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मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार में संपत्ति विवाद गहराया, वसीयत पर संग्राम: बेटियों ने पिता की मानसिक स्थिति पर उठाए सवाल, बेटे ने बताया मर्यादा पर प्रहार

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24 News Udpate उदयपुर। मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार से जुड़े संपत्ति विवाद ने अब गंभीर और संवेदनशील मोड़ ले लिया है। दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ की अंतिम वसीयत को लेकर चल रहे कानूनी संघर्ष में ऐसे आरोप सामने आए हैं, जिनसे पारिवारिक रिश्तों के साथ-साथ सामाजिक और नैतिक प्रश्न भी खड़े हो गए हैं।

बेटियों का आरोप: वसीयत अमान्य

अरविंद सिंह मेवाड़ की छोटी बेटी पद्मजा कुमारी और बड़ी बेटी भार्गवी कुमारी ने अदालत में दायर याचिका में अपने पिता की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि अरविंद सिंह शराब पीने के आदी थे और मानसिक रूप से इस स्थिति में नहीं थे कि वे किसी वैधानिक और विवेकपूर्ण निर्णय लेने में सक्षम हों।
इन्हीं आधारों पर दोनों बहनों ने 7 फरवरी 2025 को बनाई गई अंतिम वसीयत को चुनौती दी है।

बेटे की तीखी प्रतिक्रिया

इन आरोपों पर बेटे डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि संपत्ति के लालच में उनकी बहनों ने अपने ही पिता की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। लक्ष्यराज सिंह ने इसे अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए कहा कि जीवन भर संरक्षण देने वाले पिता को इस तरह मानसिक रूप से अस्वस्थ बताना निंदनीय है।

वसीयत और घटनाक्रम

अरविंद सिंह मेवाड़ का निधन 16 मार्च 2025 को हुआ था। इससे पहले उन्होंने 7 फरवरी को वसीयत तैयार कर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में उसका पंजीकरण कराया था। वसीयत में उन्होंने अपनी संपत्तियों का एकमात्र उत्तराधिकारी बेटे लक्ष्यराज सिंह को घोषित किया था। निधन के कुछ ही दिनों बाद इस वसीयत को लेकर कानूनी विवाद शुरू हो गया।

लक्ष्यराज का हलफनामा

डॉ. लक्ष्यराज सिंह ने अदालत में दायर अपने हलफनामे में कहा है कि उनके पिता पूरी तरह मानसिक रूप से स्वस्थ थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में दोनों बहनों ने कुछ कंपनियों के शेयर स्वयं पिता को उपहार स्वरूप दिए थे, जिन्हें अरविंद सिंह ने जीवित रहते स्वीकार किया था।
इसके अतिरिक्त, जनवरी 2025 में जिन कंपनियों में पद्मजा और भार्गवी को निदेशक बनाया गया था, वहां से दोनों ने पिता के जीवित रहते ही इस्तीफा दे दिया था।

किन संपत्तियों पर विवाद

दोनों बेटियों ने पिता की स्व-अर्जित संपत्तियों में हिस्सेदारी का दावा किया है। विवादित संपत्तियों में उदयपुर की शिकारबाड़ी भूमि, मुंबई स्थित मेवाड़ हाउस के छठे माले का आधा हिस्सा, दार्जिलिया हाउस सहित अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

वसीयत से जुड़े मामले अलग-अलग हाईकोर्ट में लंबित होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी प्रकरणों को एक मंच पर लाने का आदेश दिया है। जोधपुर और मुंबई हाईकोर्ट में चल रहे सभी मामलों को दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया है।
अब सभी पक्षकारों को 12 जनवरी 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

बेटियों की चुप्पी

अपने आरोपों को लेकर संपर्क किए जाने पर पद्मजा और भार्गवी कुमारी ने कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है।

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