हॉस्पिटल ने 90 वर्षीय महिला का रोबोटिक बाइलेटरल नी रिप्लेसमेंट बिना किसी जटिलता करके मरीज़ को चलने-फिरने में बनाया सक्षम 24 News Update उदयपुर: एक बड़ी मेडिकल कामयाबी हासिल करते हुए पारस हेल्थ उदयपुर की ऑर्थोपेडिक टीम ने एक ही ऑपरेशन (सिमिटेनियस रोबोटिक बाइलेटरल नी रिप्लेसमेंट) में दोनों घुटने बदलने के लिए एक एडवांस्ड रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक अंजाम दी है। मरीज़ 90 साल की महिला थी। वह गंभीर अर्थराइटिस की वजह से सालों से बिस्तर पर थी। यह जटिल प्रक्रिया, बिना किसी समस्या के, बिना किसी गलती के पूरी हुई। इसका सफल होना यह दिखाता है कि एडवांस्ड नी ऑपरेशन की सटीकता से बुज़ुर्ग मरीज़ों में भी बदलाव लाया जा सकता है।बुज़ुर्ग मरीज़ को हॉस्पिटल इसलिए लाया गया था, क्योंकि वह कई सालों से घुटने की क्रोनिक बीमारी की वजह से ज़्यादातर हिल-डुल नहीं पा रही थी और व्हीलचेयर पर थी। इससे उनकी जीवन की गुणवत्ता पर काफ़ी असर पड़ा था। उनके पूरे स्वास्थ्य की जांच और मूल्यांकन के बाद टीम ने दोनों घुटनों का एक साथ रोबोटिक-असिस्टेड नी रिप्लेसमेंट करने का फ़ैसला किया। एडवांस्ड रोबोटिक सिस्टम की मदद से टीम सही अलाइनमेंट सुनिश्चित करने, खून की कमी को कम करने और ऑपरेशन के बाद के दर्द को कम करने में कामयाब रही। इससे वह जल्दी चलने-फिरने में सक्षम हो पाई।इस केस पर टिप्पणी करते हुए पारस हेल्थ उदयपुर के रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जन और सीनियर आर्थोपेडिक, आर्थोस्कोपिक डॉ आशीष सिंहल ने कहा, “जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के लिए उम्र कोई पाबंदी नहीं होनी चाहिए। रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट टेक्नोलॉजी में तरक्की होने से हम कम से कम खून के नुकसान और तेज़ी से रिहैबिलिटेशन के साथ बहुत सटीक सर्जरी कर पाते हैं। इस केस में भले ही मरीज़ 90 साल की थी और बिस्तर पर थी, लेकिन संपूर्ण सेहत ने हमें भरोसे के साथ आगे बढ़ने दिया। रोबोटिक सिस्टम ने सबसे अच्छा अलाइनमेंट और संतुलन सुनिश्चित करने में मदद की। इससे उनकी तेज़ी से रिकवरी हुई और वह जल्दी चलने-फिरने लगी।”सर्जरी के बाद बुज़ुर्ग मरीज़ अपनी ज्यादा उम्र के बावजूद चिकित्सीय रूप से स्थिर (मेडिकली स्टेबल) थी। उन्होंने बहुत अच्छी रिकवरी दिखाई, और पहले ही दिन सहारे से चलने लगीं। अगले दिन तक वह रोज़ाना के काम करने लगीं। वह सीढ़ियाँ भी चढ़ने लगी। इस सुधार से पता चलता है कि ज़्यादा उम्र में भी रोबोटिक-असिस्टेड जॉइंट रिप्लेसमेंट कितना असरदार होता है।यह केस दिखाता है कि एक ही समय में सावधानीपूर्वक चुने हुए बुजुर्ग मरीजों की सेहत को देखते हुए उनमें दोनों घुटनों पर रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट करना एक सुरक्षित और असरदार विकल्प हो सकता है। एडवांस्ड रोबोटिक टेक्नोलॉजी सर्जनों को हर मरीज़ के शरीर के हिसाब से सर्जरी को कस्टमाइज़ करने में मदद करती है। इससे इलाज अच्छे से हो पाता है और ठीक होने के बाद घुटने का मूवमेंट भी बेहतर होता है।इसके अलावा यह सफल केस पारस हेल्थ उदयपुर के अत्याधुनिक आर्थोपेडिक देखभाल प्रदान करने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, फिर मरीज़ की उम्र चाहे 90 साल हो या 99 साल, पारस हेल्थ उदयपुर सभी को बेहतर इलाज़ प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation डॉक्टर सक्का विश्व के 195 देशों को भेंट करेंगे 195 मिनट में बनाए गए 195 चांदी के तिरंगे झंडे रचे एक साथ 195 विश्व रिकॉर्ड इस्कॉन कोवे में 8 को गौर उत्सव एवं फूलों की होली