उदयपुर। आज उदयपुर में प्रेसवार्ता में एसपी अमृता दुहन के चेहरे की खुशी देखते ही बन पड़ी। सनसनीखेज हत्याकांड के खुलासे का मौका था। दोहरा ब्लाइंड मर्डर पिछले कई दिनों से पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था मगर एसपी के निर्देशन में टीम ने दिन—रात एक करके केवल एक कार के सीसीटीवी क्लू के सहारे खौफनाक और वेल प्लांड मर्डर का खुलासा कर दिया। ऐसा जबर्दस्त खुलासा कि जिसने भी सुना सकते में आ गया। एसपी ने कहा कि यह दृश्यम मूवी की तर्ज पर रची गई गहरी साजिश थी। अययाश दोस्तों ने पैसों के लालच में आकर कर्ज उतारने के लिए दंपती को मौत के घाट उतार दिया। सायरा थाना क्षेत्र के पुनावली गांव में 70 वर्षीय लहरीलाल पालीवाल और उनकी 67 वर्षीय पत्नी राधाबाई की हत्या का मामला जितना शांत दिख रहा था, उसके पीछे की साजिश उतनी ही गहरी निकली। घर का पड़ोसी ही बुजुर्ग दंपती की संपत्ति और उनकी दिनचर्या पर नजर रखे हुए था। अच्छी जीवनशैली और बढ़ते कर्ज के बीच पैसों की जरूरत ने उसके दिमाग में लूट का खतरनाक खाका तैयार किया। करीब डेढ़ साल पहले शुरू हुई योजना आखिरकार दोहरे हत्याकांड में बदल गई। पुलिस ने इस सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड का खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें मुख्य सूत्रधार मृतक दंपती का पड़ोसी कुशल उर्फ खुशी पालीवाल भी शामिल है। उसके साथ गुजरात के सूरत में रहने वाले चन्दन यादव और दिलीप चौधरी तथा पुनावली निवासी किशन पालीवाल और जीवन पालीवाल को गिरफ्तार किया गया है। वारदात में इस्तेमाल वाहन भी पुलिस ने बरामद कर लिया है। घर खुला मिला, दोनों गायब थे और फोन बंद थे मामले की शुरुआत 12 अगस्त 2026 को हुई, जब पुनावली निवासी धुलीराम पिता शंकरलाल पालीवाल, उम्र 50 वर्ष, ने सायरा थाने में रिपोर्ट दी। उन्होंने बताया कि उनके बड़े भाई लहरीलाल, उम्र 70 वर्ष और भाभी राधाबाई के घर का मुख्य दरवाजा खुला पड़ा था, लेकिन दोनों घर पर नहीं थे। परिजनों और पड़ोसियों से जानकारी लेने के बाद धुलीराम भाई के घर पहुंचे। घर खाली था। उन्होंने लहरीलाल के मोबाइल नंबर 9587834066 पर संपर्क किया, लेकिन फोन बंद मिला। राधाबाई के मोबाइल नंबर 7340167793 पर भी संपर्क नहीं हो सका। परिवार ने रिश्तेदारों और आसपास के लोगों से पूछताछ करते हुए दोनों की तलाश शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस ने इस सूचना पर एमपीआर नंबर 39/2026 दर्ज किया और लापता दंपती की तलाश शुरू कर दी। 14 अगस्त को घर से आई दुर्गंध ने खोल दिया मौत का राज पुलिस टीम ने गांव में पूछताछ के साथ मोबाइल कॉल डिटेल और लोकेशन के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। इसी दौरान लहरीलाल के घर से दुर्गंध आने लगी। पुलिस ने घर की तलाशी ली तो वह दृश्य सामने आया जिसने पूरे गांव को हिला दिया। 14 अगस्त को दोनों के शव घर के अंदर एक बड़े लोहे के संदूक से बरामद हुए। शवों को प्लास्टिक की थैलियों में पैक कर कार्टन टेप से मजबूती से बंद किया गया था। संदूक को बिस्तरों के नीचे इस तरह छिपाया गया था कि बाहर से किसी को शक न हो। पुलिस ने तत्काल घटनास्थल सुरक्षित कराया। एफएसएल टीम, एमओबी टीम, चल मोबाइल अनुसंधान इकाई और डॉग स्क्वॉड को मौके पर बुलाकर साक्ष्य जुटाए गए। दोनों शवों को महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय, उदयपुर की मोर्चरी में रखवाया गया। जांच में सामने आया कि अज्ञात आरोपियों ने बुजुर्ग दंपती की हत्या के बाद खून के निशान साफ किए थे। आरोपियों ने दस्ताने इस्तेमाल किए और शवों को प्लास्टिक की थैलियों तथा कार्टन टेप से पैक कर संदूक में छिपाया था। मृतक दंपती की चप्पलें भी गायब कर दी गईं, ताकि ऐसा लगे कि दोनों अपनी मर्जी से कहीं चले गए हैं। यही नहीं, पुलिस को भ्रमित करने के लिए दोनों के मोबाइल फोन वारदात के बाद अपने साथ ले जाए गए और हाईवे के रास्ते में अलग-अलग जगह चालू कर फेंक दिए गए। पड़ोसी होने का फायदा उठाकर घर में घुसा कुशल पुलिस जांच में इस पूरी साजिश का कथित मुख्य सूत्रधार कुशल उर्फ खुशी पालीवाल सामने आया। पुलिस के अनुसार कुशल को महंगी जीवनशैली और खर्चीले शौक थे। लोगों और बैंकों से लिए गए कर्ज तथा आर्थिक दबाव के कारण वह लगातार पैसों की व्यवस्था करने में जुटा था। कुशल को जानकारी थी कि गांव के लहरीलाल के पास पर्याप्त पैसा रहता है और वह लोगों को रुपए उधार भी देते हैं। उसे यह भी पता था कि बुजुर्ग दंपती घर में अकेले रहते हैं। इसी जानकारी ने उसे लूट की योजना बनाने के लिए प्रेरित किया। पुलिस के अनुसार कुशल ने करीब एक से डेढ़ साल पहले इस योजना पर विचार करना शुरू कर दिया था। कुछ महीने पहले वह अपने साथी चन्दन यादव के साथ पुनावली आया और घर तथा दंपती की दिनचर्या की रैकी की। बाद में उसने विकास खरवड और दिलीप चौधरी को भी योजना में शामिल किया। हालांकि अंतिम कार्रवाई में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि जांच के दौरान सामने आए घटनाक्रम में विकास खरवड की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। 9 अगस्त को कार से पहुंचे, होटल में रुके पुलिस के मुताबिक योजना को अंजाम देने से पहले आरोपियों ने करीब एक महीने तक पूरी तैयारी की। कुशल पालीवाल, चन्दन यादव, विकास खरवड और दिलीप चौधरी 9 अगस्त 2026 को चन्दन यादव की ग्रैंड विटारा कार से गुजरात से रवाना हुए। चारों गोगुंदा होते हुए पानेरियो की भागल और सायरा पहुंचे। इसके बाद कुंभलगढ़ घूमने गए और वापस लौटकर गोगुंदा टोल के पास एक होटल में कमरा लेकर रुके। दिन में कुशल ने पुनावली निवासी जीवन पालीवाल और अपने चचेरे भाई किशन पालीवाल से संपर्क किया। दोनों से बुजुर्ग दंपती के घर, उनके आने-जाने और दिनचर्या की जानकारी जुटाई गई। 10 अगस्त को पहली कोशिश, लेकिन मौका नहीं मिला 10 अगस्त को कुशल, चन्दन, विकास और दिलीप फिर पुनावली पहुंचे। योजना के मुताबिक कुशल और चन्दन अपने सामान्य मोबाइल फोन साथियों की कार में छोड़कर एक अलग फोन लेकर लहरीलाल के घर पहुंचे। विकास और दिलीप कार लेकर आसपास घूमते रहे। कुशल पड़ोसी था, इसलिए राधाबाई ने उसे और चन्दन को घर में प्रवेश दे दिया। दोनों को खाना भी खिलाया गया। इसके बाद दोनों ने सोने का नाटक करते हुए मौके का इंतजार किया, लेकिन घर में लोगों की आवाजाही बनी रही और उन्हें वारदात का अवसर नहीं मिला। इस दौरान कुशल घर में रखी एक हथौड़ी अपने साथ छिपाकर ले गया। रात में आरोपी पुनावली के आसपास मौका तलाशते रहे और पदराड़ा के आसपास कार में ही सो गए। अगले दिन भी असफल रहे, फिर बदली पूरी रणनीति 11 अगस्त की सुबह कुशल और चन्दन हथौड़ी लेकर दोबारा दंपती के घर पहुंचे। इस बार दरवाजा बंद था। अंदर प्रवेश नहीं हो सका, इसलिए दोनों वापस लौट आए। वारदात का मौका नहीं मिलने पर आरोपी परशुराम महादेव, नाथद्वारा-उदयपुर की ओर घूमने निकल गए। इसी दौरान सभी ने नई योजना बनाई। तय किया गया कि जीवन और किशन पहले किसी बहाने घर में प्रवेश करेंगे और अंदर का रास्ता खुला छोड़कर कुशल के लिए प्रवेश का रास्ता बनाएंगे। जन्मपत्री दिखाने के बहाने खुलवाया दरवाजा पुलिस के अनुसार 11 अगस्त को ही जीवन पालीवाल और किशन पालीवाल जन्मपत्री दिखाने के बहाने लहरीलाल और राधाबाई के घर पहुंचे। राधाबाई ने दरवाजा खोला। दोनों उनके साथ ऊपर चले गए, जहां लहरीलाल मौजूद थे। योजना के मुताबिक दोनों ने राधाबाई का ध्यान दूसरी ओर लगाया और घर का मुख्य दरवाजा खुला रहने दिया। इसी दौरान कुशल घर के भीतर घुस गया और बाथरूम में छिप गया। कुछ देर बाद कुशल ने जीवन और किशन को संदेश भेजकर बताया कि वह अंदर छिप चुका है। इसके बाद दोनों बाहर निकल गए। अब कुशल घर के अंदर था और बाहर उसके बाकी साथी मौके का इंतजार कर रहे थे। आधी रात को सोते लहरीलाल पर हथौड़ी से वार पुलिस के अनुसार दंपती के सो जाने के बाद कुशल ने अपने साथियों चन्दन, विकास और दिलीप को अंदर बुला लिया। चारों ऊपरी मंजिल पर पहुंचे। आरोप है कि सो रहे लहरीलाल पर कुशल ने हथौड़ी से लगातार वार किए, जिससे उनकी हत्या हो गई। राधाबाई नीचे के कमरे में सो रही थीं और कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। उन्हें ऊपर हुई वारदात की जानकारी नहीं हो सकी। इसके बाद आरोपियों ने घटनास्थल को साफ किया। लहरीलाल के शव को प्लास्टिक की थैलियों में रखकर कार्टन टेप से पैक किया गया और उसे लोहे के बड़े संदूक में छिपा दिया गया। राधाबाई उठीं तो दूसरी हत्या कर दी वारदात के अगले चरण में आरोपी राधाबाई के उठने का इंतजार करने लगे। इस दौरान दिलीप और विकास को घर से बाहर निकलकर कार के साथ सड़क पर घूमते रहने और संकेत का इंतजार करने के लिए कहा गया। सुबह राधाबाई उठीं और नहाने के लिए जाने लगीं। पुलिस के अनुसार इसी दौरान चन्दन ने उनका मुंह दबाया ताकि आवाज बाहर न निकले, जबकि कुशल ने उनका गला घोंट दिया। राधाबाई की हत्या के बाद आरोपियों ने उनके पहने हुए आभूषण उतार लिए। उनकी चाबी से अलमारी खोली गई और वहां रखे अन्य आभूषण तथा नकदी भी ले ली गई। इसके बाद राधाबाई के शव को भी प्लास्टिक की थैलियों और कार्टन टेप से पैक किया गया। दोनों शवों को संदूक में रखकर ऊपर बिस्तर डाल दिए गए। आरोपियों ने इस तरह शवों को छिपाया कि दुर्गंध आने में समय लगे और परिजनों को तत्काल कोई संदेह न हो। लूट का माल, मोबाइल और हथौड़ी लेकर निकल गए पुलिस के अनुसार दोनों शव छिपाने के बाद आरोपी नकदी, आभूषण, मृतक दंपती के मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल हथौड़ी सहित अन्य सामान लेकर घर से निकल गए। घर का दरवाजा अटका दिया गया। इसके बाद वे पैदल सड़क तक पहुंचे और अपने साथियों के पास चले गए। पुलिस को गुमराह करने के लिए मृतक दंपती के मोबाइल फोन रास्ते में हाईवे पर अलग-अलग स्थानों पर चालू कर फेंक दिए गए। इधर मुख्य आरोपी और उसके साथी गांव से बाहर हो गए, लेकिन गांव में मौजूद सहअपराधियों के माध्यम से वारदात की पल-पल की जानकारी लेते रहे। जांच के अनुसार यही आरोपी बाद में गांव के अन्य लोगों के साथ मिलकर बुजुर्ग दंपती की हत्या पर न्याय की मांग करने और उनकी तलाश में शामिल होने का दिखावा करते रहे, ताकि पुलिस का शक उन तक नहीं पहुंचे। पुलिस के सामने चार बड़ी चुनौतियां दोहरे हत्याकांड में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों की पहचान थी। इसके साथ ही वारदात का उद्देश्य, हत्या का वास्तविक घटनास्थल, शवों को पैक कर छिपाने के पीछे की वजह और पुलिस को भ्रमित करने के तरीके का पता लगाना भी जरूरी था। पुलिस टीम ने तकनीकी जांच, मनोवैज्ञानिक विश्लेषण, सूचना संकलन और पारंपरिक अनुसंधान के साथ आधुनिक जांच तकनीकों का इस्तेमाल किया। मोबाइल फोन की कॉल डिटेल, लोकेशन और संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण किया गया। लगातार जुटाई गई सूचनाओं और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम आरोपियों तक पहुंची और आखिरकार पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पांच आरोपी गिरफ्तार पुलिस ने इस मामले में जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनके नाम इस प्रकार हैं— कुशल उर्फ खुशी पालीवाल पिता मांगीलाल जी, जाति ब्राह्मण, उम्र 26 वर्ष, निवासी सरकारी स्कूल के पास पुनावली, थाना सायरा, जिला उदयपुर। हाल निवासी मकान नंबर 504-505, कृष्णा रॉ हाउस, रेलवे स्टेशन रोड, सचिन, थाना सचिन, जिला सूरत, गुजरात। चन्दन यादव पिता प्रवीण यादव, जाति यादव, उम्र 27 वर्ष, निवासी केउटा, दलसिंह सराय, थाना दलसिंह सराय, जिला समस्तीपुर, बिहार। हाल निवासी बी-307, शिलालेख अपार्टमेंट, सचिन, थाना सचिन, सूरत, गुजरात। दिलीप चौधरी पिता कनिकराम चौधरी, जाति चौधरी, उम्र 30 वर्ष, निवासी ए-59, अम्बिका नगर, पार्टी, सचिन, थाना सचिन, जिला सूरत, गुजरात। किशन पालीवाल पिता देवीलाल पालीवाल, जाति ब्राह्मण, उम्र 21 वर्ष, निवासी एसके स्कूल के पास पुनावली, थाना सायरा, जिला उदयपुर। जीवन पालीवाल पिता भेरूलाल पालीवाल, जाति ब्राह्मण, उम्र 21 वर्ष, निवासी पुनावली, थाना सायरा, जिला उदयपुर। वारदात में प्रयुक्त वाहन भी पुलिस ने बरामद किया है। मामले में आगे की जांच जारी है। सायरा से सूरत तक फैला था नेटवर्क इस वारदात की एक अहम कड़ी यह भी रही कि मुख्य आरोपी कुशल पालीवाल पुनावली का ही रहने वाला था, जबकि उसके कुछ साथी सूरत में रहते थे। पुलिस के अनुसार योजना तैयार करने से लेकर रैकी, आने-जाने, ठहरने, घर में प्रवेश और वारदात के बाद साक्ष्य मिटाने तक अलग-अलग स्तर पर भूमिका बांटी गई थी। जांच में पुलिस यह भी पता लगा रही है कि लूट के दौरान कितनी नकदी और कितने आभूषण ले जाए गए तथा वारदात में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका क्या रही। पुलिस टीम ने कई स्तरों पर की कार्रवाई पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के निर्देश और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुख्यालय उदयपुर मुकुल शर्मा तथा श्री छगन पुरोहित के निर्देशन में सायरा थानाधिकारी शैतान सिंह के नेतृत्व में टीम गठित की गई। जांच टीम में शैतान सिंह, पुलिस निरीक्षक एवं थानाधिकारी सायरा; प्रवीण सिंह राजपुरोहित, पुलिस निरीक्षक एवं थानाधिकारी गोगुंदा; भरत जी योगी, पुलिस निरीक्षक एवं प्रभारी जिला विशेष टीम; सुनील चारण, पुलिस निरीक्षक एवं थानाधिकारी गोर्वधन विलास; फैलीराम, उप निरीक्षक, जिला साइबर सेल राजसमंद; रामावतार मीणा, थानाधिकारी बेकरिया; राजेन्द्र सिंह, सहायक उपनिरीक्षक थाना सायरा; गजराज सिंह, सहायक उपनिरीक्षक एवं प्रभारी जिला साइबर टीम; भंवर सिंह, सहायक उपनिरीक्षक थाना सायरा; विक्रम सिंह, सहायक उपनिरीक्षक जिला विशेष टीम; अखिलेश, सहायक उपनिरीक्षक जिला विशेष टीम; गणपतनाथ, सहायक उपनिरीक्षक थाना सायरा; धर्मवीर, सहायक उपनिरीक्षक थाना गोर्वधन विलास; भरतसिंह, सहायक उपनिरीक्षक थाना बेकरिया शामिल रहे। इसके अलावा टीम में कुलदीप सिंह, हेड कांस्टेबल नंबर 2014 जिला साइबर टीम; जितेन्द्र सिंह, हेड कांस्टेबल नंबर 1691 जिला विशेष टीम; कमलेश, हेड कांस्टेबल नंबर 222 जिला विशेष टीम; भुपेन्द्र सिंह, हेड कांस्टेबल नंबर 559 थाना सायरा; रामदयाल, हेड कांस्टेबल नंबर 1939 थाना सायरा; चरणसिंह, हेड कांस्टेबल नंबर 745 थाना सायरा; नरेन्द्रसिंह, हेड कांस्टेबल नंबर 2771 थाना सायरा; भूपेन्द्रसिंह, हेड कांस्टेबल नंबर 559 थाना सायरा; दिनेश सिंह, हेड कांस्टेबल थाना सुखेर; श्रवण, हेड कांस्टेबल थाना सुखेर; रूपाराम, कांस्टेबल नंबर 557 थाना सायरा; पुष्पराजसिंह, कांस्टेबल नंबर 693 थाना सायरा; विरेन्द्र, कांस्टेबल नंबर 2413 थाना गोगुंदा; नरपतराम, कांस्टेबल नंबर 272 थाना सायरा; लोकेन्द्र सिंह, कांस्टेबल नंबर 3109 थाना सायरा; हस्तिराम, कांस्टेबल नंबर 3110 थाना सायरा; लोकेश, कांस्टेबल नंबर 2252 जिला साइबर टीम; धर्मेन्द्र कुमार, कांस्टेबल नंबर 2606 थाना सायरा; भुपेन्द्र सिंह, कांस्टेबल नंबर 387 थाना गोगुंदा; ओमप्रकाश, कांस्टेबल नंबर 2209 थाना गोगुंदा; विरेन्द्र सिंह, कांस्टेबल नंबर 1652 जिला विशेष टीम; सुमित, कांस्टेबल नंबर 1445 जिला विशेष टीम; सुमेर सिंह, कांस्टेबल नंबर 1097 जिला विशेष टीम; निम्बाराम, कांस्टेबल नंबर 540 थाना सायरा; शिंभुराम, कांस्टेबल थाना सुखेर और अचलाराम, कांस्टेबल थाना सुखेर ने भी कार्रवाई में भूमिका निभाई। उदयपुर रेंज के महानिरीक्षक पुलिस गौरव श्रीवास्तव के निर्देश और पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन की निगरानी में हुई इस कार्रवाई ने पुनावली के उस रहस्य से पर्दा उठा दिया, जिसमें एक शांत घर के भीतर दो बुजुर्गों की हत्या के बाद उनकी लाशें बिस्तरों के नीचे संदूक में छिपा दी गई थीं। पुलिस के अनुसार लालच, कर्ज और महंगी जीवनशैली की चाह ने पड़ोसी को ही ऐसा षड्यंत्र रचने तक पहुंचा दिया। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a 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