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अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत को बेटी पद्मजा कुमारी ने दी चुनौती, मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट में

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24 News Update उदयपुर। उदयपुर के पूर्व राजपरिवार से जुड़ा दशकों पुराना संपत्ति विवाद अब एक बार फिर न्यायपालिका के उच्च स्तर तक पहुंच गया है। पूर्व महाराणा अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत को चुनौती देते हुए उनकी पुत्री पद्मजा कुमारी परमार द्वारा दायर याचिका पर अब दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।
यह विवाद अरविंद सिंह मेवाड़ के पुत्र लक्ष्यराज सिंह मेवाड़—जो वर्तमान में एचआरएच ग्रुप ऑफ होटल्स के चेयरमैन एवं मेवाड़ परिवार के उत्तराधिकारी माने जाते हैं—और उनकी बहन पद्मजा कुमारी के बीच है। विवाद का केंद्र बिंदु सिटी पैलेस, एचआरएच होटल्स ग्रुप सहित अन्य ऐतिहासिक व बहुमूल्य संपत्तियां हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दिल्ली हाईकोर्ट में होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत को अवगत कराया कि मेवाड़ परिवार के विभिन्न सदस्यों के बीच उत्तराधिकार और वसीयत की वैधता को लेकर अलग-अलग न्यायालयों में मामले लंबित थे, जिससे न्यायिक प्रक्रिया बिखर रही थी।
इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी लंबित मामलों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि दोनों पक्षों के बीच अन्य कोई मामला लंबित हो, तो उसे भी दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित कराने हेतु आवेदन किया जा सकता है।

दोनों पक्षों की अलग-अलग याचिकाएं
लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने मुंबई हाईकोर्ट में लंबित मामलों को राजस्थान हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की थी। वहीं पद्मजा कुमारी परमार ने जोधपुर बेंच राजस्थान हाईकोर्ट में चल रहे मामलों को बॉम्बे हाईकोर्ट भेजने का आग्रह किया था।
इन परस्पर विरोधी मांगों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने न्यायहित में दिल्ली हाईकोर्ट को उपयुक्त मंच मानते हुए अंतिम आदेश पारित किया।

दशकों पुराना है मेवाड़ राजपरिवार का संपत्ति विवाद
मेवाड़ पूर्व राजपरिवार में संपत्ति को लेकर विवाद की जड़ें वर्ष 1983 से जुड़ी हैं, जब महाराणा भगवत सिंह मेवाड़ ने पारिवारिक संपत्तियों को बेचने और लीज पर देने का निर्णय लिया। इस निर्णय का उनके बड़े पुत्र महेंद्र सिंह मेवाड़ ने विरोध किया और न्यायालय की शरण ली। इसके बाद पारिवारिक मतभेद गहराते चले गए। 1984 में भगवत सिंह मेवाड़ के निधन के पश्चात यह विवाद और जटिल हो गया। लगभग 37 वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद वर्ष 2020 में उदयपुर जिला अदालत ने संपत्तियों के बंटवारे का आदेश पारित किया। हालांकि, इसके बावजूद विवाद पूर्णतः समाप्त नहीं हुआ और अब एक बार फिर यह मामला उच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। अब यह मामला ऐतिहासिक विरासत, ट्रस्ट, वसीयत की वैधता और न्यायिक अधिकार क्षेत्र से जुड़े गंभीर संवैधानिक प्रश्नों को भी जन्म देता है।
दिल्ली हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह तय होगा कि मेवाड़ राजपरिवार के इस लंबे विवाद को न्यायिक रूप से किस दिशा में अंतिम समाधान मिलता है।

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