केरल। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की केरल यात्रा के दौरान बुधवार को एक अप्रत्याशित घटना हुई। उनके हेलिकॉप्टर भारतीय वायुसेना के MI-17 को लैंडिंग के बाद गड्ढे में फंसना पड़ा।घटना केरल के पथानामथिट्टा जिले के राजीव गांधी स्टेडियम में हुई, जहां राष्ट्रपति की लैंडिंग के लिए अस्थायी हेलीपैड तैयार किया गया था। हेलिकॉप्टर के उतरते ही जमीन का कंक्रीट दबाव नहीं झेल पाया और एक तरफ झुक गया। मौके पर मौजूद पुलिस और अग्निशमन कर्मियों ने हेलिकॉप्टर को धक्का देकर गड्ढे से बाहर निकाला। हेलीपैड पूरी तरह नहीं सूखा था, वजन से बैठ गई जमीन अधिकारियों के मुताबिक, हेलीपैड जल्दबाजी में बनाया गया था और उसका कंक्रीट पूरी तरह से नहीं सूखा था।जैसे ही हेलिकॉप्टर ने जमीन को छुआ, उसका वजन झेल नहीं सका और जहां पहिए टिके, वहां गड्ढे बन गए।हालांकि, राष्ट्रपति मुर्मू पूरी तरह सुरक्षित रहीं और बिना देरी के सड़क मार्ग से अपनी यात्रा जारी रखी। पहले लैंडिंग की योजना पंबा के पास निलक्कल में थी, लेकिन खराब मौसम के कारण इसे प्रामदम में स्थानांतरित किया गया। राष्ट्रपति ने सबरीमाला मंदिर में किए दर्शन घटना के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने सबरीमाला स्थित भगवान अय्यप्पा मंदिर में पूजा-अर्चना की।वे इस मंदिर में दर्शन करने वाली देश की पहली महिला राष्ट्रपति बन गई हैं।इससे पहले 1970 के दशक में पूर्व राष्ट्रपति वी.वी. गिरी ने इस मंदिर का दौरा किया था। चार दिवसीय केरल दौरे पर हैं राष्ट्रपति राष्ट्रपति मंगलवार शाम चार दिवसीय यात्रा पर तिरुवनंतपुरम पहुंचीं।राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। वे अपनी यात्रा के दौरान कई कार्यक्रमों में शामिल होंगी— गुरुवार को राजभवन में पूर्व राष्ट्रपति के.आर. नारायणन की प्रतिमा का अनावरण करेंगी। इसके बाद वर्कला स्थित शिवगिरी मठ में श्री नारायण गुरु की महा-समाधि शताब्दी समारोह का उद्घाटन करेंगी। पाला (कोट्टायम) में सेंट थॉमस कॉलेज के प्लेटिनम जुबली समारोह में भाग लेंगी। 24 अक्टूबर को एर्नाकुलम स्थित सेंट टेरेसा कॉलेज के शताब्दी समारोह में शामिल होकर केरल यात्रा समाप्त करेंगी। भगवान अय्यप्पा: हरिहरपुत्र स्वरूप और सबरीमाला की परंपरा पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान अय्यप्पा को भगवान शिव और विष्णु के मोहिनी अवतार का पुत्र माना जाता है।इसी से उनका नाम हरिहरपुत्र पड़ा — हर (शिव) और हरि (विष्णु) से मिलकर। सबरीमाला मंदिर करीब 800 साल पुराना माना जाता है और इसे शैव-वैष्णव एकता का प्रतीक कहा जाता है।यहां दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को 41 दिनों का व्रत रखना होता है, जिसमें ब्रह्मचर्य, सादा जीवन और शाकाहारी भोजन का पालन अनिवार्य है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation INS विक्रांत पर नौसैनिकों संग पीएम मोदी ने मनाई दिवाली, कहा – ‘विक्रांत ने पाकिस्तान की रातों की नींद उड़ा दी’ रेल मंत्रालय में सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2025 की शुरुआत