDA से जवाब मांगती हैं। याने जिसकी करतूत है उसी से जवाब मांगा जा रहा है, यही तो खूबसूरती है हमारे सिस्टम की। UDA के महारथी व सर्व गुण संपन्न अफसर भी जानते हैं कि आगे का खेल कैसे खेलना है!!!
एक जाँच कमेटी बनाती है, जाँच रिपोर्ट पेश की जाती है। रिपोर्ट जब उपर के सरकारी अफसरों के पास जाती है तो वे गड़बड़झाला पकड़ लेते हैंं रिपोर्ट को विरोधाभासी बता देते हैं। UDA से सरकार पूछती है कि बताओ तो सही,,,,ये रिपोर्ट में आंकड़े अलग—अलग क्यों है? सरकार कहती है कि विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट दो और अगर कोई लापरवाही है तो दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करो।
24 हजार वर्गफीट जमीन गैप भूमि कैसे हो गई???
रिपोर्ट मांगते ही यूडीए आयुक्त सक्रिय होते हैं। एकदम फिल्मी जवाब देते हैं। सरकार को लिखते है कि साहब!!!! ये जो जमीन का अंतर आ रहा है!!! यानी कि जो लगभग 24 हजार वर्ग फीट एक्स्ट्रा जमीन आ रही है!!! ये तो गैप भूमि है जिसे आवंटित किया जाना शेष है। भाई साहब,,,,, ऐसा शानदार बहाना, ऐसा झूठ, ऐसा नया प्रयोग….इतिहास याद रखेगा इन अफसरों को इस नवाचार के लिए। आपके घर के पास भी कोई 24 हजार वर्गफीट की जमीन पड़ी हो तो तुरंत कब्जा कर लीजिए… क्योंकि बाद में यूडीए आपको गैप भूमि के रूप में इस जमीन का मालिकाना हक दिलवा देगी। उसके लिए क्या क्या टेबल के नीचे करना पड़ेगा, यह तो आप खुद समझदार है…अपने केलिबर और रिसोर्सेज के दम पर खुद कर लीजिएगा!!!
सवाल तो उठते है कि जमीन की जाँच में गड़बड़ी क्यों हो रही है ? UDA के पास तो अभियन्ताओं , तकनीकविदों औऱ वास्तुकारो की भी पूरी फौज है। उस पर भी काम नहीं करने के आरोप लगते हैं। तो फिर इस फौज की तपस्या में आखिर कमी कहां रह गई??? ये एक जमीन की नपती ढंग से नहीं कर सके???? मगर खेल तो जमीन पर कुछ और ही हो रहा है।
दुनिया भुला दूंगा, तेरी चाहत में
एक फिल्मी गाना फिर याद आता है—मैं दुनिया भुला दूंगा ….तेरी चाहत में। यहां पर यूडीए के अफसरों और डीपीएस के प्रबंधकों की चाहतों के सिलसिले बहुत ही गहराई से चल रहे हैं। जमीनी मोहब्बत में वो मकाम आ जाता है कि UDA के अफसर गैप भूमि नामक नए शब्द को जन्म दे देते हैं। याने कि…दूरी ना रहे कोई…. जैसी बात हो जाती है। अब ये जानना भी जरूरी हो जाता है कि गैप भूमि आप किसे कहेंगे। तो बच्चों जैसी बात करते है——— गूगल कर लेते हैं। गूगल गैप के ये अर्थ बताता है :- कमी,अंतर,फर्क,घाट,अवकाश,दरार,छेद, फ़ासला लेकिन ऐसा कोई सटीक अर्थ नही मिलता है जो कि UDA ने इस्तेमाल किया है। अब जब सरकार पूछ रही है, आरटीआई में जवाब देना है तब सूत्र बात रहे हैं कि यूडीए में फाइल को टेनिस खिलाया जा रहा है।
अब समझिये कि आखिर क्या है मामला
जमीन आवंटन घोटाले के मामले में कुख्यात हुए उदयपुर के DPS स्कूल से जुड़े जमीन घोटाले के बाद UDA की जांच रिपोर्टों में विरोधाभास आ गया। सरकार की फटकार के बाद UDA ने अतिरिक्त लगभग 24 हजार वर्गफीट जमीन की गैप भूमि बता दिया लेकिन गैप भूमि की परिभाषा UDA कहा से ली ये जानना बड़ा जरूरी हो गया। UDA से RTI के जरिये जानकारी मांगी जाती है कि—
(1) उदयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा परिभाषित ” गैप भूमि ” की सूचना प्रदान की जाए
(2) उदयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा कहलाई जाने वाली ” गैप भूमि ” की सूचना प्रदान की जाए
(3) उदयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा दिनाँक 1 जनवरी 2025 से लेकर दिनाँक 31 अगस्त के मध्य राजस्व ग्राम रूपनगर में आवंटित की गई गैप भूमि की सूचना प्रदान की जाए
(4) उदयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा किसी निजी स्कूल के सामने स्थित कब्जा की जमीन को रियायती दरों पर स्कूल को आवंटित करने हेतु उपलब्ध नियमों की सूचना प्रदान की जाए।
लेकिन UDA के अफसर जानते हैं कि पर्दा जो उठा गया तो भेद खुल जाएगा। भेद खुल जाएगा तो नौकरी पर बन आएगी। तो UDA ने RTI को कचरा पात्र में डाल दिया। मामला राज्य सूचना आयोग के पास गया तो आयोग भी चौंक गया। आयोग ने फैसला दिया कि UDA 21 दिन में आवेदक को अवलोकन करवा कर सूचना से सम्बंधित अभिलेख उपलब्ध करवा दिया जाए। अब ये सामने आना बड़े मजे की बात होगी कि UDA “गैप भूमि ” के बारे में कौन सा दस्तावेज बताती है जो ये परिभाषित करता हो कि लीजिए, ये है गैप भूमि। अगर 24 हजार वर्गफीट की जमीन गैप भूमि है तो फिर यकीन जानिये उदयपुर के भू माफियाओं के अच्छे दिन आने वाले हैं।
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